High Blood Pressure: हाई बीपी और स्ट्रेस का अचूक उपाय है प्राणिक हीलिंग, शरीर को छुए बिना ऐसे होता है इलाज
How Stress Increases High Blood Pressure: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ रही है और इसके पीछे तनाव यानी स्ट्रेस को सबसे बड़ा लेकिन सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया जाने वाला कारण माना जा रहा है. देर रात तक काम करना, नींद पूरी न होना, हर समय चिंता में रहना, मानसिक थकान और घंटों मोबाइल-लैपटॉप जैसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के सामने बिताना आज के युवाओं की लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है. यही कारण है कि कम उम्र में भी लोग हाई बीपी जैसी गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं. डॉक्टर लंबे समय से इस बात पर जोर देते आए हैं कि लगातार तनाव शरीर में एड्रेनालिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन बढ़ा देता है. इससे दिल की धड़कन तेज होती है और ब्लड प्रेशर लगातार ऊंचा रहने लगता है. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है. दवाई या थैरेपी क्या है बढ़िया विकल्प? हालांकि दवाइयां और बेहतर लाइफस्टाइल अब भी हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के सबसे जरूरी तरीके हैं, लेकिन हाल के वर्षों में लोग ऐसी थेरेपी की ओर भी ध्यान देने लगे हैं जो मानसिक शांति देने में मदद करती हैं. इन्हीं में से एक है प्राणिक हीलिंग. वर्ल्ड प्राणिक हीलिंग के डायरेक्टर श्रीराम राजगोपाल के अनुसार, प्राणिक हीलिंग एक एनर्जी बेस्ड हीलिंग तकनीक है, जो प्राण यानी लाइफ एनर्जी के सिद्धांत पर आधारित मानी जाती है, इस पद्धति में बिना शरीर को छुए व्यक्ति के एनर्जी फील्ड, ऑरा और चक्रों को संतुलित करने की कोशिश की जाती है. माना जाता है कि इससे शरीर और मन दोनों को आराम मिलता है और व्यक्ति इमोशनल रूप से ज्यादा संतुलित महसूस करता है. तनाव से जुड़े हाई बीपी का शरीर पर क्या असर होता है? तनाव से जुड़ा हाई ब्लड प्रेशर अक्सर अनियमित खानपान, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, ज्यादा स्क्रीन टाइम और काम-आराम के बीच संतुलन न होने से भी जुड़ा होता है. इसका असर सिर्फ शरीर पर ही नहीं, बल्कि इमोशनल और भावनात्मक स्थिति पर भी पड़ता है। ऐसे में प्राणिक हीलिंग जैसी तकनीकें लोगों को रिलैक्स करने और अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकती हैं. प्राणिक हीलिंग थैरेपी से क्या होता है फायदा? इस थैरेपी में ट्विन हार्ट्स मेडिटेशन को काफी अहम माना जाता है. माना जाता है कि यह मेडिटेशन तनाव कम करने और मन को शांत रखने में मदद करता है. वहीं प्राणिक साइकोथेरेपी का उद्देश्य डर, गुस्सा, चिंता और निराशा जैसी निगेटिव भावनाओं को कम करना है. इसके अलावा प्राणिक ब्रीदिंग यानी नियंत्रित सांस लेने की तकनीक नर्वस सिस्टम को शांत करने और मानसिक सुकून देने में सहायक मानी जाती है. इसे भी पढ़ें - Gestational Diabetes Risk: प्रेग्नेंसी के बाद डायबिटीज खत्म, पर ये लक्षण बना देंगे हार्ट-थायरॉयड का मरीज, न करें इग्नोर इन लोगों को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत विशेषज्ञों का मानना है कि जब तनाव कम होता है, मन शांत रहता है और भावनाओं पर बेहतर नियंत्रण होता है, तो ब्लड प्रेशर भी संतुलित रहने लगता है. हालांकि यह समझना जरूरी है कि प्राणिक हीलिंग को दवाइयों का विकल्प नहीं माना जाता. हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह और नियमित दवाइयों के साथ ही मेडिटेशन और प्राणिक हीलिंग जैसी तकनीकों को अपनाना चाहिए. इसे भी पढ़ें- कोरोना का खौफनाक सच! जितनी बताई गई उससे तिगुनी ज्यादा हुई थीं मौतें, WHO के आंकड़ों ने चौंकाया Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
How Stress Increases High Blood Pressure: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ रही है और इसके पीछे तनाव यानी स्ट्रेस को सबसे बड़ा लेकिन सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया जाने वाला कारण माना जा रहा है. देर रात तक काम करना, नींद पूरी न होना, हर समय चिंता में रहना, मानसिक थकान और घंटों मोबाइल-लैपटॉप जैसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के सामने बिताना आज के युवाओं की लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है. यही कारण है कि कम उम्र में भी लोग हाई बीपी जैसी गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं.
