Land For Job Case: लालू यादव ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका, मुकदमा और चार्जशीट रद्द करने की मांग

Lalu Yadav: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने 'लैंड फॉर जॉब' मामले के मुकदमे पर रोक के लिए अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इससे पहले 29 मई को दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मुकदमे पर रोक से मना कर दिया था. दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि मुकदमे को रोकने के लिए कोई ठोस वजह नहीं है. हालांकि, एफआईआर निरस्त करने की उनकी याचिका अभी हाई कोर्ट में भी लंबित है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार (18 जुलाई, 2025 को लालू यादव की याचिका पर सुनवाई कर सकता है. जमीन के बदले नौकरी का मामला यह मामला रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में ग्रुप डी की नौकरियों से जुड़ा है. आरोप है कि साल 2004 से साल 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने नौकरी के बदले जमीनें ली. जिसे उन्होंने अपने परिवार और सहयोगियों के नाम ट्रांसफर करवाया था. मई, 2022 में दर्ज एफआईआर में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी और परिवार के कुछ और सदस्यों के नाम शामिल हैं. लालू यादव ने की निचली अदालत की कार्रवाई रोकने की मांग सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई अपनी याचिका में लालू यादव ने निचली अदालत की कार्रवाई रोकने की मांग की है. साथ ही, एफआईआर निरस्त करने भी मांग की है. इसके अलावा उन्होंने 2022, 2023 और 2024 में दाखिल तीन चार्जशीट को भी रद्द करने की मांग की है. उन्होंने दलील दी है कि एफआईआर 14 साल की देरी से दर्ज हुई. मामले में पहले भी प्राथमिक जांच हुई थी, जिसे बंद कर दिया गया था. भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 17A में संबंधित अधिकारी से अनुमति के बाद ही केस की व्यवस्था है. उसका उल्लंघन हुआ है. हालांकि, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 12 अगस्त को तय की गई है. यह भी पढ़ेंः बंगाल में चुनाव से पहले PM मोदी का दौरा, दुर्गापुर में रैली, 5 हजार करोड़ की परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन

Jul 17, 2025 - 21:30
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Land For Job Case: लालू यादव ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका, मुकदमा और चार्जशीट रद्द करने की मांग

Lalu Yadav: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने 'लैंड फॉर जॉब' मामले के मुकदमे पर रोक के लिए अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इससे पहले 29 मई को दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मुकदमे पर रोक से मना कर दिया था. दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि मुकदमे को रोकने के लिए कोई ठोस वजह नहीं है.

हालांकि, एफआईआर निरस्त करने की उनकी याचिका अभी हाई कोर्ट में भी लंबित है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार (18 जुलाई, 2025 को लालू यादव की याचिका पर सुनवाई कर सकता है.

जमीन के बदले नौकरी का मामला

यह मामला रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में ग्रुप डी की नौकरियों से जुड़ा है. आरोप है कि साल 2004 से साल 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने नौकरी के बदले जमीनें ली. जिसे उन्होंने अपने परिवार और सहयोगियों के नाम ट्रांसफर करवाया था. मई, 2022 में दर्ज एफआईआर में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी और परिवार के कुछ और सदस्यों के नाम शामिल हैं.

लालू यादव ने की निचली अदालत की कार्रवाई रोकने की मांग

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई अपनी याचिका में लालू यादव ने निचली अदालत की कार्रवाई रोकने की मांग की है. साथ ही, एफआईआर निरस्त करने भी मांग की है. इसके अलावा उन्होंने 2022, 2023 और 2024 में दाखिल तीन चार्जशीट को भी रद्द करने की मांग की है. उन्होंने दलील दी है कि एफआईआर 14 साल की देरी से दर्ज हुई. मामले में पहले भी प्राथमिक जांच हुई थी, जिसे बंद कर दिया गया था. भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 17A में संबंधित अधिकारी से अनुमति के बाद ही केस की व्यवस्था है. उसका उल्लंघन हुआ है. हालांकि, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 12 अगस्त को तय की गई है.

यह भी पढ़ेंः बंगाल में चुनाव से पहले PM मोदी का दौरा, दुर्गापुर में रैली, 5 हजार करोड़ की परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन

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