India-US Trade Deal: भारत पर कब लागू होगा 18 प्रतिशत टैरिफ, व्हाइट हाउस ने बयान में क्या-क्या बताया, पढ़ें 12 जरूरी पॉइंट्स

भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार को नई दिशा देने के लिए एक अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा तैयार किया है. इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करना, बाजार पहुंच बढ़ाना और भविष्य में व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी BTA की नींव रखना है. दोनों देशों ने स्पष्ट किया है कि यह ढांचा जल्द लागू किया जाएगा और तय रोडमैप के अनुसार अंतिम समझौते की ओर बढ़ा जाएगा. इस अंतरिम समझौते के तहत भारत ने सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर शुल्क समाप्त या कम करने पर सहमति जताई है. इसके साथ ही कई अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों को भी भारतीय बाजार में आसान पहुंच मिलेगी. इनमें पशु आहार में इस्तेमाल होने वाले सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स, लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, वाइन, स्पिरिट्स और अन्य कृषि उत्पाद शामिल हैं. इसका सीधा असर भारतीय आयात नीति पर पड़ेगा और उपभोक्ताओं को अधिक ऑप्शन मिलेंगे. अमेरिका-भारत अंतरिम समझौते की प्रमुख शर्तें इस प्रकार है: • भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कुछ अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों पर शुल्क समाप्त या कम करेगा, जिनमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs), पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रोसेस्ड फ्रू़ड, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स और अन्य उत्पाद शामिल हैं. • अमेरिका ने 2 अप्रैल 2025 के कार्यकारी आदेश 14257 (व्यापार घाटे को कम करने हेतु पारस्परिक शुल्क विनियमन) के तहत, भारत से आने वाले मूल उत्पादों पर 18 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाएगा, जिनमें कपड़े और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, जैविक रसायन, गृह सजावट, हैंड क्राफ्ट प्रोडक्ट उत्पाद और कुछ मशीनरी शामिल हैं. साथ ही, अंतरिम समझौते के बाद, 5 सितंबर 2025 के कार्यकारी आदेश 14346 की लिस्ट में चिन्हित वस्तुओं पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को हटाया जाएगा, जिनमें जेनेरिक दवाएं, रत्न और हीरे और विमान के पुर्जे शामिल हैं. • अमेरिका भारत के कुछ विमानों और विमान पुर्जों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से लगाए गए शुल्क को हटाएगा. इसी तरह, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप, भारत को ऑटोमोबाइल पुर्जों पर तरजीही शुल्क कोटा प्रदान किया जाएगा. इसके अलावा, दवाओं और उन्हें तैयार किए जाने वाले समान पर अमेरिकी धारा 232 की जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय किए जाएंगे. • अमेरिका और भारत आपसी हित के क्षेत्रों में एक-दूसरे को निरंतर आधार पर तरजीही बाजार पहुंच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. • दोनों देश ऐसे मूल-नियम (रूल्स ऑफ ओरिजिन) स्थापित करेंगे, जिससे समझौते का लाभ मुख्य रूप से अमेरिका और भारत को ही मिले. • अमेरिका और भारत द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करेंगे. भारत अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों के व्यापार में लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर करने, आईसीटी उत्पादों के लिए आयात लाइसेंस प्रक्रियाओं को सरल बनाने और 6 महीने के भीतर यह तय करने पर सहमत है कि अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय मानक भारतीय बाजार में स्वीकार्य होंगे या नहीं. साथ ही, भारत अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों से जुड़ी गैर-शुल्क बाधाओं को भी दूर करेगा. • तकनीकी नियमों के अनुपालन को आसान बनाने के उद्देश्य से, दोनों देश आपसी सहमति वाले क्षेत्रों में मानकों और अनुरूपता मूल्यांकन प्रक्रियाओं पर चर्चा करेंगे. • अगर किसी भी देश की तरफ तय शुल्क में कोई बदलाव किया जाता है तो दूसरा देश भी अपनी प्रतिबद्धताओं में संशोधन कर सकेगा. • अमेरिका और भारत बीटीए वार्ताओं के माध्यम से बाजार पहुंच के अवसरों को और विस्तार देने की दिशा में कार्य करेंगे. अमेरिका इस दौरान भारतीय वस्तुओं पर शुल्क कम करने के भारत के अनुरोध पर विचार करेगा. • दोनों देश आपूर्ति शृंखला की मजबूती और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सुरक्षा सहयोग को मजबूत करेंगे तथा तीसरे पक्ष की गैर-बाजार नीतियों से निपटने, निवेश समीक्षा और निर्यात नियंत्रण के क्षेत्रों में सहयोग करेंगे. • भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा रखता है. दोनों देश तकनीकी उत्पादों, विशेष रूप से ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPU) और डेटा सेंटर से जुड़े अन्य उत्पादों के व्यापार को बढ़ाएंगे और संयुक्त तकनीकी सहयोग का विस्तार करेंगे. • अमेरिका और भारत डिजिटल व्यापार में भेदभावपूर्ण या बोझिल प्रक्रियाओं और अन्य बाधाओं को दूर करने और बीटीए के तहत मजबूत, महत्वाकांक्षी और पारस्परिक रूप से लाभकारी डिजिटल व्यापार नियम तय करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. अमेरिका और भारत इस ढांचे को शीघ्र लागू करेंगे और संदर्भ शर्तों (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) में तय रोडमैप के अनुरूप, पारस्परिक रूप से लाभकारी बीटीए को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से अंतरिम समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देंगे.

