Apps को Activity Track करने दिया तो क्या होगा? जानें सच्चाई
Tech Tips: स्मार्टफोन ने लोगों की जिंदगी में अपनी एक अलग जगह बना ली है. लोगों के काम करने से लेकर मनोरंजन तक, अब स्मार्टफोन के जरिए सब कुछ संभव हो चुका है. लेकिन बढ़ती टेक्नोलॉजी के साथ ही स्मार्टफोन के साथ लोगों को प्राइवेसी का खतरा भी मंडराने लगा है. दरअसल, स्मार्टफोन में कई सारे ऐप्स मौजूद होते हैं. ऐसे में हम फोन पर क्या सर्च करते हैं, कौन-सी वेबसाइट खोलते हैं, किस जगह जाते हैं और किन चीजों में दिलचस्पी रखते हैं, इसकी जानकारी इन ऐप्स तक पहुंच सकती है. कई बार ऐप इंस्टॉल करते समय हम बिना ज्यादा सोचे-समझे Activity Tracking की परमिशन दे देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐप्स को एक्टिविटी ट्रैकिंग परमिशन देने के बाद क्या होता है. आइए जानते हैं कि इसकी पूरी सच्चाई. क्या होता है Activity Tracking? जानकारी के अनुसार, Activity Tracking का मतलब है कि कोई ऐप या सर्विस आपकी डिजिटल एक्टिविटी से जुड़ी जानकारी को रिकॉर्ड कर रही है. इस रिकॉर्ड में आप कौन सा ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं, कौन सी वेबसाइट विजिट कर रहे हैं, क्या सर्च कर रहे हैं जैसी सारी जानकारियां मौजूद रहती हैं. हालांकि, हर ऐप को आपकी पूरी एक्टिविटी की जानकारी मिले, ऐसा जरूरी नहीं है. ये इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कौन-सी परमिशन दी है और ऐप किस तरह का डेटा कलेक्ट करता है. आपकी पसंद का लगाया जाता है अंदाजा दरअसल, इस एक्टिविटी ट्रैकिंग की मदद से आपकी पसंद और नापसंद का भी अंदाजा लगाया जाता है. जैसे आपने ऑनलाइन किसी मोबाइल, जूते या होटल के बारे में कई बार सर्च किया. अगर अलग-अलग सर्विसेज के बीच आपकी एक्टिविटी से जुड़ा डेटा इस्तेमाल किया जा रहा है तो कंपनियां आपके पसंद का भी अंदाजा लगाती हैं. इसी आधार पर आपको भविष्य में उसी तरह के प्रोडक्ट या सर्विस के ऐड भी ज्यादा दिखाई देने लगते हैं. यानी आपने जिस चीज के बारे में सिर्फ जानकारी खोजी थी, वह आपकी डिजिटल प्रोफाइल का हिस्सा बन जाती है. ज्यादा पर्सनलाइज्ड हो सकते हैं विज्ञापन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Tracking का सबसे ज्यादा इस्तेमाल विज्ञापन को ज्यादा बेहतर बनाने के लिए किया जाता है. आपकी ऑनलाइन एक्टिविटी से ये समझा जाता है कि आपको क्या पसंद है और क्या नहीं. इसके बाद आपको आपकी डिजिटल फीड पर आपने जो हाल फिलहाल में सर्च किया हुआ होता है उसी से संबंधित विज्ञापन दिखाए जाते हैं. कई लोगों को यही वजह परेशान करती है कि वे किसी प्रोडक्ट की चर्चा या सर्च करने के बाद उससे जुड़े विज्ञापन अलग-अलग ऐप्स और वेबसाइटों पर देखने लगते हैं. Privacy पर पड़ता है असर इस फीचर से सबसे बड़ी चिंता यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर बनी रहती है. आपकी एक्टिविटी से जुड़ी जानकारी अगर कई सर्विसेज के जरिए प्रोसेस हो रही है तो आपकी ऑनलाइन आदतों की एक डिटेल्ड जानकारी तैयार हो जाती है. इसलिए किसी भी ऐप को Tracking की परमिशन देने से पहले ये समझना जरूरी है कि वह किस तरह का डेटा मांग रहा है और उसका इस्तेमाल किस मकसद से किया जा रहा है. यह भी पढ़ें: साल के अंत तक लॉन्च होगा BGMI Lite! जानें क्या होगा खास
Tech Tips: स्मार्टफोन ने लोगों की जिंदगी में अपनी एक अलग जगह बना ली है. लोगों के काम करने से लेकर मनोरंजन तक, अब स्मार्टफोन के जरिए सब कुछ संभव हो चुका है. लेकिन बढ़ती टेक्नोलॉजी के साथ ही स्मार्टफोन के साथ लोगों को प्राइवेसी का खतरा भी मंडराने लगा है. दरअसल, स्मार्टफोन में कई सारे ऐप्स मौजूद होते हैं. ऐसे में हम फोन पर क्या सर्च करते हैं, कौन-सी वेबसाइट खोलते हैं, किस जगह जाते हैं और किन चीजों में दिलचस्पी रखते हैं, इसकी जानकारी इन ऐप्स तक पहुंच सकती है.
