AIIMS Study: बिना मिर्गी के पड़ने वाले दौरों पर योग निद्रा कितनी असरदार? एम्स की नई रिसर्च ने चौंकाया
योग निद्रा को तनाव कम करने, अच्छी नींद लाने और मन को शांत रखने के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन क्या इससे उन लोगों को भी फायदा मिलता है, जिन्हें मिर्गी जैसे दौरे पड़ते हैं, जबकि उन्हें असल में मिर्गी नहीं होती? इसी सवाल का जवाब जानने के लिए एम्स (AIIMS) दिल्ली के न्यूरोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. मंजरी त्रिपाठी और उनकी टीम ने एक रिसर्च की. इस स्टडी की मुख्य लेखक डॉ. सारन्या बी. गोमाथी हैं. 50 मरीजों पर हुई इस स्टडी में पाया गया कि मरीजों की हालत में सुधार जरूर हुआ, लेकिन इलाज के साथ योग निद्रा कराने से कोई अलग फायदा नहीं मिला. यह रिसर्च अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल एपिलेप्सी एंड बिहेवियर(Epilepsy & Behavior) में प्रकाशित हुई है. योग निद्रा क्या है? योग निद्रा योग की एक ऐसी तकनीक है, जिसमें व्यक्ति आराम से लेटकर आंखें बंद करता है और प्रशिक्षक या ऑडियो के बताए निर्देशों का पालन करता है. इसमें सांस पर ध्यान दिया जाता है, शरीर को पूरी तरह आराम दिया जाता है और मन को शांत करने की कोशिश की जाती है. इसे तनाव, चिंता और नींद की समस्या कम करने में मददगार माना जाता है. किस बीमारी पर हुई रिसर्च? यह रिसर्च फंक्शनल डिसोसिएटिव सीजर्स (FDS) नाम की बीमारी पर की गई. इस बीमारी में मरीज को मिर्गी जैसे दौरे पड़ते हैं, लेकिन जांच में पता चलता है कि उसे मिर्गी नहीं है. यानी दौरे तो मिर्गी जैसे दिखते हैं, लेकिन उनकी वजह कुछ और होती है. इसी कारण कई बार मरीजों का लंबे समय तक मिर्गी समझकर इलाज चलता रहता है. इस बीमारी की सही पहचान वीडियो-ईईजी नाम की एक खास जांच से होती है. कैसे हुई स्टडी? जनवरी 2021 से फरवरी 2022 के बीच डॉक्टरों ने 72 मरीजों की जांच की. इनमें से 50 मरीजों को रिसर्च में शामिल किया गया. सबसे पहले सभी मरीजों को उनकी बीमारी के बारे में आसान भाषा में समझाया गया और काउंसलिंग दी गई. इसके बाद 25 मरीजों को योग निद्रा कराई गई, जबकि बाकी 25 मरीजों को उसी समय का एक सामान्य ऑडियो सुनाया गया, जिसमें योग निद्रा की मुख्य तकनीकें शामिल नहीं थीं. इसके बाद सभी मरीजों की छह महीने तक निगरानी की गई. रिसर्च में क्या पता चला? छह महीने बाद दोनों समूहों के मरीजों में अच्छा सुधार देखने को मिला. मरीजों को पहले के मुकाबले कम दौरे पड़े. उनकी चिंता और अवसाद भी कम हुआ और रोजमर्रा की जिंदगी पहले से बेहतर हुईए लेकिन जिन मरीजों ने योग निद्रा की, उन्हें दूसरे समूह की तुलना में कोई अलग फायदा नहीं मिला. यानी इलाज के साथ योग निद्रा जोड़ने से इस स्टडी में बेहतर नतीजे नहीं मिले. किन लोगों पर हुई स्टडी? स्टडी में शामिल ज्यादातर मरीज युवा महिलाएं थीं. करीब 66 फीसदी मरीजों का पहले मिर्गी समझकर इलाज किया जा चुका था. वहीं, ज्यादातर मरीजों ने पढ़ाई का दबाव, घरेलू तनाव या पारिवारिक समस्याओं जैसी बातों का जिक्र किया. आधे से ज्यादा मरीज चिंता और अवसाद जैसी मानसिक समस्याओं से भी जूझ रहे थे. डॉक्टरों ने क्या कहा? रिसर्च करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि इस स्टडी में योग निद्रा से कोई नुकसान या दुष्प्रभाव नहीं देखा गया. हालांकि, यह साबित नहीं हो सका कि इस बीमारी के इलाज में योग निद्रा जोड़ने से मरीजों को अलग से ज्यादा फायदा मिलता है. इसलिए इस विषय पर बड़े स्तर पर और लंबे समय तक रिसर्च किए जाने की जरूरत है. ये भी पढ़ें: सुबह उठते ही देखते हैं फोन? ये आदत बना देगी इस गंभीर बीमारी का मरीज, आज ही संभलें
योग निद्रा को तनाव कम करने, अच्छी नींद लाने और मन को शांत रखने के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन क्या इससे उन लोगों को भी फायदा मिलता है, जिन्हें मिर्गी जैसे दौरे पड़ते हैं, जबकि उन्हें असल में मिर्गी नहीं होती?
