BMC elections: BMC चुनाव में डिजिटल रणभूमि में उतरे राजनीतिक दल, सोशल मीडिया और AI बना सबसे बड़ा हथियार

मुंबई में होने वाले 15वें बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव से पहले सियासी माहौल तेजी से बदलता नजर आ रहा है. देश की सबसे अमीर नगर निकाय के इस चुनाव में अब पारंपरिक रैलियों और घर-घर प्रचार के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म सबसे अहम रणनीतिक हथियार बनकर उभरे हैं. राजनीतिक दल सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑनलाइन कैंपेन के जरिए मतदाताओं, खासकर युवाओं और शहरी वर्ग को साधने में जुट गए हैं. इस बार BMC चुनाव में 227 नगरसेवकों का चयन होना है, लेकिन प्रचार का तरीका पहले से काफी अलग दिख रहा है. इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स और व्हाट्सऐप ग्रुप्स अब वोटरों तक पहुंचने का सबसे तेज माध्यम बन चुके हैं. छोटे वीडियो, ग्राफिक्स और आसानी से शेयर होने वाले कंटेंट पर जोर दिया जा रहा है ताकि संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रियता अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि चुनावी सफलता की शर्त बन चुकी है. भीड़भाड़ वाले शहरी माहौल में ऑनलाइन मौजूदगी दलों को सीधा लाभ दे रही है. BJP का AI और ब्रांडिंग पर जोर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस चुनाव में डिजिटल ब्रांडिंग को केंद्र में रखा है. पार्टी ने अपने नारों, रंगों और संदेशों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों में एक समान रखा है, जिससे मतदाताओं के बीच पहचान मजबूत हो सके. इसके अलावा, AI-जनरेटेड वीडियो और लोकप्रिय काल्पनिक किरदारों के जरिए बनाए गए कंटेंट ने सोशल मीडिया पर खासा ध्यान खींचा है. इन वीडियो का मकसद युवा मतदाताओं को आकर्षित करना और संदेश को मनोरंजक तरीके से पेश करना है. शिवसेना (UBT) का विकास आधारित प्रचार वहीं शिवसेना (UBT) ने अपने डिजिटल कैंपेन में विकास कार्यों को प्रमुखता दी है. पार्टी मुंबई कोस्टल रोड जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है. डिजिटल पोस्टर्स और वीडियो के जरिए यह बताने की कोशिश की जा रही है कि नगर निगम में उनके कार्यकाल के दौरान शहर को किस तरह की सुविधाएं मिलीं. सोशल मीडिया पर इन दावों को लेकर चर्चा और बहस भी तेज हो गई है. कांग्रेस समेत अन्य दल भी डिजिटल मोड में कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दल भी अब डिजिटल माध्यमों को गंभीरता से अपना रहे हैं. AI विजुअल्स, शॉर्ट वीडियो और ट्रेंडिंग फॉर्मेट्स के जरिए संदेश को सरल और प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, अब विस्तृत घोषणापत्र से ज्यादा ध्यान आकर्षण, शेयरबिलिटी और मैसेज की यादगार प्रस्तुति पर दिया जा रहा है. नगर निगम चुनावों में नया दौर मुंबई BMC चुनाव में डिजिटल कैंपेन की बढ़ती भूमिका यह संकेत देती है कि आने वाले समय में स्थानीय निकाय चुनाव भी पूरी तरह टेक्नोलॉजी-ड्रिवन हो सकते हैं. सोशल मीडिया अब सिर्फ प्रचार का साधन नहीं, बल्कि राजनीतिक विमर्श का केंद्र बनता जा रहा है. जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आएगी, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दावे, जवाबी हमले और प्रचार और तेज होने की उम्मीद है. साफ है कि इस बार मुंबई का नगर निगम चुनाव सिर्फ सड़कों पर नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी लड़ा जा रहा है. ये भी पढ़ें: 'देश के 44 फीसदी शहर गंभीर...', वायु प्रदूषण को लेकर जयराम रमेश का मोदी सरकार पर हमला

