Cancer Treatment: क्या पपीते की पत्तियों से हो सकता है कैंसर का इलाज? नई रिसर्च पर छिड़ी बहस

Papaya Leaf Extract Cancer Chemotherapy Study: क्या पपीते की पत्तियों से कैंसर का इलाज संभव है? हाल ही में आई एक रिसर्च के बाद यह सवाल मेडिकल जगत में चर्चा का विषय बन गया है. देश के प्रतिष्ठित टाटा मेमोरियल सेंटर की एक क्लीनिकल ट्रायल में दावा किया गया है कि कैरिका पपाया लीफ एक्सट्रैक्ट कीमोथेरेपी करा रहे मरीजों में प्लेटलेट्स तेजी से रिकवर करने में मदद कर सकता है. हालांकि इस स्टडी को लेकर अब विवाद भी शुरू हो गया है. यह रिसर्च जर्नल ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी ग्लोबल ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित हुई थी. लेकिन बाद में केरल के हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. साइरिएक एबी फिलिप्स की शिकायत के बाद जर्नल ने इस पेपर पर एक्सप्रेशन ऑफ कंसर्न जारी कर दिया. इसका मतलब यह नहीं है कि रिसर्च को गलत साबित कर दिया गया है, बल्कि जर्नल फिलहाल उठाए गए सवालों की जांच कर रहा है.  कीमोथेरेपी टालने या दवा की डोज कम रिसर्च में करीब 200 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया, जिनकी कीमोथेरेपी के दौरान प्लेटलेट्स काफी कम हो गए थे. रिसर्चर के मुताबिक, जिन मरीजों को CPLE दिया गया, उनके प्लेटलेट्स प्लेसीबो ग्रुप की तुलना में चौथे दिन से ही तेजी से बढ़ने लग.। इतना ही नहीं, इन मरीजों में कीमोथेरेपी टालने या दवा की डोज कम करने की जरूरत भी काफी कम पड़ी. स्टडी के मुताबिक, सीपीईल लेने वाले केवल 25 प्रतिशत मरीजों को इलाज में देरी या डोज कम करनी पड़ी, जबकि प्लेसीबो ग्रुप में यह आंकड़ा 43 प्रतिशत था. रिसर्च के दौरान किसी गंभीर साइड इफेक्ट की भी जानकारी नहीं मिली. करीब 10 दिन का यह सपोर्टिव ट्रीटमेंट लगभग 300 रुपये में पूरा हो सकता है.  स्टडी में गड़बड़ी की आशंका हा डॉ. साइरिएक एबी फिलिप्स ने सोशल मीडिया पर इस रिसर्च पर सवाल उठाते हुए इसे गंभीर मामला बताया. उनका कहना है कि स्टडी में गड़बड़ी की आशंका है. वहीं टाटा मेमोरियल सेंटर के साइंटिस्ट का कहना है कि एक्सप्रेशन ऑफ कंसर्न केवल जांच की प्रक्रिया का हिस्सा है, इसे किसी तरह की साइंटफिक गड़बड़ी या धोखाधड़ी का सबूत नहीं माना जा सकता. स्टडी के को-राइटर और सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. कुमार प्रभाष ने कहा कि यह रिसर्च पूरी तरह साइंटफिक तरीके से की गई है और इंटरनेशनल पीयर रिव्यू के बाद प्रकाशित हुई. उन्होंने बताया कि 2025 में इस स्टडी को अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी की सालाना बैठक में भी पेश किया गया था. उनका कहना है कि अगर नतीजे निगेटिव भी आते तो उन्हें भी प्रकाशित किया जाता.   The much celebrated Papaya leaf extract for low platelet count in chemotherapy patients has now received an Expression of Concern from the Journal due to doubts regarding fraud after I notified the Journal.https://t.co/IdFzVzWjX1This is a black spot on Tata Memorial Cancer… pic.twitter.com/oVTeg2HTvb — TheLiverDoc™ (@theliverdoc) July 15, 2026 इसे भी पढ़े: Cervical Pain: ऑफिस हो या घर, ये छोटी-छोटी लापरवाहियां बन सकती हैं सर्वाइकल की वजह क्या पपीते की पत्तियां कैंसर का इलाज? वहीं, प्रमुख रिसर्चर डॉ. विकास ओस्टवाल ने कहा कि उनकी टीम अपने सभी निष्कर्षों पर कायम है. जर्नल ने अब तक रिसर्च टीम से कोई वैज्ञानिक सवाल नहीं पूछा है और यदि कोई सवाल आता है तो उसका जवाब वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत दिया जाएगा. टीएमसी के एक अन्य ऑन्कोलॉजिस्ट ने भी कहा कि किसी स्टडी पर सवाल उठाना गलत नहीं है, लेकिन अंतिम फैसला सोशल मीडिया नहीं बल्कि साइंटफिक जांच और सबूतों के आधार पर होना चाहिए. साइंटिस्ट का कहना है कि फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि पपीते की पत्तियां कैंसर का इलाज हैं. इसे भी पढ़ें: Monsoon Health Care Tips: मानसून सीजन में जल्दी बीमार पड़ जाते हैं बच्चे, ऐसे रखें उनकी सेहत का ख्याल? Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Jul 20, 2026 - 23:30
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Cancer Treatment: क्या पपीते की पत्तियों से हो सकता है कैंसर का इलाज? नई रिसर्च पर छिड़ी बहस

