Ayatul-Kursi: आयत अल-कुर्सी हर मुश्किल का हल! जानें इस आयत की बरकत, हिफाजत और फायदे

आयत अल-कुर्सी के फायदे:  कुरान-ए-पाक की हर आयत बहुत अफजल है, ये आयतें इंसान की जिंदगी को राह दिखाती हैं और सत्ता हासिल करने की ताकत रखती है. मगर हमारे उलेमा और संतों का कहना है कि कुरान में एक ऐसी आयत भी है, जिसका अर्थ है तिलावत से दिल को गहरा सच्चा होना और इंसान की बुरी ताकतों से हिफाज़त करना. यह आयत आयतुल कुरसी है (सूरह अल-बकरा, 2:255). इसे प्रतिदिन तिलावत करने से दिल मजबूत होता है, डर और वहम दूर होते हैं और इंसान को अल्लाह की रहमत और पना में आ जाता है. इसका कारण यह है कि कुरान की आयतों में आयतूल कुरसी को सबसे प्रसिद्ध आयत माना जाता है. आइए जानते हैं इसमें क्या है सांख्यिकी? आयतुल कुर्सी क्यों है खास?आइतुल कुरसी की तिलावत की बड़ी फजीलत बताई गई है. इसमें अल्लाह की बादशाहत, उसकी कुदरत और उसकी अनंत इल्म का ज़िक्र है. उमला कहते हैं कि यह विचित्र इंसान को यह एहसास दिलाता है कि पूरी तरह से कायनात पर सिर्फ अल्लाह की हुकूमत है और उसी के हुक्म से सब कुछ पता चलता है. इसे पढ़ने वाला विशेष रूप से अल्लाह के पनाह में आ जाता है और हर तरह की बुरी नजर, डर और शैतानी असर से महफूज रहता है. इसी वजह से अयातुल कुर्सी को "हिफाज़त की आयत" भी कहा जाता है, जो इंसान को रुहानी परवरदिगार बख़्शती है. शैतान क्यों काम करता है?रिवायतों में साफा पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि शैतान आयतुल कुर्सी से बेहद अजाद हो जाता है. कहा जाता है कि जिस घर में इसका तिलावत होता है, वहां से शैतान करीब भी नहीं फटकता. इस आयत की बरकत से न सिर्फ बुरी ताकतें बल्कि दिल में रिकवरी वाले गलत हालात भी दूर हो जाते हैं. उलेमा कहते हैं कि अयातुल कुरसी की ताकतें इंसानों को अल्लाह की हिफाजत में ले आती हैं, जहां शैतान के असर को दर्शाया जाता है और उनके दांव-पेच नाकाम हो जाते हैं. यही कारण है कि अयतुल कुरसी पढ़ने वाला अल्लाह की रहमत में रहता है और उसका घर अमन, बरकत और रूहानी सावरल से भरा हुआ है. फ़रिश्तों का सज़ा करनाहाडिसन में ज़ार का ज़िक्र है कि जब अयतुल कुरसी की तिलावत की जाती है तो फ़रिश्ते अल्लाह की बारगाह में झुककर उसकी तस्बीह और स्तुति करते हैं. यह आयत अल्लाह की महानता, उसकी कुदरत और उसकी बादशाहत की इमामत है, इसलिए इसे ईमान की हिफ़ाज़त और रहमत का ज़रिया माना गया है. उलेमा का कहना है कि अयातुल कुरसी के बरकत से इंसान का दिल मजबूत होता है और ईमान रोशन रहता है. यह न केवल बुराई को दूर करता है बल्कि उसे अल्लाह की रहमत और ईश्वर से भर देता है. इसलिए इसे कुरान की सबसे अजीम आयत कहा गया है. रोज़ की ज़िन्दगी में पढ़ने का राज़अयातुल शहजादी शहंशाह की रोजमर्रा की जिंदगी में बेहद अद्भुत रचना है. नमाज़ के बाद, यात्रा पर यात्रा से पहले और सोने से पहले इसे एक आम रिवायत है. ऐसा माना जाता है कि यह बुद्धि दिल और दिमाग को परमात्मा देता है. यही वजह है कि अयातुल कुरसी दादी की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गई है और इसे रोजाना पढ़ना बेहद जरूरी माना जाता है. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Aug 30, 2025 - 19:30
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Ayatul-Kursi: आयत अल-कुर्सी हर मुश्किल का हल! जानें इस आयत की बरकत, हिफाजत और फायदे

