Common Reasons Behind Cyber Attack: फोन बना साइबर अपराधियों का निशाना, रोज 1.3 लाख हमले
Common Reasons Behind Cyber Attack: आजकल स्मार्टफोन सिर्फ बात करने का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह हर किसी के लिए एक मिनी बैंक, डिजिटल लॉकर और ऑफिस बन चुका है. आज के समय में अगर एक आदमी के फोन में ये सारी चीजें हैं तो वे ना तो अपना पर्स अपने साथ रखता है, और ना ही कोई अपना जरूरी दस्तावेज. एक रिपोर्ट के मुताबिक 61% भारतीय यूजर अपने फोन में जरूरी दस्तावेज सेव करके रखते हैं. इसके अलावा 60% लोग फोटो और वीडियो, 53% लोग कॉन्टैक्ट्स, 42% लोग नोट्स और रिमाइंडर्स, और 27% लोग मेडिकल रिकॉर्ड तक फोन में स्टोर करते हैं. यही वजह है कि आज के समय में साइबर अपराधी अब इधर-उधर हमला करने के बजाय अब केवल फोन को अपना निशाना बना रहे हैं, क्योंकि उन्हें एक ही डिवाइस पर हमला करके यूजर की पूरी निजी जिंदगी, प्राइवेट फोटो, पासवर्डस हर चीज का पता चल जा रहा है. कैस्परस्की के एशिया-पैसिफिक सर्वे के अनुसार 60% भारतीय अपने स्मार्टफोन को ही अपना सबसे जरूरी डिवाइस मानते हैं, खास बात यह है कि साइबर अपराध के लिए स्मार्ट फोन पर हमला करना ज्यादा आसान है और उनके लिए फायदेमंद भी. पैसों से जुड़ा खतरा कितना बड़ा? आज के समय में ऐसे बहुत कम लोग ही मौजूद होंगे जो, ऑनलाइन पेमेंट की जगह पर पर्स में पैसे रखते होगे. यही वजह है कि फोन में सबसे ज्यादा खतरा पैसों से जुड़ी जानकारी को लेकर होता है. सर्वे में सामने आया कि 38% यूजर के बैंकिंग डिटेल्स फोन में सेव होती हैं. वहीं 34% यूजर के पासवर्ड और लॉगिन डिटेल्स भी फोन में मौजूद हैं. ऐसा वे अपनी सुविधा के लिए ही करते है यानी अगर वे अपना पासवर्ड भूल जाएं तो उनका फोन अपने आप पासवर्ड को खोल दें. इससे उनका अकाउंट ब्लॉक होने से बच जाता है. सबसे चिंता की बात यह है कि ज्यादातर लोग इन्हें बिना किसी सुरक्षित तरीके जैसे पासवर्ड मैनेजर के ही सेव करके रखते हैं, जिससे हैकर्स के लिए इन्हें चुराना आसान हो जाता है. इतना ही नहीं, 48% लोग अपने ऑफिस के ईमेल भी फोन में सेव रखते हैं और इसके अलावा 27% यूजर सीधे फोन से ही ऑफिस के सिस्टम तक पहुंच बनाते हैं. इन सब वजहों से भारत में 2025 में रोजाना औसतन 1.3 लाख साइबर हमले दर्ज किए गए, जो दिखाता है कि खतरा कितनी तेजी से बढ़ रहा है. यह भी पढ़ेंः Dell New Laptops Launch India: डेल ने भारत में उतारे तीन कमाल के लैपटॉप, मिलेंगे ये फीचर्स AI चैट से बढ़ा नया खतरा, बचाव कैसे करें? बात यही तक सीमित नहीं है. अभी के आकड़ो के अनुसार अब एक नया खतरा भी सामने आया है, वो है एआई चैट का. रिपोर्ट के मुताबिक 37% भारतीय अपने फोन में Ai चैट की हिस्ट्री सेव करके रखते हैं. जनवरी से मई 2026 के बीच दुनियाभर में 92,000 से ज्यादा साइबर अपराधियों ने ChatGPT, Grok और Gemini जैसे AI ऐप्स के फर्जी नाम का इस्तेमाल करके मालवेयर फैलाया है. एक बड़ा उदाहरण यह भी है, जिसमें एक AI ऐप की गड़बड़ी की वजह से करीब 2.5 करोड़ यूजर्स की 30 करोड़ से ज्यादा निजी चैट्स लीक हो गई. ऐसे में प्रशासन हमेशा से यूजर को सतर्क रहने की सलाह देते हैं. यह भी पढ़ेंः Wi-Fi 8 से मिट जाएगा कनेक्शन ड्रॉप होने का झंझट, कितनी फास्ट होगी?
