Ashwagandha Leaves Ban: अब दवाओं में इस्तेमाल नहीं होंगी अश्वगंधा की पत्तियां, जानें FSSAI ने इस पर क्यों लगाई रोक?
FSSAI New Health Supplement Rules: अश्वगंधा को लंबे समय से एक ऐसे प्राकृतिक उपाय के रूप में पेश किया जाता रहा है, जो तनाव कम करने से लेकर नींद सुधारने तक हर समस्या में मददगार माना जाता है. आयुर्वेद की यह पुरानी जड़ी-बूटी आज के दौर में वेलनेस इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा बन चुकी है. लेकिन अब इसी अश्वगंधा को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है, जिसने उपभोक्ताओं और सप्लीमेंट बनाने वाली कंपनियों दोनों को चौंका दिया है. क्या है मामला? FSSAI और आयुष मंत्रालय ने अश्वगंधा की पत्तियों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. हालांकि यह पूरी तरह से बैन नहीं है, बल्कि एक सीमित प्रतिबंध है. यानी अश्वगंधा के पूरे पौधे पर नहीं, सिर्फ उसकी पत्तियों के उपयोग पर रोक लगाई गई है. वहीं, इसकी जड़ का इस्तेमाल पहले की तरह जारी रहेगा. 16 अप्रैल को जारी आदेश में FSSAI ने राज्यों को सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर कोई कंपनी अश्वगंधा की पत्तियों या उनके एक्सट्रैक्ट का इस्तेमाल करती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए. इसके अलावा कंपनियों को अब यह भी स्पष्ट रूप से बताना होगा कि उनके प्रोडक्ट में पौधे का कौन-सा हिस्सा इस्तेमाल किया गया है. क्यों लिया गया यह फैसला? दरअसल, यह फैसला साइंटफिक रिसर्च के आधार पर लिया गया है. रिसर्च में पाया गया है कि अश्वगंधा की पत्तियों में विदेनोलाइड्स नाम के तत्व ज्यादा मात्रा में होते हैं, खासकर विदाफेरिन-ए, जो शरीर पर काफी असर डाल सकते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, इन तत्वों की अधिकता से लिवर को नुकसान, पेट से जुड़ी समस्याएं और यहां तक कि नर्वस सिस्टम पर भी असर पड़ सकता है. तेजी से बढ़ रहा अश्वगंधा का इस्तेमाल इसी संभावित खतरे को देखते हुए सरकार ने एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया है. खासतौर पर ऐसे समय में जब अश्वगंधा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और यह कैप्सूल, पाउडर और ड्रिंक्स के रूप में बाजार में आसानी से उपलब्ध है. दूसरी तरफ, अश्वगंधा की जड़ को सुरक्षित माना गया है. आयुर्वेद में सदियों से इसी हिस्से का इस्तेमाल होता आया है और आधुनिक रिसर्च भी इसे सही मात्रा में लेने पर सुरक्षित बताती है. इसलिए नियामक संस्थाओं ने जड़ आधारित उत्पादों को अनुमति दी हुई है. इसे भी पढ़ें - Imran Khan Wife Health Update: इमरान खान की बेगम बुशरा बीबी को हुआ 'रेटिनल डिटैचमेंट', जानें क्या है आंखों की यह गंभीर बीमारी? क्या मानते हैं एक्सपर्ट? विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला प्रिकॉशनरी एप्रोच का हिस्सा है, यानी जब तक पूरी तरह से सुरक्षित साबित न हो, तब तक संभावित जोखिम वाले तत्वों से दूरी रखना बेहतर है. डाइटिशियन कनिका मल्होत्रा ने indian express को बताया कि अश्वगंधा शरीर को तनाव से निपटने में मदद करता है, नींद सुधारता है और ऊर्जा बढ़ाने में सहायक होता है, लेकिन पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल सिर्फ जड़ के रूप में ही किया जाता रहा है. वहीं, डाइटिशियन गरिमा गोयल कहती हैं कि यह प्रतिबंध उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद है, क्योंकि अब कंपनियों को साफ-साफ बताना होगा कि वे किस हिस्से का उपयोग कर रही हैं. इससे लोगों को यह समझने में आसानी होगी कि वे क्या खा रहे हैं. इसे भी पढ़ें - Onion Health Benefits: पीएम मोदी भी जमकर खाते हैं प्याज, जानें इसके फायदे और नुकसान? Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
FSSAI New Health Supplement Rules: अश्वगंधा को लंबे समय से एक ऐसे प्राकृतिक उपाय के रूप में पेश किया जाता रहा है, जो तनाव कम करने से लेकर नींद सुधारने तक हर समस्या में मददगार माना जाता है. आयुर्वेद की यह पुरानी जड़ी-बूटी आज के दौर में वेलनेस इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा बन चुकी है. लेकिन अब इसी अश्वगंधा को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है, जिसने उपभोक्ताओं और सप्लीमेंट बनाने वाली कंपनियों दोनों को चौंका दिया है.
