History Of Plastic Surgery: कब शुरू हुआ था प्लास्टिक सर्जरी कराने का चलन, जानें पहले कैसे होता था यह?

When Did Plastic Surgery Begin: प्लास्टिक सर्जरी को लेकर इस समय एक बवाल सा मचा हुआ है. बॉलीबुड समेत तमाम फेमस पर्सनलिटी पर प्लास्टिक सर्जरी का आरोप समय-समय पर लगता आया है. बताया जाता है कि लोग अच्छा, सुंदर और अट्रैक्टिव दिखने के लिए इसका सहारा लेते हैं. प्लास्टिक सर्जरी कोई नई चिकित्सा पद्धति नहीं है. इसका इतिहास हजारों साल पुराना है और इसके शुरुआती प्रमाण प्राचीन मिस्र से मिलते हैं. शुरुआती दौर में प्लास्टिक सर्जरी का इस्तेमाल खासतौर पर नाक की मरम्मत के लिए किया जाता था. ‘प्लास्टिक सर्जरी’ शब्द ग्रीक भाषा के शब्द प्लास्टिकोस से निकला है, जिसका अर्थ होता है आकार देना या ढालना. चलिए आपको बताते हैं कि यह कब शुरू हुआ और शुरू में यह कैसे होता है.  प्राचीन कालramsayhealth के अनुसार, प्लास्टिक सर्जरी की शुरुआत हजारों साल पहले प्राचीन सभ्यताओं में हो चुकी थी. इसके शुरुआती प्रमाण प्राचीन मिस्र से मिलते हैं, जहां टूटी नाक की मरम्मत के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता था. मिस्र में तो मृत्यु के बाद के जीवन के लिए भी शरीर की बनावट सुधारने के उदाहरण मिलते हैं. भारत में 600 ईसा पूर्व वैद्य सुश्रुत ने नाक के पुनर्निर्माण जैसी तकनीकों को विकसित किया और सुश्रुत संहिता में प्लास्टिक सर्जरी के मूल सिद्धांत लिखे. आगे चलकर रोमन काल में कान और चेहरे की मरम्मत जैसी सरल सर्जरी होने लगी और यह ज्ञान मध्यकाल में अरब देशों के जरिए यूरोप तक पहुंचा, जहां नाक की सर्जरी के नए तरीके विकसित किए गए. 20वीं सदीप्लास्टिक सर्जरी को आधुनिक रूप प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मिला, जब युद्ध में घायल सैनिकों के चेहरे और शरीर की गंभीर चोटों के इलाज की जरूरत पड़ी. इसी दौर में चेहरे के पुनर्निर्माण और स्किन ग्राफ्टिंग जैसी तकनीकों में बड़ा विकास हुआ. दूसरे विश्व युद्ध के समय झुलसे हुए सैनिकों के इलाज ने इस क्षेत्र को और आगे बढ़ाया. 1940 के दशक तक प्लास्टिक सर्जरी को एक अलग और मान्य चिकित्सा शाखा के रूप में पहचान मिलने लगी और पेशेवर संगठनों की स्थापना से इसका दायरा और भरोसा दोनों बढ़े. आधुनिक काल20वीं सदी के आधे समय के बाद से लेकर आज तक प्लास्टिक सर्जरी में जबरदस्त बदलाव आया है. अब इसका इस्तेमाल सिर्फ चोट या जन्मजात खामियों को ठीक करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सौंदर्य बढ़ाने के लिए भी बड़े पैमाने पर होने लगा है. सिलिकॉन इम्प्लांट्स, नाक और चेहरे की सर्जरी, बॉडी कॉन्टूरिंग के साथ-साथ बिना सर्जरी वाले विकल्प जैसे फिलर्स और लेजर ट्रीटमेंट भी लोकप्रिय हो चुके हैं. आजकल अमीर लोग इसका खुलकर यूज कर रहे हैं.  इसे भी पढ़ें- गर्भावस्था में बढ़ रहा है शुगर का खतरा, पहली एंटीनैटल विजिट में ही डायबिटीज स्क्रीनिंग अनिवार्य, जानें क्यों है जरूरी?  