आयत अल-कुर्सी के फायदे:  कुरान-ए-पाक की हर आयत बहुत अफजल है, ये आयतें इंसान की जिंदगी को राह दिखाती हैं और सत्ता हासिल करने की ताकत रखती है. मगर हमारे उलेमा और संतों का कहना है कि कुरान में एक ऐसी आयत भी है, जिसका अर्थ है तिलावत से दिल को गहरा सच्चा होना और इंसान की बुरी ताकतों से हिफाज़त करना.

यह आयत आयतुल कुरसी है (सूरह अल-बकरा, 2:255). इसे प्रतिदिन तिलावत करने से दिल मजबूत होता है, डर और वहम दूर होते हैं और इंसान को अल्लाह की रहमत और पना में आ जाता है. इसका कारण यह है कि कुरान की आयतों में आयतूल कुरसी को सबसे प्रसिद्ध आयत माना जाता है. आइए जानते हैं इसमें क्या है सांख्यिकी?

आयतुल कुर्सी क्यों है खास?
आइतुल कुरसी की तिलावत की बड़ी फजीलत बताई गई है. इसमें अल्लाह की बादशाहत, उसकी कुदरत और उसकी अनंत इल्म का ज़िक्र है. उमला कहते हैं कि यह विचित्र इंसान को यह एहसास दिलाता है कि पूरी तरह से कायनात पर सिर्फ अल्लाह की हुकूमत है और उसी के हुक्म से सब कुछ पता चलता है.

इसे पढ़ने वाला विशेष रूप से अल्लाह के पनाह में आ जाता है और हर तरह की बुरी नजर, डर और शैतानी असर से महफूज रहता है. इसी वजह से अयातुल कुर्सी को "हिफाज़त की आयत" भी कहा जाता है, जो इंसान को रुहानी परवरदिगार बख़्शती है.

शैतान क्यों काम करता है?
रिवायतों में साफा पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि शैतान आयतुल कुर्सी से बेहद अजाद हो जाता है. कहा जाता है कि जिस घर में इसका तिलावत होता है, वहां से शैतान करीब भी नहीं फटकता. इस आयत की बरकत से न सिर्फ बुरी ताकतें बल्कि दिल में रिकवरी वाले गलत हालात भी दूर हो जाते हैं.

उलेमा कहते हैं कि अयातुल कुरसी की ताकतें इंसानों को अल्लाह की हिफाजत में ले आती हैं, जहां शैतान के असर को दर्शाया जाता है और उनके दांव-पेच नाकाम हो जाते हैं. यही कारण है कि अयतुल कुरसी पढ़ने वाला अल्लाह की रहमत में रहता है और उसका घर अमन, बरकत और रूहानी सावरल से भरा हुआ है.

फ़रिश्तों का सज़ा करना
हाडिसन में ज़ार का ज़िक्र है कि जब अयतुल कुरसी की तिलावत की जाती है तो फ़रिश्ते अल्लाह की बारगाह में झुककर उसकी तस्बीह और स्तुति करते हैं. यह आयत अल्लाह की महानता, उसकी कुदरत और उसकी बादशाहत की इमामत है, इसलिए इसे ईमान की हिफ़ाज़त और रहमत का ज़रिया माना गया है.

उलेमा का कहना है कि अयातुल कुरसी के बरकत से इंसान का दिल मजबूत होता है और ईमान रोशन रहता है. यह न केवल बुराई को दूर करता है बल्कि उसे अल्लाह की रहमत और ईश्वर से भर देता है. इसलिए इसे कुरान की सबसे अजीम आयत कहा गया है.

रोज़ की ज़िन्दगी में पढ़ने का राज़
अयातुल शहजादी शहंशाह की रोजमर्रा की जिंदगी में बेहद अद्भुत रचना है. नमाज़ के बाद, यात्रा पर यात्रा से पहले और सोने से पहले इसे एक आम रिवायत है. ऐसा माना जाता है कि यह बुद्धि दिल और दिमाग को परमात्मा देता है. यही वजह है कि अयातुल कुरसी दादी की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गई है और इसे रोजाना पढ़ना बेहद जरूरी माना जाता है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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