5G के दौर में भी 4G की धूम, शिपमेंट में 3 पर्सेंट ग्रोथ ; जानें वजह

भारत में स्मार्टफोन खरीदने का ट्रेंड एक बार फिर थोड़ा बदलता नजर आ रहा है. जिस समय 5G फोन को नई टेक्नोलॉजी और बेहतर कनेक्टिविटी के तौर पर देखा जा रहा है, उसी समय 4G स्मार्टफोन की मांग में दोबारा तेजी आने लगी है. Counterpoint Research के मुताबिक, भारत में 4G स्मार्टफोन की शिपमेंट 2026 में सालाना आधार पर 3 फीसदी बढ़ सकती है. खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हो रही है, जब 2025 में 4G स्मार्टफोन शिपमेंट में 48 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी. तो आइए जानते हैं कि 5G के दौर में भी 4G की मांग क्यों बढ़ रही है.  4G स्मार्टफोन की हिस्सेदारी बढ़ेगी Counterpoint Research के अनुसार, भारतीय स्मार्टफोन बाजार में 4G की हिस्सेदारी 2025 में 11 फीसदी थी, जो 2026 में बढ़कर 13 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है. इसके बाद 2027 में 4G की हिस्सेदारी 15 फीसदी तक जाने की उम्मीद है. 4G अब सिर्फ बेहद सस्ते फोन तक सीमित नहीं रह रहा है, बल्कि इसका इस्तेमाल और मांग बजट सेगमेंट में भी बढ़ रही है.  5G के दौर में भी 4G की मांग क्यों बढ़ रही है? 4G की मांग बढ़ने की एक बड़ी वजह 4G और 5G स्मार्टफोन के बीच बढ़ता कीमत का अंतर है. महंगे कंपोनेंट्स की वजह से 5G फोन की कीमतें ऊपर जा रही हैं. ऐसे में ग्राहक कम कीमत में बेहतर स्पेसिफिकेशन और फीचर्स वाले फोन तलाश रहे हैं. इसका असर खासतौर पर दो सेगमेंट में दिखाई दे रहा है. 10,000 रुपये से कम कीमत वाले एंट्री सेगमेंट और 10,000 से 20,000 रुपये वाले बजट सेगमेंट में ग्राहक 5G के बजाय 4G फोन को ऑप्शन के तौर पर देख रहे हैं.  यह भी पढ़ें - क्यों बदला गया AI का नाम? ट्रंप को क्या थी इससे दिक्कत, जानें पूरा मामला 10 से 20 हजार रुपये वाले सेगमेंट में बढ़ी 4G की मौजूदगी बढ़ती मांग को देखते हुए स्मार्टफोन कंपनियां भी अपनी रणनीति बदल रही हैं. अब 4G मॉडल सिर्फ एंट्री-लेवल कैटेगरी तक सीमित नहीं हैं. कंपनियां 10,000 से 20,000 रुपये के बजट में भी 4G स्मार्टफोन पेश कर रही हैं. Counterpoint के मुताबिक, 2025 में इस प्राइस बैंड में 4G मॉडल पेश करने वाली कंपनियों की संख्या सिर्फ 2 थी, जो 2026 में अब तक बढ़कर 12 हो चुकी है.  4G को मिल रहा नया प्राइस-वैल्यू रोल 4G की रिकवरी अब केवल एंट्री-लेवल बाजार तक सीमित नहीं है. 10,000 से 20,000 रुपये वाला सेगमेंट भी इसके लिए जरूरी बन रहा है, जहां ग्राहक 5G की ज्यादा कीमत  बेहतर की जगह स्पेसिफिकेशन और एक्सपीरियंस को प्रेफरेंस दे रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपोनेंट की कीमतें जल्द सामान्य होने की संभावना कम है. ऐसे में 4G की भूमिका आगे भी बढ़ सकती है और 2027 तक इसकी हिस्सेदारी 15 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है. यह भी पढ़ें - हर साल iPhone बदलते हैं? खरीदना बेहतर या Lease पर लेना, जानें किसमें फायदा

