Child Cancer Deaths Global: भारत जैसे गरीब देशों में कैंसर से जान गंवा रहे 10 में से 9 बच्चे, डरा देगी लैंसेट की रिपोर्ट

Why Childhood Cancer Deaths Are Higher In Poor Countries: दुनिया भर में बच्चों में कैंसर एक गंभीर और बढ़ती हुई चिंता बनता जा रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इसके ज्यादातर मामले और मौतें गरीब और मध्यम आय वाले देशों में हो रही हैं.  द लैंसेट में पब्लिश ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज 2023 स्टडी ने इस असमानता को लेकर कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं.  रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में दुनिया भर में बच्चों में कैंसर के लगभग 3.77 लाख नए मामले सामने आए, जबकि करीब 1.44 लाख बच्चों की मौत हो गई, यह बीमारी बच्चों में मौत के प्रमुख कारणों में शामिल हो चुकी है और खसरा, टीबी और HIV/AIDS जैसी बीमारियों से भी ज्यादा जान ले रही है.  लो और मिडिल इनकम वाले देशों में ज्यादा मौतें सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इन मौतों में से करीब 94 प्रतिशत मामले लो और मिडिल इनकम देशों में दर्ज किए गए. यानी जहां संसाधन कम हैं, वहीं बच्चों के लिए यह बीमारी सबसे ज्यादा घातक साबित हो रही है. भारत की बात करें तो यहां 2023 में करीब 17,000 बच्चों की मौत कैंसर के कारण हुई, जिससे यह बच्चों में मौत का दसवां सबसे बड़ा कारण बन गया. कैंसर केयर अस्पताल, दरभंगा के कर्क रोग एक्सपर्ट डॉक्टर स्वरूप मित्रा के अनुसार,, इसके बावजूद भारत के राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम में बचपन के कैंसर को अभी तक प्राथमिकता नहीं दी गई है.  इसके लिए जरूरी है कि बचपन के कैंसर को राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण योजनाओं में तुरंत शामिल किया जाए. इसे भी पढ़ें- अचानक टूटने लगे जरूरत से ज्यादा बाल, शरीर में छुपी हो सकती है यह बीमारी दक्षिण एशिया की स्थिति दक्षिण एशिया इस संकट का बड़ा केंद्र बना हुआ है, जहां दुनिया के कुल चाइल्डहुड कैंसर से होने वाली मौतों का लगभग 20.5 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया. इसके अलावा, 1990 से 2023 के बीच इन मौतों में करीब 16.9 प्रतिशत  की बढ़ोतरी भी देखी गई है. हालांकि एक पॉजिटिव पहलू यह भी है कि वैश्विक स्तर पर मौतों में कुछ कमी आई है, लेकिन इसका लाभ सभी देशों तक समान रूप से नहीं पहुंच पाया है. उच्च आय वाले देशों में इलाज बेहतर होने से बच्चों के बचने की संभावना ज्यादा है, जबकि गरीब देशों में समय पर जांच और इलाज की कमी बड़ी बाधा बन रही है.  क्या कहते हैं एक्सपर्ट? इस स्टडी की प्रमुख लेखक लिसा फोर्स कहती हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं की असमानता के कारण ही यह अंतर पैदा हो रहा है. देर से डायग्नोसिस, जरूरी इलाज की कमी और स्वास्थ्य प्रणाली की कमजोरियां बच्चों की जान जोखिम में डाल रही हैं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चाइल्डहुड कैंसर के 85 प्रतिशत नए मामले और 94 प्रतिशत मौतें इन्हीं लो और मिडिल इनकम देशों में होती हैं. इसके अलावा, DALYs यानी "डिसएबिलिटी एडजस्टेड लाइफ ईयर्स" का भी 94 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं देशों में दर्ज किया गया, जो यह दिखाता है कि बीमारी का असर सिर्फ मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की जिंदगी की क्वालिटी पर भी पड़ता है.  इसे भी पढ़ें-  Sleeping Habits: 7–8 घंटे की नींद क्यों होती है जरूरी? एक्सपर्ट्स से जानिए सेहत पर इसका असर Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Apr 3, 2026 - 17:30
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Child Cancer Deaths Global: भारत जैसे गरीब देशों में कैंसर से जान गंवा रहे 10 में से 9 बच्चे, डरा देगी लैंसेट की रिपोर्ट

