Ganesh Sthapana Muhurat 2026: नई दिल्ली में 11:02 बजे स्थापना, उससे पहले क्या करें?
Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को है. कई परिवार गणपति बप्पा की मूर्ति एक दिन पहले ही घर ले आए हैं. लेकिन इस बार समय को लेकर एक व्यावहारिक सवाल सामने आ रहा है. चतुर्थी तिथि सुबह 7:06 बजे शुरू होगी, जबकि नई दिल्ली में गणपति स्थापना का मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा. ऐसे में करीब चार घंटे तक गणपति के सामने क्या करें? क्या दीपक जला सकते हैं, भोग लगा सकते हैं या मूर्ति को ढककर रखना चाहिए? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि चतुर्थी तिथि शुरू होना और मूर्ति की विधिवत स्थापना होना दो अलग बातें हैं. चतुर्थी शुरू होने के बाद पर्व की तिथि लग जाती है, लेकिन गणपति का आवाहन, संकल्प और मुख्य पूजन मध्याह्न के निर्धारित मुहूर्त में किया जाता है. समय शहर के अनुसार कुछ मिनट बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना जरूरी है. पंचांग अनुसार नई दिल्ली के लिए मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:02 से दोपहर 1:31 बजे तक दिया रहेगा. मूर्ति घर में है तो सुबह क्या करें? यदि गणपति की मूर्ति पहले ही घर आ चुकी है, तो उसे साफ और सुरक्षित स्थान पर रखें. मूर्ति को बार-बार उठाने या उसकी दिशा बदलने से बचें. परिवार की परंपरा में मूर्ति को स्थापना तक स्वच्छ वस्त्र से ढककर रखने का नियम हो तो कपड़ा मुहूर्त में ही हटाएं. यदि घर में आगमन के समय ही चेहरा खोलकर स्वागत आरती की परंपरा है, तो उसी पारिवारिक परंपरा का पालन किया जा सकता है. यह भी पढ़ें- Google पर 15 सितंबर भी खोज रहे लोग, आखिर गणेश चतुर्थी 14 को है या 15 को? सुबह स्नान करके पूजा का स्थान साफ करें. चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं और आसपास इतना स्थान छोड़ें कि दीपक, फूल, दूर्वा, मोदक तथा पूजा की थाली आसानी से रखी जा सके. कलश, अक्षत, रोली, मौली, जनेऊ, पान-सुपारी और नैवेद्य भी पहले से तैयार कर लें. इससे मुहूर्त शुरू होने पर सामग्री खोजने में समय नहीं जाएगा. क्या स्थापना से पहले दीपक जला सकते हैं? पूजा स्थल पर सामान्य श्रद्धा के रूप में दीपक जलाया जा सकता है, लेकिन उसे मुख्य स्थापना पूजा का दीप मानकर विधि शुरू न करें. दीपक ऐसी जगह रखें जहां कपड़ा, फूल, सजावट या मिट्टी की मूर्ति उसकी लौ के संपर्क में न आए. अगर मूर्ति ढकी हुई है तो उसके बिल्कुल पास दीपक या धूप न रखें. इन घंटों में परिवार गणपति का नाम जप सकता है. “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का स्मरण करें या गणेश स्तोत्र पढ़ें. इसे स्थापना का विकल्प न मानें; यह मुहूर्त से पहले मन और पूजा स्थल तैयार करने का समय है. भोग और आरती कब करें? मुख्य भोग, फूल, दूर्वा और आरती संकल्प, आवाहन एवं स्थापना के बाद करना बेहतर है. स्थापना से पहले मोदक तैयार करके स्वच्छ स्थान पर ढककर रख सकते हैं, लेकिन नैवेद्य के रूप में उन्हें मुहूर्त की पूजा में अर्पित करें. इसी तरह मुख्य आरती भी विधिवत स्थापना पूरी होने के बाद करें. यदि घर की कुल परंपरा में गणपति के आगमन पर छोटी स्वागत आरती होती है, तो उसका पालन किया जा सकता है. स्वागत आरती और स्थापना के बाद होने वाली मुख्य आरती को एक न समझें. इन चार घंटों में यह काम न करें मूर्ति को सजाने के लिए उस पर पानी, दूध या पंचामृत न डालें, खासकर जब प्रतिमा मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी हो. इससे रंग उतर सकता है या मूर्ति में दरार आ सकती है. अभिषेक करना हो तो अपने पुरोहित से विधि पूछें; कई परिवार मिट्टी की प्रतिमा पर प्रतीकात्मक रूप से जल छिड़कते हैं. मूर्ति के सामने जूते, पैकिंग का सामान या सजावट का कचरा न छोड़ें. मोबाइल से फोटो लेने के लिए मूर्ति को बार-बार घुमाने से भी बचें. स्थापना से पहले का यह समय जल्दबाजी का नहीं, तैयारी का है. सुबह 7:06 से 11:02 के बीच बप्पा को यूं ही इंतजार नहीं कराया जा रहा होता. परिवार इस समय चौकी, सामग्री और स्वयं को पूजा के लिए तैयार करता है. फिर मध्याह्न मुहूर्त में संकल्प लेकर गणपति का आवाहन, स्थापना, दूर्वा, भोग और आरती की जाती है. क्षेत्र और कुल परंपरा अलग होने पर पारिवारिक पुरोहित की सलाह को प्राथमिकता दें. FAQ क्या गणपति स्थापना से पहले दीपक जला सकते हैं?