Sep 30, 2026 - 21:30
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5G के दौर में भी 4G की धूम, शिपमेंट में 3 पर्सेंट ग्रोथ ; जानें वजह

भारत में स्मार्टफोन खरीदने का ट्रेंड एक बार फिर थोड़ा बदलता नजर आ रहा है. जिस समय 5G फोन को नई टेक्नोलॉजी और बेहतर कनेक्टिविटी के तौर पर देखा जा रहा है, उसी समय 4G स्मार्टफोन की मांग में दोबारा तेजी आने लगी है. Counterpoint Research के मुताबिक, भारत में 4G स्मार्टफोन की शिपमेंट 2026 में सालाना आधार पर 3 फीसदी बढ़ सकती है. खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हो रही है, जब 2025 में 4G स्मार्टफोन शिपमेंट में 48 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी. तो आइए जानते हैं कि 5G के दौर में भी 4G की मांग क्यों बढ़ रही है. 

4G स्मार्टफोन की हिस्सेदारी बढ़ेगी

Counterpoint Research के अनुसार, भारतीय स्मार्टफोन बाजार में 4G की हिस्सेदारी 2025 में 11 फीसदी थी, जो 2026 में बढ़कर 13 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है. इसके बाद 2027 में 4G की हिस्सेदारी 15 फीसदी तक जाने की उम्मीद है. 4G अब सिर्फ बेहद सस्ते फोन तक सीमित नहीं रह रहा है, बल्कि इसका इस्तेमाल और मांग बजट सेगमेंट में भी बढ़ रही है. 

5G के दौर में भी 4G की मांग क्यों बढ़ रही है?

4G की मांग बढ़ने की एक बड़ी वजह 4G और 5G स्मार्टफोन के बीच बढ़ता कीमत का अंतर है. महंगे कंपोनेंट्स की वजह से 5G फोन की कीमतें ऊपर जा रही हैं. ऐसे में ग्राहक कम कीमत में बेहतर स्पेसिफिकेशन और फीचर्स वाले फोन तलाश रहे हैं. इसका असर खासतौर पर दो सेगमेंट में दिखाई दे रहा है. 10,000 रुपये से कम कीमत वाले एंट्री सेगमेंट और 10,000 से 20,000 रुपये वाले बजट सेगमेंट में ग्राहक 5G के बजाय 4G फोन को ऑप्शन के तौर पर देख रहे हैं. 

यह भी पढ़ें - क्यों बदला गया AI का नाम? ट्रंप को क्या थी इससे दिक्कत, जानें पूरा मामला
 
10 से 20 हजार रुपये वाले सेगमेंट में बढ़ी 4G की मौजूदगी

बढ़ती मांग को देखते हुए स्मार्टफोन कंपनियां भी अपनी रणनीति बदल रही हैं. अब 4G मॉडल सिर्फ एंट्री-लेवल कैटेगरी तक सीमित नहीं हैं. कंपनियां 10,000 से 20,000 रुपये के बजट में भी 4G स्मार्टफोन पेश कर रही हैं. Counterpoint के मुताबिक, 2025 में इस प्राइस बैंड में 4G मॉडल पेश करने वाली कंपनियों की संख्या सिर्फ 2 थी, जो 2026 में अब तक बढ़कर 12 हो चुकी है. 

4G को मिल रहा नया प्राइस-वैल्यू रोल

4G की रिकवरी अब केवल एंट्री-लेवल बाजार तक सीमित नहीं है. 10,000 से 20,000 रुपये वाला सेगमेंट भी इसके लिए जरूरी बन रहा है, जहां ग्राहक 5G की ज्यादा कीमत  बेहतर की जगह स्पेसिफिकेशन और एक्सपीरियंस को प्रेफरेंस दे रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपोनेंट की कीमतें जल्द सामान्य होने की संभावना कम है. ऐसे में 4G की भूमिका आगे भी बढ़ सकती है और 2027 तक इसकी हिस्सेदारी 15 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है.

यह भी पढ़ें - हर साल iPhone बदलते हैं? खरीदना बेहतर या Lease पर लेना, जानें किसमें फायदा

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