डॉक्टर लंबे समय से इस बात पर जोर देते आए हैं कि लगातार तनाव शरीर में एड्रेनालिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन बढ़ा देता है. इससे दिल की धड़कन तेज होती है और ब्लड प्रेशर लगातार ऊंचा रहने लगता है. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है.
दवाई या थैरेपी क्या है बढ़िया विकल्प?
हालांकि दवाइयां और बेहतर लाइफस्टाइल अब भी हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के सबसे जरूरी तरीके हैं, लेकिन हाल के वर्षों में लोग ऐसी थेरेपी की ओर भी ध्यान देने लगे हैं जो मानसिक शांति देने में मदद करती हैं. इन्हीं में से एक है प्राणिक हीलिंग. वर्ल्ड प्राणिक हीलिंग के डायरेक्टर श्रीराम राजगोपाल के अनुसार, प्राणिक हीलिंग एक एनर्जी बेस्ड हीलिंग तकनीक है, जो प्राण यानी लाइफ एनर्जी के सिद्धांत पर आधारित मानी जाती है, इस पद्धति में बिना शरीर को छुए व्यक्ति के एनर्जी फील्ड, ऑरा और चक्रों को संतुलित करने की कोशिश की जाती है. माना जाता है कि इससे शरीर और मन दोनों को आराम मिलता है और व्यक्ति इमोशनल रूप से ज्यादा संतुलित महसूस करता है.
तनाव से जुड़े हाई बीपी का शरीर पर क्या असर होता है?
तनाव से जुड़ा हाई ब्लड प्रेशर अक्सर अनियमित खानपान, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, ज्यादा स्क्रीन टाइम और काम-आराम के बीच संतुलन न होने से भी जुड़ा होता है. इसका असर सिर्फ शरीर पर ही नहीं, बल्कि इमोशनल और भावनात्मक स्थिति पर भी पड़ता है। ऐसे में प्राणिक हीलिंग जैसी तकनीकें लोगों को रिलैक्स करने और अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकती हैं.
प्राणिक हीलिंग थैरेपी से क्या होता है फायदा?
इस थैरेपी में ट्विन हार्ट्स मेडिटेशन को काफी अहम माना जाता है. माना जाता है कि यह मेडिटेशन तनाव कम करने और मन को शांत रखने में मदद करता है. वहीं प्राणिक साइकोथेरेपी का उद्देश्य डर, गुस्सा, चिंता और निराशा जैसी निगेटिव भावनाओं को कम करना है. इसके अलावा प्राणिक ब्रीदिंग यानी नियंत्रित सांस लेने की तकनीक नर्वस सिस्टम को शांत करने और मानसिक सुकून देने में सहायक मानी जाती है.
इसे भी पढ़ें - Gestational Diabetes Risk: प्रेग्नेंसी के बाद डायबिटीज खत्म, पर ये लक्षण बना देंगे हार्ट-थायरॉयड का मरीज, न करें इग्नोर
इन लोगों को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तनाव कम होता है, मन शांत रहता है और भावनाओं पर बेहतर नियंत्रण होता है, तो ब्लड प्रेशर भी संतुलित रहने लगता है. हालांकि यह समझना जरूरी है कि प्राणिक हीलिंग को दवाइयों का विकल्प नहीं माना जाता. हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह और नियमित दवाइयों के साथ ही मेडिटेशन और प्राणिक हीलिंग जैसी तकनीकों को अपनाना चाहिए.
इसे भी पढ़ें- कोरोना का खौफनाक सच! जितनी बताई गई उससे तिगुनी ज्यादा हुई थीं मौतें, WHO के आंकड़ों ने चौंकाया
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
What's Your Reaction?