क्या है मामला?
FSSAI और आयुष मंत्रालय ने अश्वगंधा की पत्तियों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. हालांकि यह पूरी तरह से बैन नहीं है, बल्कि एक सीमित प्रतिबंध है. यानी अश्वगंधा के पूरे पौधे पर नहीं, सिर्फ उसकी पत्तियों के उपयोग पर रोक लगाई गई है. वहीं, इसकी जड़ का इस्तेमाल पहले की तरह जारी रहेगा. 16 अप्रैल को जारी आदेश में FSSAI ने राज्यों को सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर कोई कंपनी अश्वगंधा की पत्तियों या उनके एक्सट्रैक्ट का इस्तेमाल करती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए. इसके अलावा कंपनियों को अब यह भी स्पष्ट रूप से बताना होगा कि उनके प्रोडक्ट में पौधे का कौन-सा हिस्सा इस्तेमाल किया गया है.
क्यों लिया गया यह फैसला?
दरअसल, यह फैसला साइंटफिक रिसर्च के आधार पर लिया गया है. रिसर्च में पाया गया है कि अश्वगंधा की पत्तियों में विदेनोलाइड्स नाम के तत्व ज्यादा मात्रा में होते हैं, खासकर विदाफेरिन-ए, जो शरीर पर काफी असर डाल सकते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, इन तत्वों की अधिकता से लिवर को नुकसान, पेट से जुड़ी समस्याएं और यहां तक कि नर्वस सिस्टम पर भी असर पड़ सकता है.
तेजी से बढ़ रहा अश्वगंधा का इस्तेमाल
इसी संभावित खतरे को देखते हुए सरकार ने एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया है. खासतौर पर ऐसे समय में जब अश्वगंधा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और यह कैप्सूल, पाउडर और ड्रिंक्स के रूप में बाजार में आसानी से उपलब्ध है. दूसरी तरफ, अश्वगंधा की जड़ को सुरक्षित माना गया है. आयुर्वेद में सदियों से इसी हिस्से का इस्तेमाल होता आया है और आधुनिक रिसर्च भी इसे सही मात्रा में लेने पर सुरक्षित बताती है. इसलिए नियामक संस्थाओं ने जड़ आधारित उत्पादों को अनुमति दी हुई है.
इसे भी पढ़ें - Imran Khan Wife Health Update: इमरान खान की बेगम बुशरा बीबी को हुआ 'रेटिनल डिटैचमेंट', जानें क्या है आंखों की यह गंभीर बीमारी?
क्या मानते हैं एक्सपर्ट?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला प्रिकॉशनरी एप्रोच का हिस्सा है, यानी जब तक पूरी तरह से सुरक्षित साबित न हो, तब तक संभावित जोखिम वाले तत्वों से दूरी रखना बेहतर है. डाइटिशियन कनिका मल्होत्रा ने indian express को बताया कि अश्वगंधा शरीर को तनाव से निपटने में मदद करता है, नींद सुधारता है और ऊर्जा बढ़ाने में सहायक होता है, लेकिन पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल सिर्फ जड़ के रूप में ही किया जाता रहा है.
वहीं, डाइटिशियन गरिमा गोयल कहती हैं कि यह प्रतिबंध उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद है, क्योंकि अब कंपनियों को साफ-साफ बताना होगा कि वे किस हिस्से का उपयोग कर रही हैं. इससे लोगों को यह समझने में आसानी होगी कि वे क्या खा रहे हैं.
इसे भी पढ़ें - Onion Health Benefits: पीएम मोदी भी जमकर खाते हैं प्याज, जानें इसके फायदे और नुकसान?
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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