Astro Tips: क्या आपकी कुंडली में भी है 'भद्र राजयोग'? जानें कैसे पहचानें और ये आपके जीवन को कैसे बदल सकता है

Bhadra Rajyog: बुध 7 जुलाई 2026 को मिथुन राशि में प्रवेश कर चुके हैं इससे भद्र राजयोग का निर्माण हुआ है. बृहत्पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार भद्र राजयोग पंचमहापुरुष योग में से एक है. भद्र राजयोग जिसकी कुंडली में बनता है वह व्यक्ति सक्षम हो जाता है और उसे जीवन में संघर्ष नहीं करना पड़ता. श्रीराम और श्रीकृष्ण की कुंडली में पंचमहापुरुष राजयोग थे. ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास से जानते हैं क्या है भद्र राजयोग, इसे कैसे पहचाने, इससे मिलने वाले लाभ क्या हैं. क्या है भद्र राजयोग बृहत्पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार - स्वक्षेत्रे वा उच्चगे सौम्यः केन्द्रस्थो भद्रयोगकृत्. अर्थात-  जब बुध अपनी स्वराशि (मिथुन या कन्या) या उच्च राशि (कन्या) में होकर केंद्र भाव में स्थित होता है तब भद्र योग का निर्माण करता है. भद्र योग का वर्णन बृहत्पाराशर होरा शास्त्र, बृहत्जातक, फलदीपिका और जातक पारिजात में मिलता है. इन ग्रंथों में मुख्य रूप से यह बताया गया है कि भद्र योग बनने पर जातक के स्वभाव, व्यक्तित्व, बुद्धि, प्रतिष्ठा और ऐश्वर्य कैसे होते हैं. कुंडली में भद्र राजयोग को कैसे पहचाने भद्र राजयोग बुध ग्रह से बनता है. यदि आपकी कुंडली में बुध अपनी राशि मिथुन या कन्या में बैठा हो और लग्न या चंद्रमा से 1वें, 4वें, 7वें या 10वें भाव में स्थित हो, तो भद्र राजयोग बनता है. भद्र राजयोग सिर्फ बुध की राशि और भाव देखकर ही निश्चित नहीं किया जाता. इसका वास्तविक प्रभाव जानने के लिए नवांश कुंडली, बुध की शक्ति), दृष्टियां, युति, दशा-अंतर्दशा और पूरी जन्मकुंडली का भी विश्लेषण जरुरी होता है. भद्र राजयोग के लाभ जब भद्र राजयोग किसी कुंडली में बनता है, तो व्यक्ति कम उम्र में ही भाग्यशाली, सुखी, बुद्धिमान और व्यापक सोच, सहज स्वभाव का धनी होता है. उसमें कई भाषाओं का ज्ञान और विश्लेषण करने की क्षमता होती है. तर्कशक्ति और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है. लीडरशिप और बिजनेस को व्यापक रूप से बढ़ाने की क्षमता होती है. तार्किक शक्ति, चतुराई और वाणी भी अद्भुत रहती है. किन क्षेत्रों में फायदा भद्र राजयोग के शुभ प्रभाव से व्यक्ति शिक्षा, लेखन, पत्रकारिता, मीडिया, आईटी, बैंकिंग, कानून और व्यापार में सफलता पाता है. कौन-कौन से हैं पंचमहापुरुष राजयोग कुंडली में पंच महापुरुष मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि होते हैं. इनसे बनने वाले राजयोग हैं - मंगल का रुचक योग, बुध का भद्र योग, गुरु का हंस योग, शुक्र का माल्वय योग और शनि का शश योग. Varalakshmi Vrat 2026: वरलक्ष्मी व्रत कब ? दिवाली जितना खास दिन, नोट करें तारीख, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Jul 9, 2026 - 17:30
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Astro Tips: क्या आपकी कुंडली में भी है 'भद्र राजयोग'? जानें कैसे पहचानें और ये आपके जीवन को कैसे बदल सकता है

Bhadra Rajyog: बुध 7 जुलाई 2026 को मिथुन राशि में प्रवेश कर चुके हैं इससे भद्र राजयोग का निर्माण हुआ है. बृहत्पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार भद्र राजयोग पंचमहापुरुष योग में से एक है. भद्र राजयोग जिसकी कुंडली में बनता है वह व्यक्ति सक्षम हो जाता है और उसे जीवन में संघर्ष नहीं करना पड़ता.

श्रीराम और श्रीकृष्ण की कुंडली में पंचमहापुरुष राजयोग थे. ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास से जानते हैं क्या है भद्र राजयोग, इसे कैसे पहचाने, इससे मिलने वाले लाभ क्या हैं.

क्या है भद्र राजयोग

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार - स्वक्षेत्रे वा उच्चगे सौम्यः केन्द्रस्थो भद्रयोगकृत्.

अर्थात-  जब बुध अपनी स्वराशि (मिथुन या कन्या) या उच्च राशि (कन्या) में होकर केंद्र भाव में स्थित होता है तब भद्र योग का निर्माण करता है.

भद्र योग का वर्णन बृहत्पाराशर होरा शास्त्र, बृहत्जातक, फलदीपिका और जातक पारिजात में मिलता है. इन ग्रंथों में मुख्य रूप से यह बताया गया है कि भद्र योग बनने पर जातक के स्वभाव, व्यक्तित्व, बुद्धि, प्रतिष्ठा और ऐश्वर्य कैसे होते हैं.

कुंडली में भद्र राजयोग को कैसे पहचाने

भद्र राजयोग बुध ग्रह से बनता है. यदि आपकी कुंडली में बुध अपनी राशि मिथुन या कन्या में बैठा हो और लग्न या चंद्रमा से 1वें, 4वें, 7वें या 10वें भाव में स्थित हो, तो भद्र राजयोग बनता है.

भद्र राजयोग सिर्फ बुध की राशि और भाव देखकर ही निश्चित नहीं किया जाता. इसका वास्तविक प्रभाव जानने के लिए नवांश कुंडली, बुध की शक्ति), दृष्टियां, युति, दशा-अंतर्दशा और पूरी जन्मकुंडली का भी विश्लेषण जरुरी होता है.

भद्र राजयोग के लाभ

  • जब भद्र राजयोग किसी कुंडली में बनता है, तो व्यक्ति कम उम्र में ही भाग्यशाली, सुखी, बुद्धिमान और व्यापक सोच, सहज स्वभाव का धनी होता है.
  • उसमें कई भाषाओं का ज्ञान और विश्लेषण करने की क्षमता होती है.
  • तर्कशक्ति और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है.
  • लीडरशिप और बिजनेस को व्यापक रूप से बढ़ाने की क्षमता होती है.
  • तार्किक शक्ति, चतुराई और वाणी भी अद्भुत रहती है.

किन क्षेत्रों में फायदा

भद्र राजयोग के शुभ प्रभाव से व्यक्ति शिक्षा, लेखन, पत्रकारिता, मीडिया, आईटी, बैंकिंग, कानून और व्यापार में सफलता पाता है.

कौन-कौन से हैं पंचमहापुरुष राजयोग

कुंडली में पंच महापुरुष मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि होते हैं. इनसे बनने वाले राजयोग हैं - मंगल का रुचक योग, बुध का भद्र योग, गुरु का हंस योग, शुक्र का माल्वय योग और शनि का शश योग.

Varalakshmi Vrat 2026: वरलक्ष्मी व्रत कब ? दिवाली जितना खास दिन, नोट करें तारीख, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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