LAC पर चीनी सैनिकों की तैनाती कम होने पर बोली कांग्रेस- संवाद और भरोसे ही…

रक्षा मंत्रालय की एक रिपोर्ट में भारत-चीन संबंधों में सुधार और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी पीएलए सैनिकों की तैनाती में कमी आने की बात कहे जाने के बाद कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी बने रहेंगे. पार्टी का मानना है कि इन मतभेदों का समाधान केवल निरंतर संवाद, बातचीत और आपसी विश्वास बढ़ाने के प्रयासों के जरिए ही संभव है. साथ ही कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार से पारदर्शिता बरतने की मांग की. कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि भारत और चीन के संबंध काफी जटिल हैं. दोनों देशों के बीच व्यापार, सीमा विवाद और सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे हैं. उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान केवल लगातार बातचीत और सहभागिता से ही संभव है. संवाद से ही समाधान समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में चिदंबरम ने कहा, "भारत और चीन के रिश्ते कई स्तरों पर आधारित हैं. हमारे बीच व्यापारिक संबंध हैं, सीमा विवाद हैं और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी हैं. इन सभी मुद्दों को केवल लगातार संवाद के जरिए ही सुलझाया जा सकता है. हम दोनों बड़े देश हैं. बड़ी आबादी, मजबूत अर्थव्यवस्था और शक्तिशाली सैन्य क्षमता रखते हैं तथा पड़ोसी भी हैं. इस सच्चाई को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता." उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह दावा कर रही है कि एलएसी पर चीनी सैनिकों की तैनाती कम हुई है, तो उसे यह भी बताना चाहिए कि वास्तव में कितनी कमी आई है. सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या भारतीय क्षेत्र में किसी प्रकार की घुसपैठ हुई है या नहीं और सीमा पर चीन की ओर से कोई नई सैन्य संरचना या किलेबंदी की गई है या नहीं. चिदंबरम ने कहा, "सरकार जब ऐसे दावे करती है, तो उसे पूरी पारदर्शिता के साथ तथ्य भी सामने रखने चाहिए. हालांकि संवाद का स्वागत है और लगातार बातचीत से ही समस्याओं का समाधान निकलेगा." वहीं, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पूर्वी लद्दाख में गश्त व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि मई 2020 से पहले भारतीय सेना लद्दाख क्षेत्र के कुछ गश्ती बिंदुओं तक नियमित रूप से पहुंचती थी. अब यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या भारतीय जवान आज भी उन स्थानों तक गश्त कर पा रहे हैं या नहीं. कांग्रेस ने पूछे सवाल उन्होंने पूछा कि क्या सीमा पर पहले जैसी स्थिति बहाल हुई है या नहीं. पवन खेड़ा ने कहा कि रक्षा मंत्री, रक्षा मंत्रालय या गृह मंत्री को इन सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए. रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, भारत द्वारा एलएसी और पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में 10 ब्रिगेड स्तर की सैन्य टुकड़ियां तैनात किए जाने के बाद भारत की उत्तरी सीमाओं के सामने चीनी पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) की तैनाती में उल्लेखनीय कमी देखी गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय सेना की एलएसी के सभी क्षेत्रों में तैनाती मजबूत, संतुलित और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. मंत्रालय के अनुसार, 2025 के दौरान तैनात की गई 10 ब्रिगेड संयुक्त हथियार (कंबाइंड आर्म्स) संरचना वाली थीं, जिनमें पैदल सेना, बख्तरबंद इकाइयां, तोपखाना और वायु रक्षा इकाइयां शामिल थीं. ये टुकड़ियां स्वतंत्र रूप से सैन्य अभियान चलाने और विभिन्न परिस्थितियों में प्रभावी जवाब देने में सक्षम हैं. रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ भारत और चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर संवाद भी जारी रहा, जिससे सीमा क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिली. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि दोनों देशों के बीच बातचीत और सीमा से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए विभिन्न तंत्रों को फिर से सक्रिय किया गया है और उन्हें आगे भी जारी रखा जाएगा. ये भी पढ़ें: राजस्थान: 'सुशासन और विकास', नगर निकाय चुनाव में जीत पर क्या बोले अमित शाह-राजनाथ