पूजा स्थल पर सामान्य श्रद्धा के रूप में सुरक्षित स्थान पर दीपक जलाया जा सकता है. मुख्य स्थापना पूजा का दीप और आरती संकल्प तथा आवाहन के बाद करना बेहतर है. क्या स्थापना से पहले गणपति को भोग लगा सकते हैं?मोदक या अन्य नैवेद्य पहले तैयार करके ढककर रखा जा सकता है. मुख्य भोग विधिवत स्थापना और आवाहन के बाद अर्पित करें. गणपति की मूर्ति का कपड़ा कब खोलना चाहिए?यह परिवार और क्षेत्र की परंपरा पर निर्भर करता है. कुछ परिवार आगमन के समय स्वागत के बाद कपड़ा हटाते हैं, जबकि कुछ स्थापना मुहूर्त में मूर्ति का आवरण खोलते हैं. क्या स्थापना से पहले गणपति की आरती कर सकते हैं?आगमन पर छोटी स्वागत आरती की पारिवारिक परंपरा हो तो उसका पालन किया जा सकता है. मुख्य आरती स्थापना पूजा पूरी होने के बाद करें. क्या 7:06 और 11:02 बजे का समय पूरे भारत के लिए है?नहीं. ये समय नई दिल्ली के पंचांग के संदर्भ में है. शहर बदलने पर स्थापना मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है. स्थापना से पहले गणपति की मूर्ति को स्नान करा सकते हैं?मिट्टी और प्राकृतिक रंगों वाली प्रतिमा पर सीधे पानी या पंचामृत डालने से मूर्ति खराब हो सकती है. अपने पुरोहित से पूछकर प्रतीकात्मक शुद्धिकरण करें. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को है. कई परिवार गणपति बप्पा की मूर्ति एक दिन पहले ही घर ले आए हैं. लेकिन इस बार समय को लेकर एक व्यावहारिक सवाल सामने आ रहा है. चतुर्थी तिथि सुबह 7:06 बजे शुरू होगी, जबकि नई दिल्ली में गणपति स्थापना का मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा. ऐसे में करीब चार घंटे तक गणपति के सामने क्या करें? क्या दीपक जला सकते हैं, भोग लगा सकते हैं या मूर्ति को ढककर रखना चाहिए?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि चतुर्थी तिथि शुरू होना और मूर्ति की विधिवत स्थापना होना दो अलग बातें हैं. चतुर्थी शुरू होने के बाद पर्व की तिथि लग जाती है, लेकिन गणपति का आवाहन, संकल्प और मुख्य पूजन मध्याह्न के निर्धारित मुहूर्त में किया जाता है. समय शहर के अनुसार कुछ मिनट बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना जरूरी है. पंचांग अनुसार नई दिल्ली के लिए मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:02 से दोपहर 1:31 बजे तक दिया रहेगा.
मूर्ति घर में है तो सुबह क्या करें?
यदि गणपति की मूर्ति पहले ही घर आ चुकी है, तो उसे साफ और सुरक्षित स्थान पर रखें. मूर्ति को बार-बार उठाने या उसकी दिशा बदलने से बचें. परिवार की परंपरा में मूर्ति को स्थापना तक स्वच्छ वस्त्र से ढककर रखने का नियम हो तो कपड़ा मुहूर्त में ही हटाएं. यदि घर में आगमन के समय ही चेहरा खोलकर स्वागत आरती की परंपरा है, तो उसी पारिवारिक परंपरा का पालन किया जा सकता है.
यह भी पढ़ें- Google पर 15 सितंबर भी खोज रहे लोग, आखिर गणेश चतुर्थी 14 को है या 15 को?
सुबह स्नान करके पूजा का स्थान साफ करें. चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं और आसपास इतना स्थान छोड़ें कि दीपक, फूल, दूर्वा, मोदक तथा पूजा की थाली आसानी से रखी जा सके. कलश, अक्षत, रोली, मौली, जनेऊ, पान-सुपारी और नैवेद्य भी पहले से तैयार कर लें. इससे मुहूर्त शुरू होने पर सामग्री खोजने में समय नहीं जाएगा.
