ED Raids: ED की बड़ी कार्रवाई! लेवी लॉजिस्टिक्स घोटाले में करोड़ों की संपत्ति जब्त, मुंबई, दिल्ली समेत गुरुग्राम में छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. मुंबई जोनल ऑफिस ने 18.11.2025 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत मुंबई, दिल्ली और गुरुग्राम में एक साथ व्यापक छापेमारी की. इस कार्रवाई में करीब 51.81 लाख रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड्स को फ्रीज़, जबकि लगभग 84 लाख रुपये मूल्य के सोने के सिक्के और बिस्कुट जब्त किए गए. साथ ही बड़ी संख्या में आपत्तिजनक और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए. ED की जांच CBI, BS&FB, मुंबई की तरफ से दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई. FIR में M/s Leeway Logistics Ltd, उसके डायरेक्टर्स और गारंटरों पर आरोप है कि उन्होंने मिलकर 167.5 करोड़ रुपये के बैंक क्रेडिट का दुरुपयोग किया. आरोप है कि फंड डायवर्जन, राउंड ट्रिपिंग, असंबंधित कंपनियों को भुगतान, और LC का दुरुपयोग कर बैंकों को धोखा दिया गया. परिणामस्वरूप 2013 से 2016 के बीच बैंक कंसोर्टियम को 173.18 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. कंपनी का खाता 30 सितंबर 2016 को NPA घोषित किया गया था. डमी कंपनियों के खातों से बड़ी मात्रा में कैशED की जांच में सामने आया है कि संजय सिन्हा, डायरेक्टर M/s Leeway Logistics Ltd ने कई लोगों के साथ मिलकर कई फर्जी (डमी) कंपनियां बनाईं. इन संस्थाओं के माध्यम से लोन की रकम को घुमाया गया ताकि कंपनी का टर्नओवर अधिक दिखे और बैंक से अतिरिक्त क्रेडिट सुविधाएं हासिल की जा सकें. ED को यह भी पता चला है कि इन डमी कंपनियों के खातों से बड़ी मात्रा में कैश निकासी कर लोन की रकम को siphon किया गया. ED की आगे की जांच जारी है. क्या है ED? प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate – ED) भारत की सबसे महत्वपूर्ण केंद्रीय जांच एजेंसियों में से एक है, जो आर्थिक अपराधों, विदेशी मुद्रा उल्लंघन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच करती है. यह एजेंसी देशभर में बड़े वित्तीय घोटालों, हवाला कारोबार, भ्रष्टाचार के मामलों और गैरकानूनी धन लेनदेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. ED का मुख्य उद्देश्य आर्थिक अपराधों पर नियंत्रण, गैरकानूनी धन का पता लगाना, और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को खत्म करना है. कब और कैसे शुरू हुआ प्रवर्तन निदेशालय? प्रवर्तन निदेशालय की शुरुआत 1 मई 1956 को हुई थी. उस समय इसे वित्त मंत्रालय के Department of Economic Affairs के तहत Enforcement Unit के नाम से स्थापित किया गया था. इसका काम Foreign Exchange Regulation Act (FERA), 1947 से जुड़े मामलों की जांच करना था. ये भी पढ़ें: दिल्ली ब्लास्ट की इंटरनेशनल साजिश बेनकाब! तुर्किए में सीरियाई आतंकी से डॉ. उमर की सीक्रेट मीटिंग पर बड़ा खुलासा!
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. मुंबई जोनल ऑफिस ने 18.11.2025 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत मुंबई, दिल्ली और गुरुग्राम में एक साथ व्यापक छापेमारी की. इस कार्रवाई में करीब 51.81 लाख रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड्स को फ्रीज़, जबकि लगभग 84 लाख रुपये मूल्य के सोने के सिक्के और बिस्कुट जब्त किए गए. साथ ही बड़ी संख्या में आपत्तिजनक और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए.
ED की जांच CBI, BS&FB, मुंबई की तरफ से दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई. FIR में M/s Leeway Logistics Ltd, उसके डायरेक्टर्स और गारंटरों पर आरोप है कि उन्होंने मिलकर 167.5 करोड़ रुपये के बैंक क्रेडिट का दुरुपयोग किया. आरोप है कि फंड डायवर्जन, राउंड ट्रिपिंग, असंबंधित कंपनियों को भुगतान, और LC का दुरुपयोग कर बैंकों को धोखा दिया गया. परिणामस्वरूप 2013 से 2016 के बीच बैंक कंसोर्टियम को 173.18 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. कंपनी का खाता 30 सितंबर 2016 को NPA घोषित किया गया था.
डमी कंपनियों के खातों से बड़ी मात्रा में कैश
ED की जांच में सामने आया है कि संजय सिन्हा, डायरेक्टर M/s Leeway Logistics Ltd ने कई लोगों के साथ मिलकर कई फर्जी (डमी) कंपनियां बनाईं. इन संस्थाओं के माध्यम से लोन की रकम को घुमाया गया ताकि कंपनी का टर्नओवर अधिक दिखे और बैंक से अतिरिक्त क्रेडिट सुविधाएं हासिल की जा सकें. ED को यह भी पता चला है कि इन डमी कंपनियों के खातों से बड़ी मात्रा में कैश निकासी कर लोन की रकम को siphon किया गया. ED की आगे की जांच जारी है.
क्या है ED?
प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate – ED) भारत की सबसे महत्वपूर्ण केंद्रीय जांच एजेंसियों में से एक है, जो आर्थिक अपराधों, विदेशी मुद्रा उल्लंघन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच करती है. यह एजेंसी देशभर में बड़े वित्तीय घोटालों, हवाला कारोबार, भ्रष्टाचार के मामलों और गैरकानूनी धन लेनदेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. ED का मुख्य उद्देश्य आर्थिक अपराधों पर नियंत्रण, गैरकानूनी धन का पता लगाना, और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को खत्म करना है.
कब और कैसे शुरू हुआ प्रवर्तन निदेशालय?
प्रवर्तन निदेशालय की शुरुआत 1 मई 1956 को हुई थी. उस समय इसे वित्त मंत्रालय के Department of Economic Affairs के तहत Enforcement Unit के नाम से स्थापित किया गया था. इसका काम Foreign Exchange Regulation Act (FERA), 1947 से जुड़े मामलों की जांच करना था.
ये भी पढ़ें: दिल्ली ब्लास्ट की इंटरनेशनल साजिश बेनकाब! तुर्किए में सीरियाई आतंकी से डॉ. उमर की सीक्रेट मीटिंग पर बड़ा खुलासा!
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