बदसलूकी करना पड़ा भारी! अब पीड़ित परिवार को 1.5 लाख रुपए का मुआवजा देगी पुलिस, जानें पूरा मामला

Tamil Nadu News: तमिलनाडु के चेन्नई की वीरभारती देवी अपने भाई विमलराज और वकीलों रेवती एवं अशोक के साथ 16 फरवरी 2021 को चेन्नई पुलिस कमिश्नर के कार्यालय पहुंचीं. उनका मकसद पति और रिश्तेदारों के खिलाफ पारिवारिक विवाद दर्ज कराना था. डिप्टी कमिश्नर की सलाह पर वे तांबरम महिला पुलिस स्टेशन गईं. पुलिस ने पीड़ितों के साथ किया दुर्व्यवहार पुलिस स्टेशन में पहुंचने पर पीड़ितों को पीने का पानी नहीं दिया गया और शौचालय का उपयोग भी नहीं करने दिया गया. इसके अलावा, उन्हें धमकी दी गई और झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की गई. वीरभारती देवी और उनके साथियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन किया और दुर्व्यवहार किया. मानवाधिकार आयोग ने लिया कड़ा फैसला पीड़ितों की याचिका पर तमिलनाडु राज्य मानवाधिकार आयोग ने सुनवाई की. आयोग के सदस्य कन्नदासन ने मामले की जांच की और पाया कि पुलिस ने वास्तव में वीरभारती देवी और विमलराज के अधिकारों का उल्लंघन किया. पुलिस अपनी ओर से किसी भी तरह का संतोषजनक जवाब देने में असफल रही. मुआवजे का आदेश आयोग ने आदेश दिया कि तमिलनाडु सरकार को पीड़ितों को कुल 1.50 लाख रुपये का मुआवजा देना होगा. इसमें वीरभारती देवी को 50,000 रुपये और उनके भाई विमलराज को 1 लाख रुपये भुगतान करना अनिवार्य होगा. मुआवजा चार सप्ताह के भीतर दिया जाना चाहिए. इस फैसले से यह स्पष्ट संदेश गया कि पुलिस द्वारा मानवाधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. आयोग ने यह भी कहा कि अधिकारियों को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करना अनिवार्य है. यह मामला पुलिस और नागरिकों के बीच व्यवहार और अधिकारों के महत्व को उजागर करता है और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

Dec 10, 2025 - 23:30
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बदसलूकी करना पड़ा भारी! अब पीड़ित परिवार को 1.5 लाख रुपए का मुआवजा देगी पुलिस, जानें पूरा मामला

Tamil Nadu News: तमिलनाडु के चेन्नई की वीरभारती देवी अपने भाई विमलराज और वकीलों रेवती एवं अशोक के साथ 16 फरवरी 2021 को चेन्नई पुलिस कमिश्नर के कार्यालय पहुंचीं. उनका मकसद पति और रिश्तेदारों के खिलाफ पारिवारिक विवाद दर्ज कराना था. डिप्टी कमिश्नर की सलाह पर वे तांबरम महिला पुलिस स्टेशन गईं.

पुलिस ने पीड़ितों के साथ किया दुर्व्यवहार

पुलिस स्टेशन में पहुंचने पर पीड़ितों को पीने का पानी नहीं दिया गया और शौचालय का उपयोग भी नहीं करने दिया गया. इसके अलावा, उन्हें धमकी दी गई और झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की गई. वीरभारती देवी और उनके साथियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन किया और दुर्व्यवहार किया.

मानवाधिकार आयोग ने लिया कड़ा फैसला

पीड़ितों की याचिका पर तमिलनाडु राज्य मानवाधिकार आयोग ने सुनवाई की. आयोग के सदस्य कन्नदासन ने मामले की जांच की और पाया कि पुलिस ने वास्तव में वीरभारती देवी और विमलराज के अधिकारों का उल्लंघन किया. पुलिस अपनी ओर से किसी भी तरह का संतोषजनक जवाब देने में असफल रही.

मुआवजे का आदेश

आयोग ने आदेश दिया कि तमिलनाडु सरकार को पीड़ितों को कुल 1.50 लाख रुपये का मुआवजा देना होगा. इसमें वीरभारती देवी को 50,000 रुपये और उनके भाई विमलराज को 1 लाख रुपये भुगतान करना अनिवार्य होगा. मुआवजा चार सप्ताह के भीतर दिया जाना चाहिए.

इस फैसले से यह स्पष्ट संदेश गया कि पुलिस द्वारा मानवाधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. आयोग ने यह भी कहा कि अधिकारियों को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करना अनिवार्य है. यह मामला पुलिस और नागरिकों के बीच व्यवहार और अधिकारों के महत्व को उजागर करता है और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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