Why Childhood Cancer Deaths Are Higher In Poor Countries: दुनिया भर में बच्चों में कैंसर एक गंभीर और बढ़ती हुई चिंता बनता जा रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इसके ज्यादातर मामले और मौतें गरीब और मध्यम आय वाले देशों में हो रही हैं.  द लैंसेट में पब्लिश ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज 2023 स्टडी ने इस असमानता को लेकर कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं.  रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में दुनिया भर में बच्चों में कैंसर के लगभग 3.77 लाख नए मामले सामने आए, जबकि करीब 1.44 लाख बच्चों की मौत हो गई, यह बीमारी बच्चों में मौत के प्रमुख कारणों में शामिल हो चुकी है और खसरा, टीबी और HIV/AIDS जैसी बीमारियों से भी ज्यादा जान ले रही है. 

लो और मिडिल इनकम वाले देशों में ज्यादा मौतें

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इन मौतों में से करीब 94 प्रतिशत मामले लो और मिडिल इनकम देशों में दर्ज किए गए. यानी जहां संसाधन कम हैं, वहीं बच्चों के लिए यह बीमारी सबसे ज्यादा घातक साबित हो रही है. भारत की बात करें तो यहां 2023 में करीब 17,000 बच्चों की मौत कैंसर के कारण हुई, जिससे यह बच्चों में मौत का दसवां सबसे बड़ा कारण बन गया. कैंसर केयर अस्पताल, दरभंगा के कर्क रोग एक्सपर्ट डॉक्टर स्वरूप मित्रा के अनुसार,, इसके बावजूद भारत के राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम में बचपन के कैंसर को अभी तक प्राथमिकता नहीं दी गई है.  इसके लिए जरूरी है कि बचपन के कैंसर को राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण योजनाओं में तुरंत शामिल किया जाए.

इसे भी पढ़ें- अचानक टूटने लगे जरूरत से ज्यादा बाल, शरीर में छुपी हो सकती है यह बीमारी

दक्षिण एशिया की स्थिति

दक्षिण एशिया इस संकट का बड़ा केंद्र बना हुआ है, जहां दुनिया के कुल चाइल्डहुड कैंसर से होने वाली मौतों का लगभग 20.5 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया. इसके अलावा, 1990 से 2023 के बीच इन मौतों में करीब 16.9 प्रतिशत  की बढ़ोतरी भी देखी गई है. हालांकि एक पॉजिटिव पहलू यह भी है कि वैश्विक स्तर पर मौतों में कुछ कमी आई है, लेकिन इसका लाभ सभी देशों तक समान रूप से नहीं पहुंच पाया है. उच्च आय वाले देशों में इलाज बेहतर होने से बच्चों के बचने की संभावना ज्यादा है, जबकि गरीब देशों में समय पर जांच और इलाज की कमी बड़ी बाधा बन रही है. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

इस स्टडी की प्रमुख लेखक लिसा फोर्स कहती हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं की असमानता के कारण ही यह अंतर पैदा हो रहा है. देर से डायग्नोसिस, जरूरी इलाज की कमी और स्वास्थ्य प्रणाली की कमजोरियां बच्चों की जान जोखिम में डाल रही हैं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चाइल्डहुड कैंसर के 85 प्रतिशत नए मामले और 94 प्रतिशत मौतें इन्हीं लो और मिडिल इनकम देशों में होती हैं. इसके अलावा, DALYs यानी "डिसएबिलिटी एडजस्टेड लाइफ ईयर्स" का भी 94 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं देशों में दर्ज किया गया, जो यह दिखाता है कि बीमारी का असर सिर्फ मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की जिंदगी की क्वालिटी पर भी पड़ता है. 

इसे भी पढ़ें-  Sleeping Habits: 7–8 घंटे की नींद क्यों होती है जरूरी? एक्सपर्ट्स से जानिए सेहत पर इसका असर

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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