Healthcare Workers Report : हर 10 में 4 हेल्थकेयर वर्कर्स पर बढ़ती हिंसा बनी वैश्विक संकट, WHO ने दी चेतावनी

Healthcare Workers Report : अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों, नर्सों और दूसरे हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा पर खतरा बढ़ता जा रहा है.  मरीजों की जान बचाने में दिन-रात जुटे हेल्थकेयर वर्कर्स अब कई देशों में हिंसा, मारपीट और अभद्र व्यवहार का सामना कर रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे गंभीर वैश्विक चिंता का विषय बताया है. संगठन के मुताबिक, दुनिया भर में बड़ी संख्या में हेल्थकेयर वर्कर्स अपने करियर के दौरान किसी न किसी तरह की हिंसा झेलते हैं. भारत में भी डॉक्टरों पर हमले लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं, जिससे हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं.  WHO की रिपोर्ट में क्या सामने आया? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में हर 10 में से 4 हेल्थकेयर वर्कर्स अपने करियर में कम से कम एक बार शारीरिक हिंसा का शिकार होते हैं. अगर गाली-गलौज, धमकी और गलत तरीके से बात करने को भी शामिल किया जाए तो यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से बढ़कर 62 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. अस्पतालों में काम करने वाले बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मी किसी न किसी रूप में हिंसा का सामना कर रहे हैं.  किन देशों में सबसे ज्यादा डॉक्टर हिंसा का शिकार? Atención Primaria मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक समीक्षा के अनुसार, डॉक्टरों और हेल्थकेयर वर्कर्स के खिलाफ हिंसा सिर्फ विकासशील देशों की नहीं, बल्कि विकसित देशों की भी गंभीर समस्या बन चुकी है. अध्ययन में सबसे ज्यादा हिंसा के मामले जर्मनी में 91 प्रतिशत दर्ज किए गए, इसके बाद चीन में 90 प्रतिशत, पेरू में 84.5 प्रतिशत, तुर्की में 84 प्रतिशत और भारत में 77.3 प्रतिशत का नंबर है. वहीं जॉर्डन में 63 प्रतिशत, बुल्गारिया में 55 प्रतिशत, इटली में 51.5 प्रतिशत, पोलैंड में 51 प्रतिशत और अमेरिका के 47 प्रतिशत इमरजेंसी डॉक्टरों ने भी अपने कार्यकाल के दौरान हिंसा का सामना करने की बात कही.  आखिर क्यों बढ़ रहे हैं डॉक्टरों पर हमले? विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के अलग-अलग देशों में कारण लगभग एक जैसे हैं. अस्पतालों में मरीजों की ज्यादा संख्या, हेल्थकेयर वर्कर्स की कमी, लंबा इंतजार, डॉक्टर और मरीज के बीच सही संवाद का अभाव साथ ही इलाज से जुड़ी उम्मीदें अक्सर तनाव की स्थिति पैदा करती हैं, यही हालात कई बार हिंसा का रूप ले लेते हैं,  पूर्व राज्य IMA अध्यक्ष डॉ. संतोष कदम का कहना है कि लोगों मे पेशंस लगातार कम होता जा रहा है. लोग इलाज पर खर्च करने के बाद तुरंत और पूरी तरह सफल परिणाम की उम्मीद करते हैं. जब ऐसा नहीं होता, तो कई बार गुस्सा हेल्थकेयर वर्कर्स पर निकलता है. यह भी पढ़ें - आ रहा है डेंगू मलेरिया का मौसम, अपने बच्चों का ऐसे रखें ख्याल, पछताने से पहले पढ़ लें खबर भारत में क्या है स्थिति? भारत के 19 राज्यों ने  हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा के लिए अलग-अलग कानून बनाए हैं, लेकिन डॉक्टरों पर हमले अभी भी जारी हैं. महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के पूर्व सदस्य डॉ. सुहास पिंगले का कहना है कि अलग-अलग राज्यों की जगह पूरे देश में एक समान राष्ट्रीय कानून की जरूरत है. महाराष्ट्र में 2010 से 2021 के बीच  हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा से जुड़े कानून के तहत 738 मामले दर्ज किए गए.  दूसरे देश कैसे कर रहे हैं डॉक्टरों की सुरक्षा? कई देशों ने हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा के लिए अलग-अलग कदम उठाए हैं.  स्पेन ने डॉक्टरों पर हमले को राज्य के खिलाफ अपराध की श्रेणी में रखा. इसके बाद दो सालों में हिंसा के मामलों में करीब 16 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. सिंगापुर में हेल्थकेयर वर्कर्स से गलत तरीके से बात करने पर 5,000 सिंगापुर डॉलर तक जुर्माना, 12 महीने तक की जेल, या दोनों सजा दी जा सकती है. यहां हेल्थकेयर वर्कर्स को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है. यूनाइटेड किंगडम में हिंसक व्यवहार करने वाले मरीजों को जनरल प्रैक्टिशनर की लिस्ट से हटाया जा सकता है और ऐसे मरीजों को सिस्टम में चिन्हित भी किया जाता है. अमेरिका के कई राज्यों में  पर हेल्थकेयर वर्कर्स हमला करने को ज्यादा गंभीर अपराध मानने वाले कानून लागू किए गए हैं.  यह भी पढ़ें - Testosterone Screening After 30 : क्या 30 के बाद घटने लगता है टेस्टोस्टेरोन? अमेरिकी सेना शुरू करेगी अपने जवानों की स्क्रीनिंग Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. 

Jul 23, 2026 - 08:30
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Healthcare Workers Report : हर 10 में 4 हेल्थकेयर वर्कर्स पर बढ़ती हिंसा बनी वैश्विक संकट, WHO ने दी चेतावनी

Healthcare Workers Report : अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों, नर्सों और दूसरे हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा पर खतरा बढ़ता जा रहा है.  मरीजों की जान बचाने में दिन-रात जुटे हेल्थकेयर वर्कर्स अब कई देशों में हिंसा, मारपीट और अभद्र व्यवहार का सामना कर रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे गंभीर वैश्विक चिंता का विषय बताया है. संगठन के मुताबिक, दुनिया भर में बड़ी संख्या में हेल्थकेयर वर्कर्स अपने करियर के दौरान किसी न किसी तरह की हिंसा झेलते हैं. भारत में भी डॉक्टरों पर हमले लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं, जिससे हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं. 

WHO की रिपोर्ट में क्या सामने आया?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में हर 10 में से 4 हेल्थकेयर वर्कर्स अपने करियर में कम से कम एक बार शारीरिक हिंसा का शिकार होते हैं. अगर गाली-गलौज, धमकी और गलत तरीके से बात करने को भी शामिल किया जाए तो यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से बढ़कर 62 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. अस्पतालों में काम करने वाले बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मी किसी न किसी रूप में हिंसा का सामना कर रहे हैं. 

किन देशों में सबसे ज्यादा डॉक्टर हिंसा का शिकार?

Atención Primaria मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक समीक्षा के अनुसार, डॉक्टरों और हेल्थकेयर वर्कर्स के खिलाफ हिंसा सिर्फ विकासशील देशों की नहीं, बल्कि विकसित देशों की भी गंभीर समस्या बन चुकी है. अध्ययन में सबसे ज्यादा हिंसा के मामले जर्मनी में 91 प्रतिशत दर्ज किए गए, इसके बाद चीन में 90 प्रतिशत, पेरू में 84.5 प्रतिशत, तुर्की में 84 प्रतिशत और भारत में 77.3 प्रतिशत का नंबर है. वहीं जॉर्डन में 63 प्रतिशत, बुल्गारिया में 55 प्रतिशत, इटली में 51.5 प्रतिशत, पोलैंड में 51 प्रतिशत और अमेरिका के 47 प्रतिशत इमरजेंसी डॉक्टरों ने भी अपने कार्यकाल के दौरान हिंसा का सामना करने की बात कही. 

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं डॉक्टरों पर हमले?

विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के अलग-अलग देशों में कारण लगभग एक जैसे हैं. अस्पतालों में मरीजों की ज्यादा संख्या, हेल्थकेयर वर्कर्स की कमी, लंबा इंतजार, डॉक्टर और मरीज के बीच सही संवाद का अभाव साथ ही इलाज से जुड़ी उम्मीदें अक्सर तनाव की स्थिति पैदा करती हैं, यही हालात कई बार हिंसा का रूप ले लेते हैं,  पूर्व राज्य IMA अध्यक्ष डॉ. संतोष कदम का कहना है कि लोगों मे पेशंस लगातार कम होता जा रहा है. लोग इलाज पर खर्च करने के बाद तुरंत और पूरी तरह सफल परिणाम की उम्मीद करते हैं. जब ऐसा नहीं होता, तो कई बार गुस्सा हेल्थकेयर वर्कर्स पर निकलता है.

यह भी पढ़ें - आ रहा है डेंगू मलेरिया का मौसम, अपने बच्चों का ऐसे रखें ख्याल, पछताने से पहले पढ़ लें खबर

भारत में क्या है स्थिति?

भारत के 19 राज्यों ने  हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा के लिए अलग-अलग कानून बनाए हैं, लेकिन डॉक्टरों पर हमले अभी भी जारी हैं. महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के पूर्व सदस्य डॉ. सुहास पिंगले का कहना है कि अलग-अलग राज्यों की जगह पूरे देश में एक समान राष्ट्रीय कानून की जरूरत है. महाराष्ट्र में 2010 से 2021 के बीच  हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा से जुड़े कानून के तहत 738 मामले दर्ज किए गए. 

दूसरे देश कैसे कर रहे हैं डॉक्टरों की सुरक्षा?

कई देशों ने हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा के लिए अलग-अलग कदम उठाए हैं.  स्पेन ने डॉक्टरों पर हमले को राज्य के खिलाफ अपराध की श्रेणी में रखा. इसके बाद दो सालों में हिंसा के मामलों में करीब 16 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. सिंगापुर में हेल्थकेयर वर्कर्स से गलत तरीके से बात करने पर 5,000 सिंगापुर डॉलर तक जुर्माना, 12 महीने तक की जेल, या दोनों सजा दी जा सकती है. यहां हेल्थकेयर वर्कर्स को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है. यूनाइटेड किंगडम में हिंसक व्यवहार करने वाले मरीजों को जनरल प्रैक्टिशनर की लिस्ट से हटाया जा सकता है और ऐसे मरीजों को सिस्टम में चिन्हित भी किया जाता है. अमेरिका के कई राज्यों में  पर हेल्थकेयर वर्कर्स हमला करने को ज्यादा गंभीर अपराध मानने वाले कानून लागू किए गए हैं. 

यह भी पढ़ें - Testosterone Screening After 30 : क्या 30 के बाद घटने लगता है टेस्टोस्टेरोन? अमेरिकी सेना शुरू करेगी अपने जवानों की स्क्रीनिंग

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. 

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