क्या स्थापना से पहले दीपक जला सकते हैं?
पूजा स्थल पर सामान्य श्रद्धा के रूप में दीपक जलाया जा सकता है, लेकिन उसे मुख्य स्थापना पूजा का दीप मानकर विधि शुरू न करें. दीपक ऐसी जगह रखें जहां कपड़ा, फूल, सजावट या मिट्टी की मूर्ति उसकी लौ के संपर्क में न आए. अगर मूर्ति ढकी हुई है तो उसके बिल्कुल पास दीपक या धूप न रखें.
इन घंटों में परिवार गणपति का नाम जप सकता है. “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का स्मरण करें या गणेश स्तोत्र पढ़ें. इसे स्थापना का विकल्प न मानें; यह मुहूर्त से पहले मन और पूजा स्थल तैयार करने का समय है.
भोग और आरती कब करें?
मुख्य भोग, फूल, दूर्वा और आरती संकल्प, आवाहन एवं स्थापना के बाद करना बेहतर है. स्थापना से पहले मोदक तैयार करके स्वच्छ स्थान पर ढककर रख सकते हैं, लेकिन नैवेद्य के रूप में उन्हें मुहूर्त की पूजा में अर्पित करें. इसी तरह मुख्य आरती भी विधिवत स्थापना पूरी होने के बाद करें.
यदि घर की कुल परंपरा में गणपति के आगमन पर छोटी स्वागत आरती होती है, तो उसका पालन किया जा सकता है. स्वागत आरती और स्थापना के बाद होने वाली मुख्य आरती को एक न समझें.
इन चार घंटों में यह काम न करें
मूर्ति को सजाने के लिए उस पर पानी, दूध या पंचामृत न डालें, खासकर जब प्रतिमा मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी हो. इससे रंग उतर सकता है या मूर्ति में दरार आ सकती है. अभिषेक करना हो तो अपने पुरोहित से विधि पूछें; कई परिवार मिट्टी की प्रतिमा पर प्रतीकात्मक रूप से जल छिड़कते हैं.
मूर्ति के सामने जूते, पैकिंग का सामान या सजावट का कचरा न छोड़ें. मोबाइल से फोटो लेने के लिए मूर्ति को बार-बार घुमाने से भी बचें. स्थापना से पहले का यह समय जल्दबाजी का नहीं, तैयारी का है.
सुबह 7:06 से 11:02 के बीच बप्पा को यूं ही इंतजार नहीं कराया जा रहा होता. परिवार इस समय चौकी, सामग्री और स्वयं को पूजा के लिए तैयार करता है. फिर मध्याह्न मुहूर्त में संकल्प लेकर गणपति का आवाहन, स्थापना, दूर्वा, भोग और आरती की जाती है. क्षेत्र और कुल परंपरा अलग होने पर पारिवारिक पुरोहित की सलाह को प्राथमिकता दें.
FAQ
क्या गणपति स्थापना से पहले दीपक जला सकते हैं?
पूजा स्थल पर सामान्य श्रद्धा के रूप में सुरक्षित स्थान पर दीपक जलाया जा सकता है. मुख्य स्थापना पूजा का दीप और आरती संकल्प तथा आवाहन के बाद करना बेहतर है.
क्या स्थापना से पहले गणपति को भोग लगा सकते हैं?
मोदक या अन्य नैवेद्य पहले तैयार करके ढककर रखा जा सकता है. मुख्य भोग विधिवत स्थापना और आवाहन के बाद अर्पित करें.
गणपति की मूर्ति का कपड़ा कब खोलना चाहिए?
यह परिवार और क्षेत्र की परंपरा पर निर्भर करता है. कुछ परिवार आगमन के समय स्वागत के बाद कपड़ा हटाते हैं, जबकि कुछ स्थापना मुहूर्त में मूर्ति का आवरण खोलते हैं.
क्या स्थापना से पहले गणपति की आरती कर सकते हैं?
आगमन पर छोटी स्वागत आरती की पारिवारिक परंपरा हो तो उसका पालन किया जा सकता है. मुख्य आरती स्थापना पूजा पूरी होने के बाद करें.
क्या 7:06 और 11:02 बजे का समय पूरे भारत के लिए है?
नहीं. ये समय नई दिल्ली के पंचांग के संदर्भ में है. शहर बदलने पर स्थापना मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है.
स्थापना से पहले गणपति की मूर्ति को स्नान करा सकते हैं?
मिट्टी और प्राकृतिक रंगों वाली प्रतिमा पर सीधे पानी या पंचामृत डालने से मूर्ति खराब हो सकती है. अपने पुरोहित से पूछकर प्रतीकात्मक शुद्धिकरण करें.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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