Madhavi Lata On AIMIM: BJP नेता माधवी लता AIMIM पर बरसीं, बोलीं -'रमज़ान का असली मतलब...'

माधवी लता ने AIMIM पर निशाना साधते हुए इफ्तार कार्यक्रमों को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने एक इफ्तार इवेंट के पोस्टर हटाते हुए कहा कि रमज़ान का असली मतलब त्याग, इबादत और जरूरतमंदों की मदद करना है, लेकिन आज कई जगह इफ्तार को सिर्फ दिखावे और बड़े आयोजनों तक सीमित कर दिया गया है. माधवी लता ने कहा कि रमज़ान का महीना लोगों की मदद करने और भूखे लोगों को खाना खिलाने का समय होता है. इफ्तार का असली उद्देश्य रोज़ा खोलने के समय जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुंचाना और उनके दुख-दर्द में साथ देना है. उन्होंने कहा कि आजकल कई जगह बड़े-बड़े बैंक्वेट हॉल में इफ्तार पार्टियां होती हैं, जहां चमकदार लाइटें, वीआईपी निमंत्रण कार्ड और लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं. उनके मुताबिक इस तरह के आयोजन रमज़ान की भावना से मेल नहीं खाते और यह केवल दिखावा बनकर रह गया है. माधवी लता ने उठाए सवाल माधवी लता ने सवाल उठाया कि जब कई गरीब परिवारों के पास रोज़ा खोलने के लिए पर्याप्त खाना नहीं होता, तब महंगे होटलों और बड़े हॉल में इफ्तार पार्टियां करने का क्या मतलब है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर समाज के जरूरतमंद बच्चों और गरीब परिवारों की मदद की जाए तो वही असली इफ्तार और असली सेवा होगी. माधवी लता ने कहा कि असली सदका और ज़कात वही है, जिससे किसी गरीब के घर में चूल्हा जल सके और किसी जरूरतमंद बच्चे के चेहरे पर मुस्कान आ सके. उन्होंने कहा कि केवल फोटो खिंचवाने और प्रचार के लिए किए गए आयोजन से समाज की भलाई नहीं होती. माधवी लता के बयान से मचा बवाल माधवी लता के इस कदम पर विवाद भी खड़ा हो गया है. कुछ लोग इसे राजनीतिक बयान बता रहे हैं, जबकि उनके समर्थकों का कहना है कि रमज़ान का महीना सादगी और सच्चाई का समय है और इसमें दिखावे की जगह जरूरतमंदों की मदद को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.

Mar 13, 2026 - 10:31
 0
Madhavi Lata On AIMIM: BJP नेता माधवी लता AIMIM पर बरसीं, बोलीं -'रमज़ान का असली मतलब...'

माधवी लता ने AIMIM पर निशाना साधते हुए इफ्तार कार्यक्रमों को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने एक इफ्तार इवेंट के पोस्टर हटाते हुए कहा कि रमज़ान का असली मतलब त्याग, इबादत और जरूरतमंदों की मदद करना है, लेकिन आज कई जगह इफ्तार को सिर्फ दिखावे और बड़े आयोजनों तक सीमित कर दिया गया है.

माधवी लता ने कहा कि रमज़ान का महीना लोगों की मदद करने और भूखे लोगों को खाना खिलाने का समय होता है. इफ्तार का असली उद्देश्य रोज़ा खोलने के समय जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुंचाना और उनके दुख-दर्द में साथ देना है. उन्होंने कहा कि आजकल कई जगह बड़े-बड़े बैंक्वेट हॉल में इफ्तार पार्टियां होती हैं, जहां चमकदार लाइटें, वीआईपी निमंत्रण कार्ड और लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं. उनके मुताबिक इस तरह के आयोजन रमज़ान की भावना से मेल नहीं खाते और यह केवल दिखावा बनकर रह गया है.

माधवी लता ने उठाए सवाल

माधवी लता ने सवाल उठाया कि जब कई गरीब परिवारों के पास रोज़ा खोलने के लिए पर्याप्त खाना नहीं होता, तब महंगे होटलों और बड़े हॉल में इफ्तार पार्टियां करने का क्या मतलब है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर समाज के जरूरतमंद बच्चों और गरीब परिवारों की मदद की जाए तो वही असली इफ्तार और असली सेवा होगी. माधवी लता ने कहा कि असली सदका और ज़कात वही है, जिससे किसी गरीब के घर में चूल्हा जल सके और किसी जरूरतमंद बच्चे के चेहरे पर मुस्कान आ सके. उन्होंने कहा कि केवल फोटो खिंचवाने और प्रचार के लिए किए गए आयोजन से समाज की भलाई नहीं होती.

माधवी लता के बयान से मचा बवाल

माधवी लता के इस कदम पर विवाद भी खड़ा हो गया है. कुछ लोग इसे राजनीतिक बयान बता रहे हैं, जबकि उनके समर्थकों का कहना है कि रमज़ान का महीना सादगी और सच्चाई का समय है और इसमें दिखावे की जगह जरूरतमंदों की मदद को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow