Ebola Virus Outbreak: कितना खतरनाक है इबोला का नया स्ट्रेन, अब तक मिले 900 से ज्यादा संक्रमित; 223 की हुई मौत
Ebola Virus Outbreak : दुनिया में कोरोना के बाद अब एक और खतरनाक वायरस ने चिंता बढ़ा दी है. अफ्रीकी देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में इबोला वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है. इस बार इबोला का जो नया स्ट्रेन सामने आया है, उसे बुंडीबुग्यो स्ट्रेन कहा जा रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह वायरस तेजी से संक्रमण फैलाने वाला है और फिलहाल इसके लिए कोई पूरी तरह मंजूर वैक्सीन या खास इलाज मौजूद नहीं है. इसी वजह से दुनियाभर की हेल्थ एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि इबोला का नया स्ट्रेन कितना खतरनाक है, इससे अब तक 900 से ज्यादा संक्रमित मिले और 223 की मौत हुई. इबोला का नया स्ट्रेन कितना खतरनाक है? डॉक्टरों के मुताबिक, इबोला वायरस कोरोना से ज्यादा जानलेवा है. कोरोना में जहां मृत्यु दर काफी कम थी, वहीं इबोला से संक्रमित होने वाले लगभग आधे मरीजों की मौत हो सकती है. मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, इबोला का फेटैलिटी रेट करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. हालांकि यह वायरस कोरोना की तरह हवा में तेजी से नहीं फैलता है. कैसे फैलता है इबोला वायरस? विशेषज्ञों के अनुसार, इबोला वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, लार या शरीर के अन्य तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है. यह वायरस हवा के जरिए नहीं फैलता, इसलिए इसका ट्रांसमिशन कोरोना की तुलना में काफी धीमा माना जाता है. यही वजह है कि इसके वैश्विक महामारी बनने का खतरा कम बताया जा रहा है. अब तक कितने मामले सामने आए? WHO और अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार अब तक 900 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं. इनमें 100 से ज्यादा मामलों की कन्फर्मेशन हो चुकी है. कई लोगों की मौत भी दर्ज की गई है. कांगो के इटुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु इलाके इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं. वहीं युगांडा में भी संक्रमण के कई मामले सामने आए हैं. यह भी पढ़ें - Pimples Before Periods: पीरियड्स से पहले चेहरे पर आने लगते हैं पिंपल्स, समझिए शरीर का ये खास इशारा भारत में कितना खतरा है? भारत में इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन केंद्र सरकार ने सावधानी बढ़ा दी हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों के लिए हेल्थ एडवाइजरी जारी की है. एयरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है और क्वारंटाइन व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है. साथ ही भारत की वैज्ञानिक और फार्मा कंपनियां इबोला से बचाव के लिए वैक्सीन और एंटीबॉडी डेवलपमेंट में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास मजबूत फार्मास्यूटिकल क्षमता और रिसर्च नेटवर्क है, जिसकी मदद से इबोला जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए बेहतर तैयारी की जा सकती है. इबोला से बचने के लिए क्या सावधानी रखें? इबोला से बचने के लिए संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से बचना बेहद जरूरी है. अफ्रीकी देशों की गैर जरूरी यात्रा से बचें. नियमित रूप से हाथ साफ करें और किसी भी तरह के बुखार, उल्टी, कमजोरी या ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. अगर कोई व्यक्ति हाल ही में प्रभावित देशों से लौटा है, तो उसकी स्वास्थ्य जांच जरूर करानी चाहिए. यह भी पढ़ें - Childhood Cancer: अब जानलेवा नहीं रहा चाइल्डहुड कैंसर! 85% बच्चों की बच रही जान Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Ebola Virus Outbreak : दुनिया में कोरोना के बाद अब एक और खतरनाक वायरस ने चिंता बढ़ा दी है. अफ्रीकी देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में इबोला वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है. इस बार इबोला का जो नया स्ट्रेन सामने आया है, उसे बुंडीबुग्यो स्ट्रेन कहा जा रहा है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह वायरस तेजी से संक्रमण फैलाने वाला है और फिलहाल इसके लिए कोई पूरी तरह मंजूर वैक्सीन या खास इलाज मौजूद नहीं है. इसी वजह से दुनियाभर की हेल्थ एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि इबोला का नया स्ट्रेन कितना खतरनाक है, इससे अब तक 900 से ज्यादा संक्रमित मिले और 223 की मौत हुई.
इबोला का नया स्ट्रेन कितना खतरनाक है?
डॉक्टरों के मुताबिक, इबोला वायरस कोरोना से ज्यादा जानलेवा है. कोरोना में जहां मृत्यु दर काफी कम थी, वहीं इबोला से संक्रमित होने वाले लगभग आधे मरीजों की मौत हो सकती है. मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, इबोला का फेटैलिटी रेट करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. हालांकि यह वायरस कोरोना की तरह हवा में तेजी से नहीं फैलता है.
कैसे फैलता है इबोला वायरस?
विशेषज्ञों के अनुसार, इबोला वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, लार या शरीर के अन्य तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है. यह वायरस हवा के जरिए नहीं फैलता, इसलिए इसका ट्रांसमिशन कोरोना की तुलना में काफी धीमा माना जाता है. यही वजह है कि इसके वैश्विक महामारी बनने का खतरा कम बताया जा रहा है.
अब तक कितने मामले सामने आए?
WHO और अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार अब तक 900 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं. इनमें 100 से ज्यादा मामलों की कन्फर्मेशन हो चुकी है. कई लोगों की मौत भी दर्ज की गई है. कांगो के इटुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु इलाके इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं. वहीं युगांडा में भी संक्रमण के कई मामले सामने आए हैं.
यह भी पढ़ें - Pimples Before Periods: पीरियड्स से पहले चेहरे पर आने लगते हैं पिंपल्स, समझिए शरीर का ये खास इशारा
भारत में कितना खतरा है?
भारत में इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन केंद्र सरकार ने सावधानी बढ़ा दी हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों के लिए हेल्थ एडवाइजरी जारी की है. एयरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है और क्वारंटाइन व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है. साथ ही भारत की वैज्ञानिक और फार्मा कंपनियां इबोला से बचाव के लिए वैक्सीन और एंटीबॉडी डेवलपमेंट में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास मजबूत फार्मास्यूटिकल क्षमता और रिसर्च नेटवर्क है, जिसकी मदद से इबोला जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए बेहतर तैयारी की जा सकती है.
इबोला से बचने के लिए क्या सावधानी रखें?
इबोला से बचने के लिए संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से बचना बेहद जरूरी है. अफ्रीकी देशों की गैर जरूरी यात्रा से बचें. नियमित रूप से हाथ साफ करें और किसी भी तरह के बुखार, उल्टी, कमजोरी या ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. अगर कोई व्यक्ति हाल ही में प्रभावित देशों से लौटा है, तो उसकी स्वास्थ्य जांच जरूर करानी चाहिए.
यह भी पढ़ें - Childhood Cancer: अब जानलेवा नहीं रहा चाइल्डहुड कैंसर! 85% बच्चों की बच रही जान
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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