Common Reasons Behind Cyber Attack: आजकल स्मार्टफोन सिर्फ बात करने का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह हर किसी के लिए एक मिनी बैंक, डिजिटल लॉकर और ऑफिस बन चुका है. आज के समय में अगर एक आदमी के फोन में ये सारी चीजें हैं तो वे ना तो अपना पर्स अपने साथ रखता है, और ना ही कोई अपना जरूरी दस्तावेज. एक रिपोर्ट के मुताबिक 61% भारतीय यूजर अपने फोन में जरूरी दस्तावेज सेव करके रखते हैं. इसके अलावा 60% लोग फोटो और वीडियो, 53% लोग कॉन्टैक्ट्स, 42% लोग नोट्स और रिमाइंडर्स, और 27% लोग मेडिकल रिकॉर्ड तक फोन में स्टोर करते हैं.
यही वजह है कि आज के समय में साइबर अपराधी अब इधर-उधर हमला करने के बजाय अब केवल फोन को अपना निशाना बना रहे हैं, क्योंकि उन्हें एक ही डिवाइस पर हमला करके यूजर की पूरी निजी जिंदगी, प्राइवेट फोटो, पासवर्डस हर चीज का पता चल जा रहा है. कैस्परस्की के एशिया-पैसिफिक सर्वे के अनुसार 60% भारतीय अपने स्मार्टफोन को ही अपना सबसे जरूरी डिवाइस मानते हैं, खास बात यह है कि साइबर अपराध के लिए स्मार्ट फोन पर हमला करना ज्यादा आसान है और उनके लिए फायदेमंद भी.
पैसों से जुड़ा खतरा कितना बड़ा?
आज के समय में ऐसे बहुत कम लोग ही मौजूद होंगे जो, ऑनलाइन पेमेंट की जगह पर पर्स में पैसे रखते होगे. यही वजह है कि फोन में सबसे ज्यादा खतरा पैसों से जुड़ी जानकारी को लेकर होता है. सर्वे में सामने आया कि 38% यूजर के बैंकिंग डिटेल्स फोन में सेव होती हैं. वहीं 34% यूजर के पासवर्ड और लॉगिन डिटेल्स भी फोन में मौजूद हैं. ऐसा वे अपनी सुविधा के लिए ही करते है यानी अगर वे अपना पासवर्ड भूल जाएं तो उनका फोन अपने आप पासवर्ड को खोल दें. इससे उनका अकाउंट ब्लॉक होने से बच जाता है.
सबसे चिंता की बात यह है कि ज्यादातर लोग इन्हें बिना किसी सुरक्षित तरीके जैसे पासवर्ड मैनेजर के ही सेव करके रखते हैं, जिससे हैकर्स के लिए इन्हें चुराना आसान हो जाता है. इतना ही नहीं, 48% लोग अपने ऑफिस के ईमेल भी फोन में सेव रखते हैं और इसके अलावा 27% यूजर सीधे फोन से ही ऑफिस के सिस्टम तक पहुंच बनाते हैं. इन सब वजहों से भारत में 2025 में रोजाना औसतन 1.3 लाख साइबर हमले दर्ज किए गए, जो दिखाता है कि खतरा कितनी तेजी से बढ़ रहा है.
यह भी पढ़ेंः Dell New Laptops Launch India: डेल ने भारत में उतारे तीन कमाल के लैपटॉप, मिलेंगे ये फीचर्स
AI चैट से बढ़ा नया खतरा, बचाव कैसे करें?
बात यही तक सीमित नहीं है. अभी के आकड़ो के अनुसार अब एक नया खतरा भी सामने आया है, वो है एआई चैट का. रिपोर्ट के मुताबिक 37% भारतीय अपने फोन में Ai चैट की हिस्ट्री सेव करके रखते हैं. जनवरी से मई 2026 के बीच दुनियाभर में 92,000 से ज्यादा साइबर अपराधियों ने ChatGPT, Grok और Gemini जैसे AI ऐप्स के फर्जी नाम का इस्तेमाल करके मालवेयर फैलाया है. एक बड़ा उदाहरण यह भी है, जिसमें एक AI ऐप की गड़बड़ी की वजह से करीब 2.5 करोड़ यूजर्स की 30 करोड़ से ज्यादा निजी चैट्स लीक हो गई. ऐसे में प्रशासन हमेशा से यूजर को सतर्क रहने की सलाह देते हैं.
यह भी पढ़ेंः Wi-Fi 8 से मिट जाएगा कनेक्शन ड्रॉप होने का झंझट, कितनी फास्ट होगी?
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