Epilepsy Attack Treatment Myth : मिर्गी का दौरा पड़ने पर मोजे क्यों सुंघाते हैं, क्या इससे सच में ठीक हो जाता है मरीज?
Epilepsy Attack Treatment Myth : अक्सर कई बार जब भी किसी को मिर्गी का दौरा पड़ता है तो लोग तुरंत जूता, चप्पल या मोजा सुंघाने लगते हैं. कुछ लोग मुंह में चम्मच डाल देते हैं, तो कुछ पानी पिलाने की कोशिश करते हैं. पुराने समय से चली आ रहे ये तरीके आज भी अपनाएं जाते हैं. लोग इन्हें इलाज का हिस्सा समझ लेते हैं. लेकिन ज्यादातर लोग इसे लेकर सवाल करते हैं कि क्या सच में मोजा या जूता सुंघाने से मिर्गी का दौरा रुक जाता है या फिर यह सिर्फ एक मिथक है. डॉक्टरों के मुताबिक, मिर्गी (Epilepsy) दिमाग से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें दिमाग की एक्टिविटी अचानक असामान्य हो जाती है. ऐसे में मरीज को झटके आ सकते हैं, वह बेहोश हो सकता है या कुछ सेकंड के लिए एकटक देखने लग सकता है. लेकिन सही इलाज से ज्यादातर मरीज ठीक हो सकते हैं ऐसे में आइए आज जानते हैं कि मिर्गी का दौरा पड़ने पर मोजे क्यों सुंघाते हैं और क्या इससे सच में मरीज ठीक हो जाता है. मिर्गी का दौरा पड़ने पर मोजे क्यों सुंघाते है? पुराने समय से लोगों के बीच यह तरीका चलता आ रहा है कि मिर्गी का दौरा पड़ने पर मरीज को जूता, चप्पल या मोजा सुंघाने से उसे होश आ जाता है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार, यह सिर्फ एक मिथक है और इसका इलाज से कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है. मिर्गी का दौरा ज्यादातर मामलों में कुछ सेकंड से लेकर 1-2 मिनट के अंदर अपने आप खत्म हो जाता है. ऐसे में अगर इसी दौरान किसी ने मरीज को जूता या मोजा सुंघा दिया और थोड़ी देर बाद मरीज सामान्य हो गया, तो लोग यह मान लेते हैं कि वह इसी वजह से ठीक हुआ है. जबकि मरीज दौरे का नेचुरल टाइम पूरा होने के कारण सामान्य होता है. क्या इससे सच में मरीज ठीक हो जाता है? मिर्गी के दौरे में जूता, चप्पल या मोजा सुंघाने से मरीज ठीक नहीं होता है. मिर्गी (एपिलेप्सी) दिमाग से जुड़ी एक बीमारी है, जिसमें न्यूरॉन्स एक साथ जरूरत से ज्यादा इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजने लगती हैं. इससे दिमाग का सामान्य कामकाज कुछ समय के लिए रूक जाता है और व्यक्ति को दौरा पड़ सकता है. मिर्गी का दौरा आमतौर पर कुछ सेकंड से लेकर 1-2 मिनट में अपने आप ठीक हो जाता है. दौरे के दौरान मरीज के हाथ-पैरों में तेज झटके आ सकते हैं, वह बेहोश होकर गिर सकता है, शरीर अकड़ सकता है या कुछ सेकंड तक बिना किसी प्रतिक्रिया के एक ही दिशा में देखता रह सकता है. यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है और इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. जैसे सिर पर गंभीर चोट लगना, तेज बुखार, स्ट्रोक, दिमाग में संक्रमण, ऑक्सीजन की कमी, ब्लड शुगर का बहुत कम या ज्यादा होना, ब्रेन ट्यूमर या कुछ मामलों में जेनेटिक कारण यह भी पढ़ें - Premature Babies Blindness Risk: प्रीमैच्योर बेबी में अंधेपन का खतरा रोक सकती है शुरुआती आई स्क्रीनिंग, जानिए कैसे? मिर्गी का दौरा पड़ने पर कौन-कौन से लक्षण दिखाई देते हैं? हर मरीज में लक्षण अलग हो सकते हैं. आमतौर पर इनमें अचानक बेहोश हो जाना, हाथ-पैरों में तेज झटके आना, शरीर में अकड़न महसूस होना, मुंह से झाग निकलना, जबड़ा जकड़ जाना, कुछ सेकंड तक एकटक देखते रहना, चक्कर खाकर गिर जाना और दौरे के बाद भ्रम या थकान महसूस होना शामिल हैं. मिर्गी का दौरा पड़ने पर क्या करना चाहिए? 1. मरीज को करवट के बल लिटाएं - मरीज को सुरक्षित जगह पर एक करवट से लिटा दें. इससे मुंह में जमा लार या झाग आसानी से बाहर निकल सकेगा और सांस लेने में परेशानी नहीं होगी. 2. आसपास की खतरनाक चीजें हटा दें - मरीज के आसपास रखी कुर्सी, मेज, नुकीली या धारदार चीजें दूर कर दें, जिससे उसे चोट न लगे. 3. कपड़ों को ढीला करें - अगर शर्ट के ऊपरी बटन बंद हैं या कपड़े बहुत टाइट हैं, तो उन्हें थोड़ा ढीला कर दें. 4. दौरे का समय नोट करें - ध्यान रखें कि दौरा कितनी देर तक चला. अगर दौरा 5 मिनट से ज्यादा समय तक जारी रहे, तो तुरंत अस्पताल ले जाएं. यह भी पढ़ें - Nipah Outbreak in Kerala: केरल में निपाह वायरस की दस्तक, जानें यह कैसे फैलता है और कितना खतरनाक? Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Epilepsy Attack Treatment Myth : अक्सर कई बार जब भी किसी को मिर्गी का दौरा पड़ता है तो लोग तुरंत जूता, चप्पल या मोजा सुंघाने लगते हैं. कुछ लोग मुंह में चम्मच डाल देते हैं, तो कुछ पानी पिलाने की कोशिश करते हैं. पुराने समय से चली आ रहे ये तरीके आज भी अपनाएं जाते हैं. लोग इन्हें इलाज का हिस्सा समझ लेते हैं. लेकिन ज्यादातर लोग इसे लेकर सवाल करते हैं कि क्या सच में मोजा या जूता सुंघाने से मिर्गी का दौरा रुक जाता है या फिर यह सिर्फ एक मिथक है.
डॉक्टरों के मुताबिक, मिर्गी (Epilepsy) दिमाग से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें दिमाग की एक्टिविटी अचानक असामान्य हो जाती है. ऐसे में मरीज को झटके आ सकते हैं, वह बेहोश हो सकता है या कुछ सेकंड के लिए एकटक देखने लग सकता है. लेकिन सही इलाज से ज्यादातर मरीज ठीक हो सकते हैं ऐसे में आइए आज जानते हैं कि मिर्गी का दौरा पड़ने पर मोजे क्यों सुंघाते हैं और क्या इससे सच में मरीज ठीक हो जाता है.
मिर्गी का दौरा पड़ने पर मोजे क्यों सुंघाते है?
पुराने समय से लोगों के बीच यह तरीका चलता आ रहा है कि मिर्गी का दौरा पड़ने पर मरीज को जूता, चप्पल या मोजा सुंघाने से उसे होश आ जाता है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार, यह सिर्फ एक मिथक है और इसका इलाज से कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है. मिर्गी का दौरा ज्यादातर मामलों में कुछ सेकंड से लेकर 1-2 मिनट के अंदर अपने आप खत्म हो जाता है. ऐसे में अगर इसी दौरान किसी ने मरीज को जूता या मोजा सुंघा दिया और थोड़ी देर बाद मरीज सामान्य हो गया, तो लोग यह मान लेते हैं कि वह इसी वजह से ठीक हुआ है. जबकि मरीज दौरे का नेचुरल टाइम पूरा होने के कारण सामान्य होता है.
क्या इससे सच में मरीज ठीक हो जाता है?
मिर्गी के दौरे में जूता, चप्पल या मोजा सुंघाने से मरीज ठीक नहीं होता है. मिर्गी (एपिलेप्सी) दिमाग से जुड़ी एक बीमारी है, जिसमें न्यूरॉन्स एक साथ जरूरत से ज्यादा इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजने लगती हैं. इससे दिमाग का सामान्य कामकाज कुछ समय के लिए रूक जाता है और व्यक्ति को दौरा पड़ सकता है. मिर्गी का दौरा आमतौर पर कुछ सेकंड से लेकर 1-2 मिनट में अपने आप ठीक हो जाता है. दौरे के दौरान मरीज के हाथ-पैरों में तेज झटके आ सकते हैं, वह बेहोश होकर गिर सकता है, शरीर अकड़ सकता है या कुछ सेकंड तक बिना किसी प्रतिक्रिया के एक ही दिशा में देखता रह सकता है. यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है और इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. जैसे सिर पर गंभीर चोट लगना, तेज बुखार, स्ट्रोक, दिमाग में संक्रमण, ऑक्सीजन की कमी, ब्लड शुगर का बहुत कम या ज्यादा होना, ब्रेन ट्यूमर या कुछ मामलों में जेनेटिक कारण
यह भी पढ़ें - Premature Babies Blindness Risk: प्रीमैच्योर बेबी में अंधेपन का खतरा रोक सकती है शुरुआती आई स्क्रीनिंग, जानिए कैसे?
मिर्गी का दौरा पड़ने पर कौन-कौन से लक्षण दिखाई देते हैं?
हर मरीज में लक्षण अलग हो सकते हैं. आमतौर पर इनमें अचानक बेहोश हो जाना, हाथ-पैरों में तेज झटके आना, शरीर में अकड़न महसूस होना, मुंह से झाग निकलना, जबड़ा जकड़ जाना, कुछ सेकंड तक एकटक देखते रहना, चक्कर खाकर गिर जाना और दौरे के बाद भ्रम या थकान महसूस होना शामिल हैं.
मिर्गी का दौरा पड़ने पर क्या करना चाहिए?
1. मरीज को करवट के बल लिटाएं - मरीज को सुरक्षित जगह पर एक करवट से लिटा दें. इससे मुंह में जमा लार या झाग आसानी से बाहर निकल सकेगा और सांस लेने में परेशानी नहीं होगी.
2. आसपास की खतरनाक चीजें हटा दें - मरीज के आसपास रखी कुर्सी, मेज, नुकीली या धारदार चीजें दूर कर दें, जिससे उसे चोट न लगे.
3. कपड़ों को ढीला करें - अगर शर्ट के ऊपरी बटन बंद हैं या कपड़े बहुत टाइट हैं, तो उन्हें थोड़ा ढीला कर दें.
4. दौरे का समय नोट करें - ध्यान रखें कि दौरा कितनी देर तक चला. अगर दौरा 5 मिनट से ज्यादा समय तक जारी रहे, तो तुरंत अस्पताल ले जाएं.
यह भी पढ़ें - Nipah Outbreak in Kerala: केरल में निपाह वायरस की दस्तक, जानें यह कैसे फैलता है और कितना खतरनाक?
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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