Green Cities: कैसी होती हैं ग्रीन सिटी, 2047 के भारत के लिए ये कितनी जरूरी?

भारत तेजी से शहरों की ओर बढ़ रहा है. अगले दो दशकों में लाखों लोग गांवों से शहरों में आ जाएंगे. अगर शहरों का विकास सोच-समझकर नहीं किया गया तो प्रदूषण, ट्रैफिक, पानी की कमी और गर्मी जैसी समस्याएं बढ़ेंगी. इस दिक्कत को दूर करने के लिए ग्रीन सिटी को ऑप्शन के रूप में देखा जा रहा है. आइए जानते हैं कि कैसी होती हैं ग्रीन सिटी और 2047 के भारत के लिए ये कितनी जरूरी हैं?  कैसी होती हैं ग्रीन सिटी? देशभर में ग्रीन बिल्डिंग्स बनाने पर लगातार काफी जोर दिया जा रहा है, लेकिन बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सिर्फ ग्रीन बिल्डिंग्स से काम नहीं चल पाएगा. इसके लिए ग्रीन सिटी बनानी बेहद जरूरी होंगी. यह बात 19 से 21 दिसंबर तक चले सैफी बुरहानी एक्स्पो (कंस्ट्रक्शन 360) के पांचवें एडिशन में कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स ने कही. उन्होंने कहा कि भारत को सिर्फ ग्रीन बिल्डिंग्स नहीं, बल्कि पूरी ग्रीन सिटीज चाहिए.  कैसे बनेंगी ग्रीन सिटी? महाराष्ट्र चैंबर ऑफ हाउसिंग इंडस्ट्री (MCHI) के सीओओ केवल वलम्भिया ने शहरी और क्षेत्रीय नियोजन में महत्वपूर्ण कमी को उजागर करते हुए मुंबई जैसे मेट्रो शहरों पर भारी दबाव होने की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इन शहरों में रोजाना करीब 800 लोग आकर बसते हैं. ऐसे में सस्टेनेबिलिटी पर ज्यादा चर्चा होती है, लेकिन इसकी वास्तविकता बमुश्किल ध्यान दिया जाता है. ऐसे में ग्रीन सिटीज बेहद जरूरी हो गई हैं.  प्रेम ग्रुप के पार्टनर और नरेडको (NAREDCO) महाराष्ट्र के जॉइंट सेक्रेटरी विशाल ठक्कर के मुताबिक, ग्रीन सिटीज ऐसी सिटी होती हैं, जहां प्रकृति और विकास साथ-साथ चलते हैं. इसमें ढेर सारे पेड़-पौधे, पार्क और हरियाली होती है. इमारतें ऐसी बनाई जाती हैं, जो कम बिजली-पानी खर्च करें. सोलर एनर्जी इस्तेमाल करने पर ज्यादा फोकस रहता है. वेस्ट मैटिरियल को रिसाइकल किया जाता है. पब्लिक ट्रांसपोर्ट बेहतर होता है, जिससे लोग अपनी गाड़ियां कम चलाएं. इसके अलावा पानी के रीयूज पर भी फोकस रहता है. 2047 के लक्ष्य के लिए ये शहर कितने जरूरी? डेला ग्रुप के चेयरमैन जिमी मिस्त्री  के मुताबिक, भारत का सपना है कि आजादी के 100 साल बाद यानी 2047 तक हम विकसित भारत बनें. इसका मतलब मजबूत अर्थव्यवस्था, अच्छी शिक्षा-स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन है, लेकिन यह तभी होगा, जब हमारे शहर टिकाऊ हों. अगर शहर प्रदूषित और अव्यवस्थित रहेंगे तो विकास का फायदा सभी तक नहीं पहुंचेगा. जलवायु परिवर्तन की वजह से बाढ़, गर्मी और सूखा बढ़ रहा है. मुंबई जैसे तटीय शहरों में बाढ़ का खतरा ज्यादा है. ग्रीन सिटी ही इन समस्याओं से लड़ सकती हैं. इसे भी पढ़ें- अक्सर नाइट शिफ्ट करते हैं तो तुरंत बदल लें नौकरी, वरना यह खतरनाक बीमारी बना लेगी शिकार Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Dec 21, 2025 - 17:30
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Green Cities: कैसी होती हैं ग्रीन सिटी, 2047 के भारत के लिए ये कितनी जरूरी?

भारत तेजी से शहरों की ओर बढ़ रहा है. अगले दो दशकों में लाखों लोग गांवों से शहरों में आ जाएंगे. अगर शहरों का विकास सोच-समझकर नहीं किया गया तो प्रदूषण, ट्रैफिक, पानी की कमी और गर्मी जैसी समस्याएं बढ़ेंगी. इस दिक्कत को दूर करने के लिए ग्रीन सिटी को ऑप्शन के रूप में देखा जा रहा है. आइए जानते हैं कि कैसी होती हैं ग्रीन सिटी और 2047 के भारत के लिए ये कितनी जरूरी हैं? 

कैसी होती हैं ग्रीन सिटी?

देशभर में ग्रीन बिल्डिंग्स बनाने पर लगातार काफी जोर दिया जा रहा है, लेकिन बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सिर्फ ग्रीन बिल्डिंग्स से काम नहीं चल पाएगा. इसके लिए ग्रीन सिटी बनानी बेहद जरूरी होंगी. यह बात 19 से 21 दिसंबर तक चले सैफी बुरहानी एक्स्पो (कंस्ट्रक्शन 360) के पांचवें एडिशन में कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स ने कही. उन्होंने कहा कि भारत को सिर्फ ग्रीन बिल्डिंग्स नहीं, बल्कि पूरी ग्रीन सिटीज चाहिए. 

कैसे बनेंगी ग्रीन सिटी?

महाराष्ट्र चैंबर ऑफ हाउसिंग इंडस्ट्री (MCHI) के सीओओ केवल वलम्भिया ने शहरी और क्षेत्रीय नियोजन में महत्वपूर्ण कमी को उजागर करते हुए मुंबई जैसे मेट्रो शहरों पर भारी दबाव होने की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इन शहरों में रोजाना करीब 800 लोग आकर बसते हैं. ऐसे में सस्टेनेबिलिटी पर ज्यादा चर्चा होती है, लेकिन इसकी वास्तविकता बमुश्किल ध्यान दिया जाता है. ऐसे में ग्रीन सिटीज बेहद जरूरी हो गई हैं. 

प्रेम ग्रुप के पार्टनर और नरेडको (NAREDCO) महाराष्ट्र के जॉइंट सेक्रेटरी विशाल ठक्कर के मुताबिक, ग्रीन सिटीज ऐसी सिटी होती हैं, जहां प्रकृति और विकास साथ-साथ चलते हैं. इसमें ढेर सारे पेड़-पौधे, पार्क और हरियाली होती है. इमारतें ऐसी बनाई जाती हैं, जो कम बिजली-पानी खर्च करें. सोलर एनर्जी इस्तेमाल करने पर ज्यादा फोकस रहता है. वेस्ट मैटिरियल को रिसाइकल किया जाता है. पब्लिक ट्रांसपोर्ट बेहतर होता है, जिससे लोग अपनी गाड़ियां कम चलाएं. इसके अलावा पानी के रीयूज पर भी फोकस रहता है.

2047 के लक्ष्य के लिए ये शहर कितने जरूरी?

डेला ग्रुप के चेयरमैन जिमी मिस्त्री  के मुताबिक, भारत का सपना है कि आजादी के 100 साल बाद यानी 2047 तक हम विकसित भारत बनें. इसका मतलब मजबूत अर्थव्यवस्था, अच्छी शिक्षा-स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन है, लेकिन यह तभी होगा, जब हमारे शहर टिकाऊ हों. अगर शहर प्रदूषित और अव्यवस्थित रहेंगे तो विकास का फायदा सभी तक नहीं पहुंचेगा. जलवायु परिवर्तन की वजह से बाढ़, गर्मी और सूखा बढ़ रहा है. मुंबई जैसे तटीय शहरों में बाढ़ का खतरा ज्यादा है. ग्रीन सिटी ही इन समस्याओं से लड़ सकती हैं.

इसे भी पढ़ें- अक्सर नाइट शिफ्ट करते हैं तो तुरंत बदल लें नौकरी, वरना यह खतरनाक बीमारी बना लेगी शिकार

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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