ITR: क्या गृहणियों को भी भरना चाहिए Income Tax, इससे फायदा है या नुकसान?

ITR Filing News: इनकम टैक्स रिटर्न भरना एक बेहद जरूरी वित्तीय जिम्मेदारी है, जिसको हर सैलरी पाने वाला या बिजनेस करने वाला व्यक्ति भरता ही है. कई लोगों को केवल यही पता है कि इनकम टैक्स केवल नौकरीपेशा लोग ही भरते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि घरेलू महिलाएं या गृहणियां जो बाहर नौकरी नहीं करती हैं वो भी टैक्स भरती है. नहीं जानते? तो आइये बताते हैं. क्या गृहणियां भी भरती हैं ITR?गृहिणी की कोई नौकरी या तय सैलरी नहीं होती, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि उनकी कोई आय नहीं हो सकती. अगर किसी गृहिणी की आय ब्याज, किराए, निवेश या किसी अन्य स्रोत से होती है, तो उसे आयकर के नियमों को समझना जरूरी है और टैक्स भरना भी बेहद जरूरी है. क्या कहते हैं नियम?इनकम टैक्स एक्ट के मुताबिक अगर गृहिणी की सालाना आय तय बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट से कम है, तो आमतौर पर उसे ITR भरने की जरूरत नहीं होती. 60 साल से कम उम्र के लोगों के लिए नई टैक्स व्यवस्था में ये सीमा 4 लाख रुपये और पुराने टैक्स स्लैब में 2.5 लाख रुपये है. अगर गृहिणी की आय इस सीमा से ज्यादा है, तो उसे अपनी आय के हिसाब से ITR दाखिल करना पड़ सकता है. 80 साल से ज्यादा उम्र के सुपर सीनियर सिटीजन के लिए भी अलग आय सीमा लागू होती है. ये भी पढ़ें: Old Coin: पुराने सिक्के बेचकर कमाएं 10 लाख, PM मोदी ने वीडियो में कहा? सरकार ने क्या बताया क्या हो सकते हैं गृहणियों के आय के स्त्रोत?गृहिणियों के पास नौकरी नहीं होती, लेकिन इससे ये बिलकुल भी मतलब नहीं है कि उनका कोई सोर्स ऑफ इनकम ही नहीं होता. क्योंकि उन्हें दूसरे स्रोतों से आय मिल सकती है. आइये बताते हैं क्या हो सकते हैं ये स्त्रोत: पति अगर घर चलाने के लिए पत्नी को पैसे देता है, तो सामान्य तौर पर इसे पत्नी की आय नहीं माना जाता. भले ही ये पैसा पत्नी के बैंक खाते में जमा हो. अगर गृहिणी के नाम पर FD है, तो उससे मिलने वाला ब्याज उनकी आय माना जाता है और नियमों के अनुसार इस पर टैक्स लग सकता है. अगर पति अपने पैसे से पत्नी के नाम पर निवेश करता है, तो टैक्स के नियमों के तहत निवेश और उससे होने वाली आय का अलग-अलग तरीके से आकलन किया जा सकता है. कुछ मामलों में आय को पति की आय से भी जोड़ा जा सकता है. रिश्तेदारों से मिले कुछ गिफ्ट्स टैक्स से छूट सकते हैं. वहीं, गैर-रिश्तेदारों से मिले तोहफों की कुल कीमत एक वित्तीय वर्ष में 50 हजार से ज्यादा होने पर उन पर टैक्स लग सकता है. कैसे पता करें टैक्स में आने वाली आयटैक्सेबल इनकम पता करने के लिए गृहिणियों को अपनी सभी टैक्स योग्य आय को जोड़ना चाहिए. इसमें बैंक या FD का ब्याज, किराए से मिलने वाली आय और निवेश से होने वाली कमाई शामिल हो सकती है. इसके बाद जिन कटौतियों और छूट का लाभ मिलता है, उन्हें घटाया जाता है. PPF, NSC, हेल्थ इंश्योरेंस और योग्य दान जैसी चीजों पर मिलने वाली कटौती भी इसमें शामिल हो सकती है. ये भी पढ़ें: नए-नए विधायक बने प्रशांत किशोर की नेटवर्थ कितनी है? पत्नी के पास है इतनी दौलत

Aug 4, 2026 - 22:30
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ITR: क्या गृहणियों को भी भरना चाहिए Income Tax, इससे फायदा है या नुकसान?