Jan 3, 2026 - 09:30
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History Of Plastic Surgery: कब शुरू हुआ था प्लास्टिक सर्जरी कराने का चलन, जानें पहले कैसे होता था यह?

When Did Plastic Surgery Begin: प्लास्टिक सर्जरी को लेकर इस समय एक बवाल सा मचा हुआ है. बॉलीबुड समेत तमाम फेमस पर्सनलिटी पर प्लास्टिक सर्जरी का आरोप समय-समय पर लगता आया है. बताया जाता है कि लोग अच्छा, सुंदर और अट्रैक्टिव दिखने के लिए इसका सहारा लेते हैं. प्लास्टिक सर्जरी कोई नई चिकित्सा पद्धति नहीं है. इसका इतिहास हजारों साल पुराना है और इसके शुरुआती प्रमाण प्राचीन मिस्र से मिलते हैं. शुरुआती दौर में प्लास्टिक सर्जरी का इस्तेमाल खासतौर पर नाक की मरम्मत के लिए किया जाता था. ‘प्लास्टिक सर्जरी’ शब्द ग्रीक भाषा के शब्द प्लास्टिकोस से निकला है, जिसका अर्थ होता है आकार देना या ढालना. चलिए आपको बताते हैं कि यह कब शुरू हुआ और शुरू में यह कैसे होता है. 

प्राचीन काल
ramsayhealth के अनुसार, प्लास्टिक सर्जरी की शुरुआत हजारों साल पहले प्राचीन सभ्यताओं में हो चुकी थी. इसके शुरुआती प्रमाण प्राचीन मिस्र से मिलते हैं, जहां टूटी नाक की मरम्मत के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता था. मिस्र में तो मृत्यु के बाद के जीवन के लिए भी शरीर की बनावट सुधारने के उदाहरण मिलते हैं. भारत में 600 ईसा पूर्व वैद्य सुश्रुत ने नाक के पुनर्निर्माण जैसी तकनीकों को विकसित किया और सुश्रुत संहिता में प्लास्टिक सर्जरी के मूल सिद्धांत लिखे. आगे चलकर रोमन काल में कान और चेहरे की मरम्मत जैसी सरल सर्जरी होने लगी और यह ज्ञान मध्यकाल में अरब देशों के जरिए यूरोप तक पहुंचा, जहां नाक की सर्जरी के नए तरीके विकसित किए गए.

20वीं सदी
प्लास्टिक सर्जरी को आधुनिक रूप प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मिला, जब युद्ध में घायल सैनिकों के चेहरे और शरीर की गंभीर चोटों के इलाज की जरूरत पड़ी. इसी दौर में चेहरे के पुनर्निर्माण और स्किन ग्राफ्टिंग जैसी तकनीकों में बड़ा विकास हुआ. दूसरे विश्व युद्ध के समय झुलसे हुए सैनिकों के इलाज ने इस क्षेत्र को और आगे बढ़ाया. 1940 के दशक तक प्लास्टिक सर्जरी को एक अलग और मान्य चिकित्सा शाखा के रूप में पहचान मिलने लगी और पेशेवर संगठनों की स्थापना से इसका दायरा और भरोसा दोनों बढ़े.

आधुनिक काल
20वीं सदी के आधे समय के बाद से लेकर आज तक प्लास्टिक सर्जरी में जबरदस्त बदलाव आया है. अब इसका इस्तेमाल सिर्फ चोट या जन्मजात खामियों को ठीक करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सौंदर्य बढ़ाने के लिए भी बड़े पैमाने पर होने लगा है. सिलिकॉन इम्प्लांट्स, नाक और चेहरे की सर्जरी, बॉडी कॉन्टूरिंग के साथ-साथ बिना सर्जरी वाले विकल्प जैसे फिलर्स और लेजर ट्रीटमेंट भी लोकप्रिय हो चुके हैं. आजकल अमीर लोग इसका खुलकर यूज कर रहे हैं. 

इसे भी पढ़ें- गर्भावस्था में बढ़ रहा है शुगर का खतरा, पहली एंटीनैटल विजिट में ही डायबिटीज स्क्रीनिंग अनिवार्य, जानें क्यों है जरूरी?

 

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