Hyderabad LPG Crisis: एलपीजी संकट से जूझ रहा हैदराबाद का मशहूर पिस्ता हाउस, हलीम उत्पादन 50 फीसदी तक घटा
हैदराबाद (Hyderabad) की पहचान सिर्फ चारमीनार और बिरयानी से नहीं, बल्कि उस हलीम से भी है, जिसने इस शहर को दुनिया के नक्शे पर एक अलग मुकाम दिलाया. इस हलीम की सबसे बड़ी पहचान पिस्ता हाउस है. हालांकि, इस रमज़ान (Ramzan), जब हलीम की मांग अपने शबाब पर होती है, तब पिस्ता हाउस एक ऐसे संकट से जूझ रहा है जिसकी कल्पना भी नहीं की गई थी. पिस्ता हाउस के मालिक एम.ए. माजिद ने ABP न्यूज़ से बात करते हुए बताया कि रमजान की शुरुआत तो अच्छी रही, लेकिन पिछले दस दिन कारोबार के लिए बेहद मुश्किल साबित हुए. मार्च में जैसे ही ईरान-इज़राइल तनाव भड़का, एलपीजी सिलेंडर के दाम अचानक आसमान छूने लगे. लेकिन हलीम के रेट पहले से तय थे उन्हें बढ़ाना मुमकिन नहीं था. नतीजा? भारी नुकसान, जिसे पिस्ता हाउस ने खामोशी से बर्दाश्त किया. गैस की सप्लाई बंद होने से पड़ी मार मगर असली मार तब पड़ी जब गैस की सप्लाई ही बंद हो गई. हलीम का उत्पादन एक झटके में 40 से 50 प्रतिशत तक गिर गया. मजबूरी में होटल वालों ने लकड़ी का रुख किया, लेकिन यह राहत भी अस्थायी निकली. लकड़ी की मांग एकाएक बढ़ने से उसके दाम भी चढ़ गए और आपूर्ति भी सिमट गई. अब पिस्ता हाउस को मुंहमांगे दामों पर लकड़ी खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है. नुकसान सिर्फ हलीम तक सीमित नहीं. पिस्ता हाउस का होटल, बेकरी और मिठाई का कारोबार भी पिछले दस दिनों से पूरी तरह ठप पड़ा है. हैदराबाद की हलीम पर सकंट हालांकि, माजिद ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री और ईरानी विदेश मंत्री के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद हालात जल्द सामान्य होने की संभावनाएं हैं. इस बीच खबर ये भी है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से 2 LPG जहाज भारत के लिए रवाना हुआ है. हैदराबाद की हलीम की आग भले ही अभी मद्धम पड़ी हो पर पिस्ता हाउस का हौसला अभी भी बुलंद है.
हैदराबाद (Hyderabad) की पहचान सिर्फ चारमीनार और बिरयानी से नहीं, बल्कि उस हलीम से भी है, जिसने इस शहर को दुनिया के नक्शे पर एक अलग मुकाम दिलाया. इस हलीम की सबसे बड़ी पहचान पिस्ता हाउस है. हालांकि, इस रमज़ान (Ramzan), जब हलीम की मांग अपने शबाब पर होती है, तब पिस्ता हाउस एक ऐसे संकट से जूझ रहा है जिसकी कल्पना भी नहीं की गई थी.
पिस्ता हाउस के मालिक एम.ए. माजिद ने ABP न्यूज़ से बात करते हुए बताया कि रमजान की शुरुआत तो अच्छी रही, लेकिन पिछले दस दिन कारोबार के लिए बेहद मुश्किल साबित हुए. मार्च में जैसे ही ईरान-इज़राइल तनाव भड़का, एलपीजी सिलेंडर के दाम अचानक आसमान छूने लगे. लेकिन हलीम के रेट पहले से तय थे उन्हें बढ़ाना मुमकिन नहीं था. नतीजा? भारी नुकसान, जिसे पिस्ता हाउस ने खामोशी से बर्दाश्त किया.
गैस की सप्लाई बंद होने से पड़ी मार
मगर असली मार तब पड़ी जब गैस की सप्लाई ही बंद हो गई. हलीम का उत्पादन एक झटके में 40 से 50 प्रतिशत तक गिर गया. मजबूरी में होटल वालों ने लकड़ी का रुख किया, लेकिन यह राहत भी अस्थायी निकली. लकड़ी की मांग एकाएक बढ़ने से उसके दाम भी चढ़ गए और आपूर्ति भी सिमट गई. अब पिस्ता हाउस को मुंहमांगे दामों पर लकड़ी खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है. नुकसान सिर्फ हलीम तक सीमित नहीं. पिस्ता हाउस का होटल, बेकरी और मिठाई का कारोबार भी पिछले दस दिनों से पूरी तरह ठप पड़ा है.
हैदराबाद की हलीम पर सकंट
हालांकि, माजिद ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री और ईरानी विदेश मंत्री के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद हालात जल्द सामान्य होने की संभावनाएं हैं. इस बीच खबर ये भी है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से 2 LPG जहाज भारत के लिए रवाना हुआ है. हैदराबाद की हलीम की आग भले ही अभी मद्धम पड़ी हो पर पिस्ता हाउस का हौसला अभी भी बुलंद है.
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