Budget 2026: क्या 3.50 लाख तक बढ़ेगी 80C डिडक्शन लिमिट? 12 साल से 1.5 लाख रुपये पर अटकी
Budget 2026: बजट 2026 जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे लोगों की बेचैनी बढ़ती जा रही है. खासतौर पर, मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स की इससे काफी ज्यादा उम्मीदें हैं. इन्हीं उम्मीदों में से एक इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C से जुड़ी है, जो लोगों को पीपीएफ, ईएलएसएस, जीवन बीमा, एनएससी जैसे कई अलग-अलग तरह के सेविंग्स स्कीम में इंवेस्ट कर टैक्स बचाने की सुविधा देता है. क्या सरकार देगी लोगों को राहत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इनकम टैक्स अधिनियम की सेक्शन 80C की लिमिट को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर सकती हैं. अगर वाकई में डिडक्शन लिमिट बढ़ गई तो यह ओल्ड टैक्स रिजीम वाले टैक्सपेयर्स के लिए किसी सौगात से कम नहीं होगी. बजट से पहले टैक्सपेयर्स यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या बढ़ती महंगाई और बढ़ते घरेलू खर्चों के साथ सरकार टैक्स बचाने वाले डिडक्शन से जुड़ी पुरानी मांगों पर ध्यान देती है या नहीं. सेक्शन 80C क्या है और यह क्यों जरूरी है? सेक्शन 80C पुराने टैक्स सिस्टम को चुनने वाले टैक्सपेयर्स को पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), इक्विटी-लिंक्ड सेविंग स्कीम्स (ELSS), लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) और कुछ पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम्स जैसे पॉपुलर सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स में किए गए इन्वेस्टमेंट पर डिडक्शन क्लेम करने की सुविधा देता है. अभी सेक्शन 80C के तहत अधिकतम डिडक्शन हर फाइनेंशियल ईयर में 1.5 लाख तक सीमित है. आखिरी बार बजट 2014 में इसमें बदलाव किया गया था. यानी कि 12 साल होने को है यह अभी तक 1.5 लाख रुपये पर अटकी हुई है.जबकि इस दौरान शिक्षा से लेकर हेल्थकेयर, इंश्योरेंस और रिटायरमेंट प्लानिंग से जुड़े खर्च तेजी से बढ़े हैं, लेकिन डिडक्शन की लिमिट कम होने से टैक्सपेयर्स को फायदा नहीं मिल पा रहा है. क्या सरकार 80C की लिमिट बढ़ाएगी? धारा 80C कटौती की सीमा बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जा रही है. इंडस्ट्री बॉडीज और टैक्स एक्सपर्ट्स के सुझाव के साथ अमेरिकन चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स इन इंडिया (AMCHAM) ने सरकार से औपचारिक रूप से सेक्शन 80C की लिमिट को बढ़ाकर 3.5 लाख करने का आग्रह किया है. AMCHAM के अनुसार, इस कदम से सैलरी पाने वाले प्रोफेशनल्स और मिडिल-इनकम परिवारों को सीधा फायदा होगा, जो अपने फाइनेंस को समझदारी के साथ मैनेज करने के लिए टैक्स बचाने वाले इन्वेस्टमेंट पर बहुत ज्यादा निर्भर रहते हैं. डिडक्शन की लिमिट बढ़ेगी, तो टैक्सेबल इनकम कम हो जाएगी. इससे हाथ में ज्यादा पैसा बचेगा और साथ ही लॉन्ग-टर्म बचत को भी बढ़ावा मिलेगा. ये भी पढ़ें: अब दुनिया देखेगी भारत की ताकत, ड्रैगन को सीधी चुनौती! इस मामले में करने जा रहा बराबरी
Budget 2026: बजट 2026 जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे लोगों की बेचैनी बढ़ती जा रही है. खासतौर पर, मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स की इससे काफी ज्यादा उम्मीदें हैं. इन्हीं उम्मीदों में से एक इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C से जुड़ी है, जो लोगों को पीपीएफ, ईएलएसएस, जीवन बीमा, एनएससी जैसे कई अलग-अलग तरह के सेविंग्स स्कीम में इंवेस्ट कर टैक्स बचाने की सुविधा देता है.
क्या सरकार देगी लोगों को राहत?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इनकम टैक्स अधिनियम की सेक्शन 80C की लिमिट को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर सकती हैं. अगर वाकई में डिडक्शन लिमिट बढ़ गई तो यह ओल्ड टैक्स रिजीम वाले टैक्सपेयर्स के लिए किसी सौगात से कम नहीं होगी. बजट से पहले टैक्सपेयर्स यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या बढ़ती महंगाई और बढ़ते घरेलू खर्चों के साथ सरकार टैक्स बचाने वाले डिडक्शन से जुड़ी पुरानी मांगों पर ध्यान देती है या नहीं.
सेक्शन 80C क्या है और यह क्यों जरूरी है?
सेक्शन 80C पुराने टैक्स सिस्टम को चुनने वाले टैक्सपेयर्स को पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), इक्विटी-लिंक्ड सेविंग स्कीम्स (ELSS), लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) और कुछ पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम्स जैसे पॉपुलर सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स में किए गए इन्वेस्टमेंट पर डिडक्शन क्लेम करने की सुविधा देता है.
अभी सेक्शन 80C के तहत अधिकतम डिडक्शन हर फाइनेंशियल ईयर में 1.5 लाख तक सीमित है. आखिरी बार बजट 2014 में इसमें बदलाव किया गया था. यानी कि 12 साल होने को है यह अभी तक 1.5 लाख रुपये पर अटकी हुई है.जबकि इस दौरान शिक्षा से लेकर हेल्थकेयर, इंश्योरेंस और रिटायरमेंट प्लानिंग से जुड़े खर्च तेजी से बढ़े हैं, लेकिन डिडक्शन की लिमिट कम होने से टैक्सपेयर्स को फायदा नहीं मिल पा रहा है.
क्या सरकार 80C की लिमिट बढ़ाएगी?
धारा 80C कटौती की सीमा बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जा रही है. इंडस्ट्री बॉडीज और टैक्स एक्सपर्ट्स के सुझाव के साथ अमेरिकन चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स इन इंडिया (AMCHAM) ने सरकार से औपचारिक रूप से सेक्शन 80C की लिमिट को बढ़ाकर 3.5 लाख करने का आग्रह किया है.
AMCHAM के अनुसार, इस कदम से सैलरी पाने वाले प्रोफेशनल्स और मिडिल-इनकम परिवारों को सीधा फायदा होगा, जो अपने फाइनेंस को समझदारी के साथ मैनेज करने के लिए टैक्स बचाने वाले इन्वेस्टमेंट पर बहुत ज्यादा निर्भर रहते हैं. डिडक्शन की लिमिट बढ़ेगी, तो टैक्सेबल इनकम कम हो जाएगी. इससे हाथ में ज्यादा पैसा बचेगा और साथ ही लॉन्ग-टर्म बचत को भी बढ़ावा मिलेगा.
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अब दुनिया देखेगी भारत की ताकत, ड्रैगन को सीधी चुनौती! इस मामले में करने जा रहा बराबरी
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