Alcohol and Dementia Risk: शराब और डिमेंशिया का गहरा रिश्ता, नई स्टडी में खुलासा; कितना है सुरक्षित

Alcohol and Dementia Risk: आजकल के लोगों के लिए शराब पीना आम बात हो गई है. लेकिन हाल ही में हुई एक नई स्टडी ने इसे लेकर चेतावनी दी है. इस शोध के मुताबिक, किसी भी मात्रा में शराब पीना दिमाग पर नकारात्मक असर डाल सकता है और डिमेंशिया का खतरा बढ़ा सकता है. इससे पहले कई शोध यह कहते थे कि हल्का या मध्यम स्तर का शराब सेवन दिमाग के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन हालिया अध्ययन ने इस धारणा को पूरी तरह चुनौती दी है. शराब पीने से डिमेंशिया का खतरा यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. आन्या टोपीवाला का कहना है कि, हल्का या मध्यम शराब पीना भी डिमेंशिया के खतरे को बढ़ा सकता है. किसी भी स्तर पर शराब पीने से दिमाग पर नकारात्मक असर पड़ता है. हल्का या मध्यम सेवन भी सुरक्षित नहीं पूर्व में किए गए कुछ शोधों में यह कहा गया था कि हल्का और मध्यम शराब सेवन गैर-पेयकों की तुलना में डिमेंशिया के जोखिम को कम कर सकता है. लेकिन नई स्टडी ने जेनेटिक विश्लेषणों के आधार पर इसे पूरी तरह खारिज किया है. अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया कि जैविक या जेनेटिक रूप से शराब का सेवन बढ़ने पर डिमेंशिया का खतरा भी बढ़ता है, चाहे शराब हल्की मात्रा में ही क्यों न हो. ये भी पढ़े- Brain Fog After Lunch: लंच के बाद क्यों छा जाता है ब्रेन फॉग? जानें इससे बचने के आसान उपाय शराब पीने वालों को श्रेणियों में बांटा गया भारी पेय (Heavy drinkers): प्रति सप्ताह 40 या उससे अधिक ड्रिंक मध्यम पेय (Moderate drinkers): प्रति सप्ताह 7 से 14 ड्रिंक हल्का पेय (Light drinkers): प्रति सप्ताह 7 से कम ड्रिंक इन सभी श्रेणियों में डिमेंशिया का खतरा पाया गया. शोधकर्ताओं का कहना है कि भारी शराब पीने वालों में यह खतरा और अधिक होता है. शराब कम करना जरूरी शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि डिमेंशिया की रोकथाम के लिए जनसंख्या स्तर पर शराब की खपत कम करना बहुत जरूरी है. चाहे कोई हल्का, मध्यम या भारी पीता हो, जोखिम सभी के लिए मौजूद है यह संदेश खासकर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनमें शराब की लत का खतरा पहले से मौजूद है. हाल की स्टडी से स्पष्ट हो गया है कि शराब पीने की कोई सुरक्षित सीमा नहीं है. हल्का या मध्यम पीना भी दिमाग और स्मृति पर नकारात्मक असर डाल सकता है. अगर आप अपने दिमाग और स्मृति को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो शराब की खपत को नियंत्रित करना और आवश्यकता पड़ने पर पूरी तरह से छोड़ना ही सबसे सुरक्षित उपाय है. इसे भी पढ़ें- PM Modi Work Routine: 4 बार सीएम और 3 बार पीएम नरेंद्र मोदी नहीं ली एक भी छुट्टी, इसका सेहत पर क्या पड़ता है असर? Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Sep 27, 2025 - 14:30
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Alcohol and Dementia Risk: शराब और डिमेंशिया का गहरा रिश्ता, नई स्टडी में खुलासा; कितना है सुरक्षित

Alcohol and Dementia Risk: आजकल के लोगों के लिए शराब पीना आम बात हो गई है. लेकिन हाल ही में हुई एक नई स्टडी ने इसे लेकर चेतावनी दी है. इस शोध के मुताबिक, किसी भी मात्रा में शराब पीना दिमाग पर नकारात्मक असर डाल सकता है और डिमेंशिया का खतरा बढ़ा सकता है. इससे पहले कई शोध यह कहते थे कि हल्का या मध्यम स्तर का शराब सेवन दिमाग के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन हालिया अध्ययन ने इस धारणा को पूरी तरह चुनौती दी है.

शराब पीने से डिमेंशिया का खतरा

यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. आन्या टोपीवाला का कहना है कि, हल्का या मध्यम शराब पीना भी डिमेंशिया के खतरे को बढ़ा सकता है. किसी भी स्तर पर शराब पीने से दिमाग पर नकारात्मक असर पड़ता है.

हल्का या मध्यम सेवन भी सुरक्षित नहीं

पूर्व में किए गए कुछ शोधों में यह कहा गया था कि हल्का और मध्यम शराब सेवन गैर-पेयकों की तुलना में डिमेंशिया के जोखिम को कम कर सकता है. लेकिन नई स्टडी ने जेनेटिक विश्लेषणों के आधार पर इसे पूरी तरह खारिज किया है. अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया कि जैविक या जेनेटिक रूप से शराब का सेवन बढ़ने पर डिमेंशिया का खतरा भी बढ़ता है, चाहे शराब हल्की मात्रा में ही क्योंहो.

ये भी पढ़े- Brain Fog After Lunch: लंच के बाद क्यों छा जाता है ब्रेन फॉग? जानें इससे बचने के आसान उपाय

शराब पीने वालों को श्रेणियों में बांटा गया

  • भारी पेय (Heavy drinkers): प्रति सप्ताह 40 या उससे अधिक ड्रिंक
  • मध्यम पेय (Moderate drinkers): प्रति सप्ताह 7 से 14 ड्रिंक
  • हल्का पेय (Light drinkers): प्रति सप्ताह 7 से कम ड्रिंक
  • इन सभी श्रेणियों में डिमेंशिया का खतरा पाया गया. शोधकर्ताओं का कहना है कि भारी शराब पीने वालों में यह खतरा और अधिक होता है.

शराब कम करना जरूरी

शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि डिमेंशिया की रोकथाम के लिए जनसंख्या स्तर पर शराब की खपत कम करना बहुत जरूरी है. चाहे कोई हल्का, मध्यम या भारी पीता हो, जोखिम सभी के लिए मौजूद है यह संदेश खासकर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनमें शराब की लत का खतरा पहले से मौजूद है.

हाल की स्टडी से स्पष्ट हो गया है कि शराब पीने की कोई सुरक्षित सीमा नहीं है. हल्का या मध्यम पीना भी दिमाग और स्मृति पर नकारात्मक असर डाल सकता है. अगर आप अपने दिमाग और स्मृति को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो शराब की खपत को नियंत्रित करना और आवश्यकता पड़ने पर पूरी तरह से छोड़ना ही सबसे सुरक्षित उपाय है.

इसे भी पढ़ें- PM Modi Work Routine: 4 बार सीएम और 3 बार पीएम नरेंद्र मोदी नहीं ली एक भी छुट्टी, इसका सेहत पर क्या पड़ता है असर?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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