इसी सवाल का जवाब जानने के लिए एम्स (AIIMS) दिल्ली के न्यूरोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. मंजरी त्रिपाठी और उनकी टीम ने एक रिसर्च की. इस स्टडी की मुख्य लेखक डॉ. सारन्या बी. गोमाथी हैं. 50 मरीजों पर हुई इस स्टडी में पाया गया कि मरीजों की हालत में सुधार जरूर हुआ, लेकिन इलाज के साथ योग निद्रा कराने से कोई अलग फायदा नहीं मिला. यह रिसर्च अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल एपिलेप्सी एंड बिहेवियर(Epilepsy & Behavior) में प्रकाशित हुई है.
योग निद्रा क्या है?
योग निद्रा योग की एक ऐसी तकनीक है, जिसमें व्यक्ति आराम से लेटकर आंखें बंद करता है और प्रशिक्षक या ऑडियो के बताए निर्देशों का पालन करता है. इसमें सांस पर ध्यान दिया जाता है, शरीर को पूरी तरह आराम दिया जाता है और मन को शांत करने की कोशिश की जाती है. इसे तनाव, चिंता और नींद की समस्या कम करने में मददगार माना जाता है.
किस बीमारी पर हुई रिसर्च?
यह रिसर्च फंक्शनल डिसोसिएटिव सीजर्स (FDS) नाम की बीमारी पर की गई. इस बीमारी में मरीज को मिर्गी जैसे दौरे पड़ते हैं, लेकिन जांच में पता चलता है कि उसे मिर्गी नहीं है. यानी दौरे तो मिर्गी जैसे दिखते हैं, लेकिन उनकी वजह कुछ और होती है. इसी कारण कई बार मरीजों का लंबे समय तक मिर्गी समझकर इलाज चलता रहता है. इस बीमारी की सही पहचान वीडियो-ईईजी नाम की एक खास जांच से होती है.
कैसे हुई स्टडी?
जनवरी 2021 से फरवरी 2022 के बीच डॉक्टरों ने 72 मरीजों की जांच की. इनमें से 50 मरीजों को रिसर्च में शामिल किया गया. सबसे पहले सभी मरीजों को उनकी बीमारी के बारे में आसान भाषा में समझाया गया और काउंसलिंग दी गई. इसके बाद 25 मरीजों को योग निद्रा कराई गई, जबकि बाकी 25 मरीजों को उसी समय का एक सामान्य ऑडियो सुनाया गया, जिसमें योग निद्रा की मुख्य तकनीकें शामिल नहीं थीं. इसके बाद सभी मरीजों की छह महीने तक निगरानी की गई.
रिसर्च में क्या पता चला?
छह महीने बाद दोनों समूहों के मरीजों में अच्छा सुधार देखने को मिला. मरीजों को पहले के मुकाबले कम दौरे पड़े. उनकी चिंता और अवसाद भी कम हुआ और रोजमर्रा की जिंदगी पहले से बेहतर हुईए लेकिन जिन मरीजों ने योग निद्रा की, उन्हें दूसरे समूह की तुलना में कोई अलग फायदा नहीं मिला. यानी इलाज के साथ योग निद्रा जोड़ने से इस स्टडी में बेहतर नतीजे नहीं मिले.
किन लोगों पर हुई स्टडी?
स्टडी में शामिल ज्यादातर मरीज युवा महिलाएं थीं. करीब 66 फीसदी मरीजों का पहले मिर्गी समझकर इलाज किया जा चुका था. वहीं, ज्यादातर मरीजों ने पढ़ाई का दबाव, घरेलू तनाव या पारिवारिक समस्याओं जैसी बातों का जिक्र किया. आधे से ज्यादा मरीज चिंता और अवसाद जैसी मानसिक समस्याओं से भी जूझ रहे थे.
डॉक्टरों ने क्या कहा?
रिसर्च करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि इस स्टडी में योग निद्रा से कोई नुकसान या दुष्प्रभाव नहीं देखा गया. हालांकि, यह साबित नहीं हो सका कि इस बीमारी के इलाज में योग निद्रा जोड़ने से मरीजों को अलग से ज्यादा फायदा मिलता है. इसलिए इस विषय पर बड़े स्तर पर और लंबे समय तक रिसर्च किए जाने की जरूरत है.
ये भी पढ़ें: सुबह उठते ही देखते हैं फोन? ये आदत बना देगी इस गंभीर बीमारी का मरीज, आज ही संभलें
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