Erectile Dysfunction Risk: हो गए हैं इरेक्टाइल डिसफंक्शन का शिकार, समझ लीजिए बढ़ गया है हार्ट अटैक, शुगर और स्ट्रोक का खतरा

Erectile Dysfunction May Increase Heart Attack Risk: अधिकांश लोग इरेक्टाइल डिसफंक्शन को केवल यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या मानते हैं, लेकिन हालिया रिसर्च कुछ और ही कहानी बयां करते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि यह समस्या कई गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकती है. हार्ट अटैक, स्ट्रोक, डायबिटीज और यहां तक कि डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा इरेक्टाइल डिसफंक्शन से जुड़ा हो सकता है.  कितनी खतरनाक है यह समस्या? रोम यूनिवर्सिटी ऑफ टोर वर्गाटा के सेक्सोलॉजिस्ट इमैनुएले जैनिनी का कहना है कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन को "कोयले की खदान में कैनरी" की तरह देखा जाना चाहिए. यानी यह शरीर में छिपी किसी बड़ी समस्या का शुरुआती संकेत हो सकता है. दुर्भाग्य से अधिकांश पुरुष इस विषय पर खुलकर बात नहीं करते, जिससे समय रहते बीमारी की पहचान का मौका छूट जाता है.  किन लोगों को होती है यह दिक्कत ज्यादा? नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, 40 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में यह समस्या काफी आम है. एक बड़े सर्वे में पाया गया कि 40 साल की उम्र के करीब 39 प्रतिशत पुरुष किसी न किसी स्तर पर इरेक्टाइल डिसफंक्शन का अनुभव करते हैं, जबकि 70 वर्ष की उम्र तक यह आंकड़ा 67 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि इरेक्शन का सीधा संबंध ब्लड फ्लो से होता है. जब आर्टरीज स्वस्थ रहती हैं तो ब्लड का प्रवाह बेहतर होता है. लेकिन अगर ब्लड बेसल्स संकरी या कठोर होने लगें, तो इसका असर सबसे पहले शरीर की छोटी आर्टरीज पर दिखाई देता है. चूंकि लिंग की धमनियां बेहद पतली होती हैं, इसलिए इरेक्टाइल डिसफंक्शन कई बार हार्ट रोग का शुरुआती संकेत बन जाता है. हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का खतरा करीब 1.5 लाख लोगों के आंकड़ों के एनालिसिस में पाया गया कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन से पीड़ित पुरुषों में कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा 59 प्रतिशत अधिक था, जबकि स्ट्रोक का जोखिम 34 प्रतिशत तक ज्यादा देखा गया. ब्रिटेन के मैनचेस्टर मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट माइकल कैरोल कहते हैं कि अच्छी इरेक्शन को ब्लड वेसल्स के अच्छे स्वास्थ्य का संकेत माना जा सकता है. इसे भी पढ़ें - Summer Fatigue: गर्मियों में बार-बार महसूस हो रही थकान, जान लें यह किस बीमारी का संकेत? डायबिटीज का खतरा डायबिटीज के साथ इसका संबंध भी बेहद मजबूत माना जाता है. बार्सिलोना स्थित सैंट पाउ रिसर्च इंस्टीट्यूट के रिसर्चर बोगदान व्लाचो के मुताबिक, टाइप-2 डायबिटीज वाले पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन होने की संभावना सामान्य लोगों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक होती है. वहीं सैंटियागो मार्टिनेज, जो यूनिवर्सिटी ऑफ बार्सिलोना में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट हैं, बताते हैं कि डायबिटीज और इरेक्टाइल डिसफंक्शन साथ होने पर नसों को नुकसान, आंखों की बीमारी और घाव भरने में दिक्कत जैसी दिक्कतों का खतरा भी बढ़ जाता है. कैसे कर सकते हैं सुधार एक्सपर्ट का मानना है कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन को नजरअंदाज करना बड़ी भूल हो सकती है. यदि यह समस्या लगातार बनी हुई है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. समय पर जांच कराने से हार्ट रोग, हाई बीपी, डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों का पता शुरुआती चरण में लगाया जा सकता है. कई मामलों में बेहतर खानपान, नियमित व्यायाम और लाइपस्टाल में बदलाव से स्थिति में सुधार भी संभव है. इसे भी पढ़ें- रोजाना 10 हजार कदम चलने का भ्रम खत्म, सिर्फ 4000 कदम चलकर भी पूरी तरह फिट रहेगा दिल Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Jun 16, 2026 - 18:30
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Erectile Dysfunction Risk: हो गए हैं इरेक्टाइल डिसफंक्शन का शिकार, समझ लीजिए बढ़ गया है हार्ट अटैक, शुगर और स्ट्रोक का खतरा