कई बार ऐप इंस्टॉल करते समय हम बिना ज्यादा सोचे-समझे Activity Tracking की परमिशन दे देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐप्स को एक्टिविटी ट्रैकिंग परमिशन देने के बाद क्या होता है. आइए जानते हैं कि इसकी पूरी सच्चाई.
क्या होता है Activity Tracking?
जानकारी के अनुसार, Activity Tracking का मतलब है कि कोई ऐप या सर्विस आपकी डिजिटल एक्टिविटी से जुड़ी जानकारी को रिकॉर्ड कर रही है. इस रिकॉर्ड में आप कौन सा ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं, कौन सी वेबसाइट विजिट कर रहे हैं, क्या सर्च कर रहे हैं जैसी सारी जानकारियां मौजूद रहती हैं.
हालांकि, हर ऐप को आपकी पूरी एक्टिविटी की जानकारी मिले, ऐसा जरूरी नहीं है. ये इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कौन-सी परमिशन दी है और ऐप किस तरह का डेटा कलेक्ट करता है.
आपकी पसंद का लगाया जाता है अंदाजा
दरअसल, इस एक्टिविटी ट्रैकिंग की मदद से आपकी पसंद और नापसंद का भी अंदाजा लगाया जाता है. जैसे आपने ऑनलाइन किसी मोबाइल, जूते या होटल के बारे में कई बार सर्च किया. अगर अलग-अलग सर्विसेज के बीच आपकी एक्टिविटी से जुड़ा डेटा इस्तेमाल किया जा रहा है तो कंपनियां आपके पसंद का भी अंदाजा लगाती हैं.
इसी आधार पर आपको भविष्य में उसी तरह के प्रोडक्ट या सर्विस के ऐड भी ज्यादा दिखाई देने लगते हैं. यानी आपने जिस चीज के बारे में सिर्फ जानकारी खोजी थी, वह आपकी डिजिटल प्रोफाइल का हिस्सा बन जाती है.
ज्यादा पर्सनलाइज्ड हो सकते हैं विज्ञापन
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Tracking का सबसे ज्यादा इस्तेमाल विज्ञापन को ज्यादा बेहतर बनाने के लिए किया जाता है. आपकी ऑनलाइन एक्टिविटी से ये समझा जाता है कि आपको क्या पसंद है और क्या नहीं. इसके बाद आपको आपकी डिजिटल फीड पर आपने जो हाल फिलहाल में सर्च किया हुआ होता है उसी से संबंधित विज्ञापन दिखाए जाते हैं.
कई लोगों को यही वजह परेशान करती है कि वे किसी प्रोडक्ट की चर्चा या सर्च करने के बाद उससे जुड़े विज्ञापन अलग-अलग ऐप्स और वेबसाइटों पर देखने लगते हैं.
Privacy पर पड़ता है असर
इस फीचर से सबसे बड़ी चिंता यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर बनी रहती है. आपकी एक्टिविटी से जुड़ी जानकारी अगर कई सर्विसेज के जरिए प्रोसेस हो रही है तो आपकी ऑनलाइन आदतों की एक डिटेल्ड जानकारी तैयार हो जाती है.
इसलिए किसी भी ऐप को Tracking की परमिशन देने से पहले ये समझना जरूरी है कि वह किस तरह का डेटा मांग रहा है और उसका इस्तेमाल किस मकसद से किया जा रहा है.
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