Bhai Dooj 2025: भाई दूज पर दीपक बुझना अशुभ क्यों? जानें इसके पीछे की गहरी धार्मिक मान्यता और उपाय !

Bhai Dooj 2025: भाई दूज का त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाएगा, जो कल 23 अक्टूबर को है. इस दिन बहने अपने भाईयों को के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती है. कई जगहों पर इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन कई लोग यमराज की पूजा भी करते हैं. अगर यह पूजा करते समय अगर किसी का दीपक बुझ जाए तो उसे अशुभ माना जाता है या किसी भी त्योहार पर अचानक कोई विपत्ति आने वाली हो तो दीपक की लौ कांपने लगती है या बुझ जाती है. इसके पीछे की धार्मिक मान्यता क्या है, आइए जानते हैं.  पंचतत्वों से बना है दीपक दीपक को हमारी ही चेतना का स्वरूप माना जाता है. जिस तरह हमारा शरीर भी पंचतत्वों से बना है, उसी तरह  मिट्टी का दीपक भी पांच तत्वों पर आधारित है. इसे बनाने के लिए मिट्टी को पानी से गलाया जाता है, जो भूमि और जल तत्व का प्रतीक होता है. इसके बाद जब ये बन जाता है तो इसे धूप और हवा में रखकर सुखाया जाता है. जो आकाश और वायु का प्रतीक है. फिर आग में तापाकर इसकी पूरी प्रतिक्रिया पूरी होती है. जो अग्नि का प्रतीक है. धार्मिक मान्यता के मुताबिक पूजा के वक्त मिट्टी का दीपक जलाने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और साहस आता है.  क्या है दीपक बुझने की मान्यता? दीपक का बुझना इस बात का प्रतीक है कि देवी-देवता आपसे प्रसन्न नहीं है, वरना ये यह दर्शाता है कि आपने पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ नहीं की है. ज्योतिष दृष्टि के मुताबिक, इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि आपकी मनोकामनाओं में बाधा आ रही है या आपके ऊपर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव है, जिसस वजह से दीपक बुझ रहा है. दीपक फैलाता है सकारात्मक ऊर्जा  दीपक की लौ में आनंद, प्रेम, भक्ति और दिव्यता का साक्षात निवास माना गया है. ज्योतिष के अनुसार दीपक और मिट्टी मंगल तथा भू तत्व का प्रतीक हैं, जबकि घी समृद्धि और शुक्र का प्रतीक है, और तिल का तेल शनि का प्रतिनिधित्व करता है. यह परंपरा वैदिक काल से निरंतर चलती आ रही है और आज भी लोक जीवन में इसे उतनी ही आस्था के साथ निभाई जाती है. जब हम पूजा स्थान में दीप प्रज्वलित करते हैं, तो उसके अग्र भाग में समस्त देवताओं का वास होता है. दीपक वह माध्यम है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का मार्ग खोलता है. जब श्रद्धा और एकाग्रता के साथ दीप जलाया जाता है, तो उसकी रौशनी से पूरे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और पवित्रता का संचार होता है.  Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

Oct 22, 2025 - 23:30
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Bhai Dooj 2025: भाई दूज पर दीपक बुझना अशुभ क्यों? जानें इसके पीछे की गहरी धार्मिक मान्यता और उपाय !

Bhai Dooj 2025: भाई दूज का त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाएगा, जो कल 23 अक्टूबर को है. इस दिन बहने अपने भाईयों को के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती है. कई जगहों पर इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है.

इस दिन कई लोग यमराज की पूजा भी करते हैं. अगर यह पूजा करते समय अगर किसी का दीपक बुझ जाए तो उसे अशुभ माना जाता है या किसी भी त्योहार पर अचानक कोई विपत्ति आने वाली हो तो दीपक की लौ कांपने लगती है या बुझ जाती है. इसके पीछे की धार्मिक मान्यता क्या है, आइए जानते हैं. 

पंचतत्वों से बना है दीपक

दीपक को हमारी ही चेतना का स्वरूप माना जाता है. जिस तरह हमारा शरीर भी पंचतत्वों से बना है, उसी तरह  मिट्टी का दीपक भी पांच तत्वों पर आधारित है. इसे बनाने के लिए मिट्टी को पानी से गलाया जाता है, जो भूमि और जल तत्व का प्रतीक होता है.

इसके बाद जब ये बन जाता है तो इसे धूप और हवा में रखकर सुखाया जाता है. जो आकाश और वायु का प्रतीक है. फिर आग में तापाकर इसकी पूरी प्रतिक्रिया पूरी होती है. जो अग्नि का प्रतीक है. धार्मिक मान्यता के मुताबिक पूजा के वक्त मिट्टी का दीपक जलाने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और साहस आता है. 

क्या है दीपक बुझने की मान्यता?

दीपक का बुझना इस बात का प्रतीक है कि देवी-देवता आपसे प्रसन्न नहीं है, वरना ये यह दर्शाता है कि आपने पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ नहीं की है. ज्योतिष दृष्टि के मुताबिक, इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि आपकी मनोकामनाओं में बाधा आ रही है या आपके ऊपर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव है, जिसस वजह से दीपक बुझ रहा है.

दीपक फैलाता है सकारात्मक ऊर्जा 

दीपक की लौ में आनंद, प्रेम, भक्ति और दिव्यता का साक्षात निवास माना गया है. ज्योतिष के अनुसार दीपक और मिट्टी मंगल तथा भू तत्व का प्रतीक हैं, जबकि घी समृद्धि और शुक्र का प्रतीक है, और तिल का तेल शनि का प्रतिनिधित्व करता है.

यह परंपरा वैदिक काल से निरंतर चलती आ रही है और आज भी लोक जीवन में इसे उतनी ही आस्था के साथ निभाई जाती है.

जब हम पूजा स्थान में दीप प्रज्वलित करते हैं, तो उसके अग्र भाग में समस्त देवताओं का वास होता है. दीपक वह माध्यम है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का मार्ग खोलता है. जब श्रद्धा और एकाग्रता के साथ दीप जलाया जाता है, तो उसकी रौशनी से पूरे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और पवित्रता का संचार होता है. 

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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