Jan 11, 2026 - 19:30
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BMC elections: BMC चुनाव में डिजिटल रणभूमि में उतरे राजनीतिक दल, सोशल मीडिया और AI बना सबसे बड़ा हथियार

मुंबई में होने वाले 15वें बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव से पहले सियासी माहौल तेजी से बदलता नजर आ रहा है. देश की सबसे अमीर नगर निकाय के इस चुनाव में अब पारंपरिक रैलियों और घर-घर प्रचार के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म सबसे अहम रणनीतिक हथियार बनकर उभरे हैं. राजनीतिक दल सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑनलाइन कैंपेन के जरिए मतदाताओं, खासकर युवाओं और शहरी वर्ग को साधने में जुट गए हैं.

इस बार BMC चुनाव में 227 नगरसेवकों का चयन होना है, लेकिन प्रचार का तरीका पहले से काफी अलग दिख रहा है. इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स और व्हाट्सऐप ग्रुप्स अब वोटरों तक पहुंचने का सबसे तेज माध्यम बन चुके हैं. छोटे वीडियो, ग्राफिक्स और आसानी से शेयर होने वाले कंटेंट पर जोर दिया जा रहा है ताकि संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रियता अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि चुनावी सफलता की शर्त बन चुकी है. भीड़भाड़ वाले शहरी माहौल में ऑनलाइन मौजूदगी दलों को सीधा लाभ दे रही है.

BJP का AI और ब्रांडिंग पर जोर

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस चुनाव में डिजिटल ब्रांडिंग को केंद्र में रखा है. पार्टी ने अपने नारों, रंगों और संदेशों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों में एक समान रखा है, जिससे मतदाताओं के बीच पहचान मजबूत हो सके. इसके अलावा, AI-जनरेटेड वीडियो और लोकप्रिय काल्पनिक किरदारों के जरिए बनाए गए कंटेंट ने सोशल मीडिया पर खासा ध्यान खींचा है. इन वीडियो का मकसद युवा मतदाताओं को आकर्षित करना और संदेश को मनोरंजक तरीके से पेश करना है.

शिवसेना (UBT) का विकास आधारित प्रचार

वहीं शिवसेना (UBT) ने अपने डिजिटल कैंपेन में विकास कार्यों को प्रमुखता दी है. पार्टी मुंबई कोस्टल रोड जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है. डिजिटल पोस्टर्स और वीडियो के जरिए यह बताने की कोशिश की जा रही है कि नगर निगम में उनके कार्यकाल के दौरान शहर को किस तरह की सुविधाएं मिलीं. सोशल मीडिया पर इन दावों को लेकर चर्चा और बहस भी तेज हो गई है.

कांग्रेस समेत अन्य दल भी डिजिटल मोड में

कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दल भी अब डिजिटल माध्यमों को गंभीरता से अपना रहे हैं. AI विजुअल्स, शॉर्ट वीडियो और ट्रेंडिंग फॉर्मेट्स के जरिए संदेश को सरल और प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, अब विस्तृत घोषणापत्र से ज्यादा ध्यान आकर्षण, शेयरबिलिटी और मैसेज की यादगार प्रस्तुति पर दिया जा रहा है.

नगर निगम चुनावों में नया दौर

मुंबई BMC चुनाव में डिजिटल कैंपेन की बढ़ती भूमिका यह संकेत देती है कि आने वाले समय में स्थानीय निकाय चुनाव भी पूरी तरह टेक्नोलॉजी-ड्रिवन हो सकते हैं. सोशल मीडिया अब सिर्फ प्रचार का साधन नहीं, बल्कि राजनीतिक विमर्श का केंद्र बनता जा रहा है. जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आएगी, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दावे, जवाबी हमले और प्रचार और तेज होने की उम्मीद है. साफ है कि इस बार मुंबई का नगर निगम चुनाव सिर्फ सड़कों पर नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी लड़ा जा रहा है.

ये भी पढ़ें: 'देश के 44 फीसदी शहर गंभीर...', वायु प्रदूषण को लेकर जयराम रमेश का मोदी सरकार पर हमला

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