Papaya Leaf Extract Cancer Chemotherapy Study: क्या पपीते की पत्तियों से कैंसर का इलाज संभव है? हाल ही में आई एक रिसर्च के बाद यह सवाल मेडिकल जगत में चर्चा का विषय बन गया है. देश के प्रतिष्ठित टाटा मेमोरियल सेंटर की एक क्लीनिकल ट्रायल में दावा किया गया है कि कैरिका पपाया लीफ एक्सट्रैक्ट कीमोथेरेपी करा रहे मरीजों में प्लेटलेट्स तेजी से रिकवर करने में मदद कर सकता है. हालांकि इस स्टडी को लेकर अब विवाद भी शुरू हो गया है.

यह रिसर्च जर्नल ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी ग्लोबल ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित हुई थी. लेकिन बाद में केरल के हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. साइरिएक एबी फिलिप्स की शिकायत के बाद जर्नल ने इस पेपर पर एक्सप्रेशन ऑफ कंसर्न जारी कर दिया. इसका मतलब यह नहीं है कि रिसर्च को गलत साबित कर दिया गया है, बल्कि जर्नल फिलहाल उठाए गए सवालों की जांच कर रहा है. 

कीमोथेरेपी टालने या दवा की डोज कम

रिसर्च में करीब 200 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया, जिनकी कीमोथेरेपी के दौरान प्लेटलेट्स काफी कम हो गए थे. रिसर्चर के मुताबिक, जिन मरीजों को CPLE दिया गया, उनके प्लेटलेट्स प्लेसीबो ग्रुप की तुलना में चौथे दिन से ही तेजी से बढ़ने लग.। इतना ही नहीं, इन मरीजों में कीमोथेरेपी टालने या दवा की डोज कम करने की जरूरत भी काफी कम पड़ी. स्टडी के मुताबिक, सीपीईल लेने वाले केवल 25 प्रतिशत मरीजों को इलाज में देरी या डोज कम करनी पड़ी, जबकि प्लेसीबो ग्रुप में यह आंकड़ा 43 प्रतिशत था. रिसर्च के दौरान किसी गंभीर साइड इफेक्ट की भी जानकारी नहीं मिली. करीब 10 दिन का यह सपोर्टिव ट्रीटमेंट लगभग 300 रुपये में पूरा हो सकता है.

 स्टडी में गड़बड़ी की आशंका

हा डॉ. साइरिएक एबी फिलिप्स ने सोशल मीडिया पर इस रिसर्च पर सवाल उठाते हुए इसे गंभीर मामला बताया. उनका कहना है कि स्टडी में गड़बड़ी की आशंका है. वहीं टाटा मेमोरियल सेंटर के साइंटिस्ट का कहना है कि एक्सप्रेशन ऑफ कंसर्न केवल जांच की प्रक्रिया का हिस्सा है, इसे किसी तरह की साइंटफिक गड़बड़ी या धोखाधड़ी का सबूत नहीं माना जा सकता. स्टडी के को-राइटर और सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. कुमार प्रभाष ने कहा कि यह रिसर्च पूरी तरह साइंटफिक तरीके से की गई है और इंटरनेशनल पीयर रिव्यू के बाद प्रकाशित हुई. उन्होंने बताया कि 2025 में इस स्टडी को अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी की सालाना बैठक में भी पेश किया गया था. उनका कहना है कि अगर नतीजे निगेटिव भी आते तो उन्हें भी प्रकाशित किया जाता.

 

इसे भी पढ़े: Cervical Pain: ऑफिस हो या घर, ये छोटी-छोटी लापरवाहियां बन सकती हैं सर्वाइकल की वजह

क्या पपीते की पत्तियां कैंसर का इलाज?

वहीं, प्रमुख रिसर्चर डॉ. विकास ओस्टवाल ने कहा कि उनकी टीम अपने सभी निष्कर्षों पर कायम है. जर्नल ने अब तक रिसर्च टीम से कोई वैज्ञानिक सवाल नहीं पूछा है और यदि कोई सवाल आता है तो उसका जवाब वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत दिया जाएगा. टीएमसी के एक अन्य ऑन्कोलॉजिस्ट ने भी कहा कि किसी स्टडी पर सवाल उठाना गलत नहीं है, लेकिन अंतिम फैसला सोशल मीडिया नहीं बल्कि साइंटफिक जांच और सबूतों के आधार पर होना चाहिए. साइंटिस्ट का कहना है कि फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि पपीते की पत्तियां कैंसर का इलाज हैं.

इसे भी पढ़ें: Monsoon Health Care Tips: मानसून सीजन में जल्दी बीमार पड़ जाते हैं बच्चे, ऐसे रखें उनकी सेहत का ख्याल?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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