Sep 14, 2026 - 23:30
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LAC पर चीनी सैनिकों की तैनाती कम होने पर बोली कांग्रेस- संवाद और भरोसे ही…

रक्षा मंत्रालय की एक रिपोर्ट में भारत-चीन संबंधों में सुधार और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी पीएलए सैनिकों की तैनाती में कमी आने की बात कहे जाने के बाद कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी बने रहेंगे. पार्टी का मानना है कि इन मतभेदों का समाधान केवल निरंतर संवाद, बातचीत और आपसी विश्वास बढ़ाने के प्रयासों के जरिए ही संभव है. साथ ही कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार से पारदर्शिता बरतने की मांग की.

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि भारत और चीन के संबंध काफी जटिल हैं. दोनों देशों के बीच व्यापार, सीमा विवाद और सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे हैं. उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान केवल लगातार बातचीत और सहभागिता से ही संभव है.

संवाद से ही समाधान

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में चिदंबरम ने कहा, "भारत और चीन के रिश्ते कई स्तरों पर आधारित हैं. हमारे बीच व्यापारिक संबंध हैं, सीमा विवाद हैं और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी हैं. इन सभी मुद्दों को केवल लगातार संवाद के जरिए ही सुलझाया जा सकता है. हम दोनों बड़े देश हैं. बड़ी आबादी, मजबूत अर्थव्यवस्था और शक्तिशाली सैन्य क्षमता रखते हैं तथा पड़ोसी भी हैं. इस सच्चाई को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता."

उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह दावा कर रही है कि एलएसी पर चीनी सैनिकों की तैनाती कम हुई है, तो उसे यह भी बताना चाहिए कि वास्तव में कितनी कमी आई है. सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या भारतीय क्षेत्र में किसी प्रकार की घुसपैठ हुई है या नहीं और सीमा पर चीन की ओर से कोई नई सैन्य संरचना या किलेबंदी की गई है या नहीं. चिदंबरम ने कहा, "सरकार जब ऐसे दावे करती है, तो उसे पूरी पारदर्शिता के साथ तथ्य भी सामने रखने चाहिए.

हालांकि संवाद का स्वागत है और लगातार बातचीत से ही समस्याओं का समाधान निकलेगा." वहीं, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पूर्वी लद्दाख में गश्त व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि मई 2020 से पहले भारतीय सेना लद्दाख क्षेत्र के कुछ गश्ती बिंदुओं तक नियमित रूप से पहुंचती थी. अब यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या भारतीय जवान आज भी उन स्थानों तक गश्त कर पा रहे हैं या नहीं.

कांग्रेस ने पूछे सवाल

उन्होंने पूछा कि क्या सीमा पर पहले जैसी स्थिति बहाल हुई है या नहीं. पवन खेड़ा ने कहा कि रक्षा मंत्री, रक्षा मंत्रालय या गृह मंत्री को इन सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए. रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, भारत द्वारा एलएसी और पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में 10 ब्रिगेड स्तर की सैन्य टुकड़ियां तैनात किए जाने के बाद भारत की उत्तरी सीमाओं के सामने चीनी पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) की तैनाती में उल्लेखनीय कमी देखी गई है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय सेना की एलएसी के सभी क्षेत्रों में तैनाती मजबूत, संतुलित और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. मंत्रालय के अनुसार, 2025 के दौरान तैनात की गई 10 ब्रिगेड संयुक्त हथियार (कंबाइंड आर्म्स) संरचना वाली थीं, जिनमें पैदल सेना, बख्तरबंद इकाइयां, तोपखाना और वायु रक्षा इकाइयां शामिल थीं. ये टुकड़ियां स्वतंत्र रूप से सैन्य अभियान चलाने और विभिन्न परिस्थितियों में प्रभावी जवाब देने में सक्षम हैं.

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ भारत और चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर संवाद भी जारी रहा, जिससे सीमा क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिली. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि दोनों देशों के बीच बातचीत और सीमा से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए विभिन्न तंत्रों को फिर से सक्रिय किया गया है और उन्हें आगे भी जारी रखा जाएगा.

ये भी पढ़ें: राजस्थान: 'सुशासन और विकास', नगर निकाय चुनाव में जीत पर क्या बोले अमित शाह-राजनाथ

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