Feb 7, 2026 - 12:30
 0
India-US Trade Deal: भारत पर कब लागू होगा 18 प्रतिशत टैरिफ, व्हाइट हाउस ने बयान में क्या-क्या बताया, पढ़ें 12 जरूरी पॉइंट्स

भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार को नई दिशा देने के लिए एक अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा तैयार किया है. इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करना, बाजार पहुंच बढ़ाना और भविष्य में व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी BTA की नींव रखना है. दोनों देशों ने स्पष्ट किया है कि यह ढांचा जल्द लागू किया जाएगा और तय रोडमैप के अनुसार अंतिम समझौते की ओर बढ़ा जाएगा.

इस अंतरिम समझौते के तहत भारत ने सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर शुल्क समाप्त या कम करने पर सहमति जताई है. इसके साथ ही कई अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों को भी भारतीय बाजार में आसान पहुंच मिलेगी. इनमें पशु आहार में इस्तेमाल होने वाले सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स, लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, वाइन, स्पिरिट्स और अन्य कृषि उत्पाद शामिल हैं. इसका सीधा असर भारतीय आयात नीति पर पड़ेगा और उपभोक्ताओं को अधिक ऑप्शन मिलेंगे.

अमेरिका-भारत अंतरिम समझौते की प्रमुख शर्तें इस प्रकार है:

• भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कुछ अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों पर शुल्क समाप्त या कम करेगा, जिनमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs), पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रोसेस्ड फ्रू़ड, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स और अन्य उत्पाद शामिल हैं.

• अमेरिका ने 2 अप्रैल 2025 के कार्यकारी आदेश 14257 (व्यापार घाटे को कम करने हेतु पारस्परिक शुल्क विनियमन) के तहत, भारत से आने वाले मूल उत्पादों पर 18 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाएगा, जिनमें कपड़े और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, जैविक रसायन, गृह सजावट, हैंड क्राफ्ट प्रोडक्ट उत्पाद और कुछ मशीनरी शामिल हैं. साथ ही, अंतरिम समझौते के बाद, 5 सितंबर 2025 के कार्यकारी आदेश 14346 की लिस्ट में चिन्हित वस्तुओं पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को हटाया जाएगा, जिनमें जेनेरिक दवाएं, रत्न और हीरे और विमान के पुर्जे शामिल हैं.

• अमेरिका भारत के कुछ विमानों और विमान पुर्जों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से लगाए गए शुल्क को हटाएगा. इसी तरह, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप, भारत को ऑटोमोबाइल पुर्जों पर तरजीही शुल्क कोटा प्रदान किया जाएगा. इसके अलावा, दवाओं और उन्हें तैयार किए जाने वाले समान पर अमेरिकी धारा 232 की जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय किए जाएंगे.

• अमेरिका और भारत आपसी हित के क्षेत्रों में एक-दूसरे को निरंतर आधार पर तरजीही बाजार पहुंच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

• दोनों देश ऐसे मूल-नियम (रूल्स ऑफ ओरिजिन) स्थापित करेंगे, जिससे समझौते का लाभ मुख्य रूप से अमेरिका और भारत को ही मिले.

• अमेरिका और भारत द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करेंगे. भारत अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों के व्यापार में लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर करने, आईसीटी उत्पादों के लिए आयात लाइसेंस प्रक्रियाओं को सरल बनाने और 6 महीने के भीतर यह तय करने पर सहमत है कि अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय मानक भारतीय बाजार में स्वीकार्य होंगे या नहीं. साथ ही, भारत अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों से जुड़ी गैर-शुल्क बाधाओं को भी दूर करेगा.

• तकनीकी नियमों के अनुपालन को आसान बनाने के उद्देश्य से, दोनों देश आपसी सहमति वाले क्षेत्रों में मानकों और अनुरूपता मूल्यांकन प्रक्रियाओं पर चर्चा करेंगे.

• अगर किसी भी देश की तरफ तय शुल्क में कोई बदलाव किया जाता है तो दूसरा देश भी अपनी प्रतिबद्धताओं में संशोधन कर सकेगा.

• अमेरिका और भारत बीटीए वार्ताओं के माध्यम से बाजार पहुंच के अवसरों को और विस्तार देने की दिशा में कार्य करेंगे. अमेरिका इस दौरान भारतीय वस्तुओं पर शुल्क कम करने के भारत के अनुरोध पर विचार करेगा.

• दोनों देश आपूर्ति शृंखला की मजबूती और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सुरक्षा सहयोग को मजबूत करेंगे तथा तीसरे पक्ष की गैर-बाजार नीतियों से निपटने, निवेश समीक्षा और निर्यात नियंत्रण के क्षेत्रों में सहयोग करेंगे.

• भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा रखता है. दोनों देश तकनीकी उत्पादों, विशेष रूप से ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPU) और डेटा सेंटर से जुड़े अन्य उत्पादों के व्यापार को बढ़ाएंगे और संयुक्त तकनीकी सहयोग का विस्तार करेंगे.

• अमेरिका और भारत डिजिटल व्यापार में भेदभावपूर्ण या बोझिल प्रक्रियाओं और अन्य बाधाओं को दूर करने और बीटीए के तहत मजबूत, महत्वाकांक्षी और पारस्परिक रूप से लाभकारी डिजिटल व्यापार नियम तय करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. अमेरिका और भारत इस ढांचे को शीघ्र लागू करेंगे और संदर्भ शर्तों (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) में तय रोडमैप के अनुरूप, पारस्परिक रूप से लाभकारी बीटीए को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से अंतरिम समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देंगे.

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow