DUSU Election Rules: DUSU चुनाव, इन 5 गलतियों पर रद्द हो सकता है नामांकन
DUSU Election Rules: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ DUSU चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं. हर साल की तरह इस साल भी कैंपस में चुनावी माहौल दिखने लगा है. डूसू चुनाव में जीत हासिल करने के लिए उम्मीदवार दिन-रात मेहनत करते हैं. हालांकि, चुनाव जीतने से पहले सबसे जरूरी कदम नामांकन प्रक्रिया को सही तरीके से पार करना है. डीयू प्रशासन और लिंगदोह कमेटी के सख्त नियमों के कारण उम्मीदवारों की एक छोटी सी चूक उनका नामांकन रद्द करवा सकती है. जानें उन गलतियों के बारें में जो उम्मीदवार को चुनाव में खड़ा ही न होने देगी. परिसर या गाड़ियों में नशीले पदार्थ का सेवन चुनाव प्रचार के दौरान गाड़ियों के काफिले और हुड़दंग पर पूरी तरह रोक है. उम्मीदवारों को केवल उन्हीं गाड़ियों का इस्तेमाल करने की अनुमति है, जिन पर प्रॉक्टर ऑफिस द्वारा जारी किया गया अधिकृत स्टीकर लगा हो. बिना स्टीकर वाली गाड़ियां लाने, उन्हें फुटपाथ पर पार्क करने या ट्रैफिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने पर उम्मीदवार के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और पर्चा खारिज हो सकता है. पैम्फलेट का इस्तेमाल लिंगदोह कमेटी के नियमों के मुताबिक, डूसू चुनाव में छपे हुए पोस्टरों, बैनरों और पैम्फलेट पर पूरी तरह से पाबंदी है. उम्मीदवार प्रचार के लिए केवल हस्तनिर्मित पोस्टरों का ही इस्तेमाल कर सकते हैं. यदि कोई उम्मीदवार दीवारों पर प्रिंटेड पोस्टर चिपकाता है या सार्वजनिक संपत्ति को गंदा करता है,तो उसका नामांकन रद्द होने के साथ-साथ उस पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है. तय बजट से ज्यादा खर्च करना डूसू चुनाव में पैसों के पानी की तरह बहाने पर पूरी तरह रोक है. नियमों के अनुसार, प्रत्येक उम्मीदवार चुनाव प्रचार में अधिकतम 5,000 रुपये ही खर्च कर सकता है. नामांकन के समय और चुनाव के बाद उम्मीदवारों को अपने खर्च का पूरा हिसाब देना होता है. यदि जांच में यह पाया गया कि उम्मीदवार ने तय सीमा से एक रुपया भी ज्यादा खर्च किया है, तो उसकी उम्मीदवारी को निरस्त कर दिया जाएगा. 75 प्रतिशत से कम अटेंडेंस एक छात्र नेता होने से पहले आपका एक अनुशासित छात्र होना जरूरी है. कोर्ट और लिंगदोह कमेटी के दिशा-निर्देशों के अनुसार, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार की कॉलेज में न्यूनतम उपस्थिति 75% होनी अनिवार्य है. यदि किसी छात्र की उपस्थिति इस आंकड़े से कम पाई जाती है, तो वह चुनाव लड़ने के योग्य नहीं माना जाएगा. यह भी पढ़ें: कितने पढ़े-लिखे हैं संजीव गोयनका, उनके पास कौन-कौन सी डिग्री? बाहरी लोगों का दखल डूसू चुनाव केवल दिल्ली विश्वविद्यालय के नियमित छात्रों के लिए है. चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति, पूर्व छात्र या राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं को कैंपस में हुड़दंग करने की इजाजत नहीं है. यदि किसी उम्मीदवार के प्रचार में बाहरी लोग हिंसा, हथियारों का प्रदर्शन या डराने-धमकाने का काम करते हैं, तो डीयू प्रशासन उस उम्मीदवार का नामांकन तुरंत निरस्त कर देगा. यह भी पढ़ें: विदेश में पढ़ाई का सपना होगा पूरा, सरकार दे रही 100% स्कॉलरशिप
DUSU Election Rules: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ DUSU चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं. हर साल की तरह इस साल भी कैंपस में चुनावी माहौल दिखने लगा है. डूसू चुनाव में जीत हासिल करने के लिए उम्मीदवार दिन-रात मेहनत करते हैं. हालांकि, चुनाव जीतने से पहले सबसे जरूरी कदम नामांकन प्रक्रिया को सही तरीके से पार करना है. डीयू प्रशासन और लिंगदोह कमेटी के सख्त नियमों के कारण उम्मीदवारों की एक छोटी सी चूक उनका नामांकन रद्द करवा सकती है. जानें उन गलतियों के बारें में जो उम्मीदवार को चुनाव में खड़ा ही न होने देगी.
परिसर या गाड़ियों में नशीले पदार्थ का सेवन
चुनाव प्रचार के दौरान गाड़ियों के काफिले और हुड़दंग पर पूरी तरह रोक है. उम्मीदवारों को केवल उन्हीं गाड़ियों का इस्तेमाल करने की अनुमति है, जिन पर प्रॉक्टर ऑफिस द्वारा जारी किया गया अधिकृत स्टीकर लगा हो. बिना स्टीकर वाली गाड़ियां लाने, उन्हें फुटपाथ पर पार्क करने या ट्रैफिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने पर उम्मीदवार के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और पर्चा खारिज हो सकता है.
पैम्फलेट का इस्तेमाल
लिंगदोह कमेटी के नियमों के मुताबिक, डूसू चुनाव में छपे हुए पोस्टरों, बैनरों और पैम्फलेट पर पूरी तरह से पाबंदी है. उम्मीदवार प्रचार के लिए केवल हस्तनिर्मित पोस्टरों का ही इस्तेमाल कर सकते हैं. यदि कोई उम्मीदवार दीवारों पर प्रिंटेड पोस्टर चिपकाता है या सार्वजनिक संपत्ति को गंदा करता है,तो उसका नामांकन रद्द होने के साथ-साथ उस पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.
तय बजट से ज्यादा खर्च करना
डूसू चुनाव में पैसों के पानी की तरह बहाने पर पूरी तरह रोक है. नियमों के अनुसार, प्रत्येक उम्मीदवार चुनाव प्रचार में अधिकतम 5,000 रुपये ही खर्च कर सकता है. नामांकन के समय और चुनाव के बाद उम्मीदवारों को अपने खर्च का पूरा हिसाब देना होता है. यदि जांच में यह पाया गया कि उम्मीदवार ने तय सीमा से एक रुपया भी ज्यादा खर्च किया है, तो उसकी उम्मीदवारी को निरस्त कर दिया जाएगा.
75 प्रतिशत से कम अटेंडेंस
एक छात्र नेता होने से पहले आपका एक अनुशासित छात्र होना जरूरी है. कोर्ट और लिंगदोह कमेटी के दिशा-निर्देशों के अनुसार, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार की कॉलेज में न्यूनतम उपस्थिति 75% होनी अनिवार्य है. यदि किसी छात्र की उपस्थिति इस आंकड़े से कम पाई जाती है, तो वह चुनाव लड़ने के योग्य नहीं माना जाएगा.
यह भी पढ़ें: कितने पढ़े-लिखे हैं संजीव गोयनका, उनके पास कौन-कौन सी डिग्री?
बाहरी लोगों का दखल
डूसू चुनाव केवल दिल्ली विश्वविद्यालय के नियमित छात्रों के लिए है. चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति, पूर्व छात्र या राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं को कैंपस में हुड़दंग करने की इजाजत नहीं है. यदि किसी उम्मीदवार के प्रचार में बाहरी लोग हिंसा, हथियारों का प्रदर्शन या डराने-धमकाने का काम करते हैं, तो डीयू प्रशासन उस उम्मीदवार का नामांकन तुरंत निरस्त कर देगा.
यह भी पढ़ें: विदेश में पढ़ाई का सपना होगा पूरा, सरकार दे रही 100% स्कॉलरशिप
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