Erectile Dysfunction May Increase Heart Attack Risk: अधिकांश लोग इरेक्टाइल डिसफंक्शन को केवल यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या मानते हैं, लेकिन हालिया रिसर्च कुछ और ही कहानी बयां करते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि यह समस्या कई गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकती है. हार्ट अटैक, स्ट्रोक, डायबिटीज और यहां तक कि डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा इरेक्टाइल डिसफंक्शन से जुड़ा हो सकता है. 

कितनी खतरनाक है यह समस्या?

रोम यूनिवर्सिटी ऑफ टोर वर्गाटा के सेक्सोलॉजिस्ट इमैनुएले जैनिनी का कहना है कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन को "कोयले की खदान में कैनरी" की तरह देखा जाना चाहिए. यानी यह शरीर में छिपी किसी बड़ी समस्या का शुरुआती संकेत हो सकता है. दुर्भाग्य से अधिकांश पुरुष इस विषय पर खुलकर बात नहीं करते, जिससे समय रहते बीमारी की पहचान का मौका छूट जाता है. 

किन लोगों को होती है यह दिक्कत ज्यादा?

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, 40 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में यह समस्या काफी आम है. एक बड़े सर्वे में पाया गया कि 40 साल की उम्र के करीब 39 प्रतिशत पुरुष किसी न किसी स्तर पर इरेक्टाइल डिसफंक्शन का अनुभव करते हैं, जबकि 70 वर्ष की उम्र तक यह आंकड़ा 67 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि इरेक्शन का सीधा संबंध ब्लड फ्लो से होता है. जब आर्टरीज स्वस्थ रहती हैं तो ब्लड का प्रवाह बेहतर होता है. लेकिन अगर ब्लड बेसल्स संकरी या कठोर होने लगें, तो इसका असर सबसे पहले शरीर की छोटी आर्टरीज पर दिखाई देता है. चूंकि लिंग की धमनियां बेहद पतली होती हैं, इसलिए इरेक्टाइल डिसफंक्शन कई बार हार्ट रोग का शुरुआती संकेत बन जाता है.

हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का खतरा

करीब 1.5 लाख लोगों के आंकड़ों के एनालिसिस में पाया गया कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन से पीड़ित पुरुषों में कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा 59 प्रतिशत अधिक था, जबकि स्ट्रोक का जोखिम 34 प्रतिशत तक ज्यादा देखा गया. ब्रिटेन के मैनचेस्टर मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट माइकल कैरोल कहते हैं कि अच्छी इरेक्शन को ब्लड वेसल्स के अच्छे स्वास्थ्य का संकेत माना जा सकता है.

इसे भी पढ़ें - Summer Fatigue: गर्मियों में बार-बार महसूस हो रही थकान, जान लें यह किस बीमारी का संकेत?

डायबिटीज का खतरा

डायबिटीज के साथ इसका संबंध भी बेहद मजबूत माना जाता है. बार्सिलोना स्थित सैंट पाउ रिसर्च इंस्टीट्यूट के रिसर्चर बोगदान व्लाचो के मुताबिक, टाइप-2 डायबिटीज वाले पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन होने की संभावना सामान्य लोगों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक होती है. वहीं सैंटियागो मार्टिनेज, जो यूनिवर्सिटी ऑफ बार्सिलोना में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट हैं, बताते हैं कि डायबिटीज और इरेक्टाइल डिसफंक्शन साथ होने पर नसों को नुकसान, आंखों की बीमारी और घाव भरने में दिक्कत जैसी दिक्कतों का खतरा भी बढ़ जाता है.

कैसे कर सकते हैं सुधार

एक्सपर्ट का मानना है कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन को नजरअंदाज करना बड़ी भूल हो सकती है. यदि यह समस्या लगातार बनी हुई है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. समय पर जांच कराने से हार्ट रोग, हाई बीपी, डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों का पता शुरुआती चरण में लगाया जा सकता है. कई मामलों में बेहतर खानपान, नियमित व्यायाम और लाइपस्टाल में बदलाव से स्थिति में सुधार भी संभव है.

इसे भी पढ़ें- रोजाना 10 हजार कदम चलने का भ्रम खत्म, सिर्फ 4000 कदम चलकर भी पूरी तरह फिट रहेगा दिल

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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