ITR Filing News: इनकम टैक्स रिटर्न भरना एक बेहद जरूरी वित्तीय जिम्मेदारी है, जिसको हर सैलरी पाने वाला या बिजनेस करने वाला व्यक्ति भरता ही है. कई लोगों को केवल यही पता है कि इनकम टैक्स केवल नौकरीपेशा लोग ही भरते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि घरेलू महिलाएं या गृहणियां जो बाहर नौकरी नहीं करती हैं वो भी टैक्स भरती है. नहीं जानते? तो आइये बताते हैं.

क्या गृहणियां भी भरती हैं ITR?
गृहिणी की कोई नौकरी या तय सैलरी नहीं होती, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि उनकी कोई आय नहीं हो सकती. अगर किसी गृहिणी की आय ब्याज, किराए, निवेश या किसी अन्य स्रोत से होती है, तो उसे आयकर के नियमों को समझना जरूरी है और टैक्स भरना भी बेहद जरूरी है.

क्या कहते हैं नियम?
इनकम टैक्स एक्ट के मुताबिक अगर गृहिणी की सालाना आय तय बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट से कम है, तो आमतौर पर उसे ITR भरने की जरूरत नहीं होती. 60 साल से कम उम्र के लोगों के लिए नई टैक्स व्यवस्था में ये सीमा 4 लाख रुपये और पुराने टैक्स स्लैब में 2.5 लाख रुपये है. अगर गृहिणी की आय इस सीमा से ज्यादा है, तो उसे अपनी आय के हिसाब से ITR दाखिल करना पड़ सकता है. 80 साल से ज्यादा उम्र के सुपर सीनियर सिटीजन के लिए भी अलग आय सीमा लागू होती है.

ये भी पढ़ें: Old Coin: पुराने सिक्के बेचकर कमाएं 10 लाख, PM मोदी ने वीडियो में कहा? सरकार ने क्या बताया

क्या हो सकते हैं गृहणियों के आय के स्त्रोत?
गृहिणियों के पास नौकरी नहीं होती, लेकिन इससे ये बिलकुल भी मतलब नहीं है कि उनका कोई सोर्स ऑफ इनकम ही नहीं होता. क्योंकि उन्हें दूसरे स्रोतों से आय मिल सकती है. आइये बताते हैं क्या हो सकते हैं ये स्त्रोत:

  • पति अगर घर चलाने के लिए पत्नी को पैसे देता है, तो सामान्य तौर पर इसे पत्नी की आय नहीं माना जाता. भले ही ये पैसा पत्नी के बैंक खाते में जमा हो.
  • अगर गृहिणी के नाम पर FD है, तो उससे मिलने वाला ब्याज उनकी आय माना जाता है और नियमों के अनुसार इस पर टैक्स लग सकता है.
  • अगर पति अपने पैसे से पत्नी के नाम पर निवेश करता है, तो टैक्स के नियमों के तहत निवेश और उससे होने वाली आय का अलग-अलग तरीके से आकलन किया जा सकता है. कुछ मामलों में आय को पति की आय से भी जोड़ा जा सकता है.
  • रिश्तेदारों से मिले कुछ गिफ्ट्स टैक्स से छूट सकते हैं. वहीं, गैर-रिश्तेदारों से मिले तोहफों की कुल कीमत एक वित्तीय वर्ष में 50 हजार से ज्यादा होने पर उन पर टैक्स लग सकता है.

कैसे पता करें टैक्स में आने वाली आय
टैक्सेबल इनकम पता करने के लिए गृहिणियों को अपनी सभी टैक्स योग्य आय को जोड़ना चाहिए. इसमें बैंक या FD का ब्याज, किराए से मिलने वाली आय और निवेश से होने वाली कमाई शामिल हो सकती है. इसके बाद जिन कटौतियों और छूट का लाभ मिलता है, उन्हें घटाया जाता है. PPF, NSC, हेल्थ इंश्योरेंस और योग्य दान जैसी चीजों पर मिलने वाली कटौती भी इसमें शामिल हो सकती है.

ये भी पढ़ें: नए-नए विधायक बने प्रशांत किशोर की नेटवर्थ कितनी है? पत्नी के पास है इतनी दौलत

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