Abhinava gupta Jayanti 2026: शिवचार्य अभिनवगुप्त जयंती पर कश्मीर में श्रद्धा का संगम, एलजी मनोज सिन्हा ने रुद्राभिषेक में लिया हिस्सा
Abhinava gupta Jayanti 2026: कश्मीर की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित एक विशेष अवसर पर जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने गुरुवार को श्रीनगर के मैसुमा स्थित श्री आनंदिश्वर भैरव नाथ जी महाराज स्थान में आयोजित रुद्राभिषेक समारोह में भाग लिया. यह आयोजन शिवचार्य अभिनवगुप्त जयंती और निर्जला एकादशी के शुभ अवसर पर आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, धार्मिक नेताओं और स्थानीय समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया. इस अवसर पर लेफ्टिनेंट गवर्नर ने विधिवत पूजा-अर्चना की और पवित्र अनुष्ठानों में भाग लेकर प्रदेश तथा देश के सभी नागरिकों की शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की. समारोह का वातावरण वैदिक मंत्रोच्चार, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया. कौन थे शिवाचार्य अभिनवगुप्त? भारतीय दर्शन और कश्मीर शैववाद के इतिहास में शिवाचार्य अभिनवगुप्त का नाम बहुत सम्मान के साथ लिया जाता है. 10वीं और 11वीं शताब्दी के बीच (950-1016 ईस्वी) कश्मीर में जन्मे अभिनवगुप्त केवल एक दार्शनिक ही नहीं, बल्कि महान रहस्यवादी, साहित्यकार, सौंदर्यशास्त्री और आध्यात्मिक गुरु भी थे. उनका जन्म एक प्रतिष्ठित कश्मीरी ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनके पिता नरसिंहगुप्त एक प्रसिद्ध शैव विद्वान थे, जबकि उनकी माता विमलाकला भी विद्वानों और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़े परिवार से थीं. बचपन से ही अभिनवगुप्त को संस्कृत, तर्कशास्त्र, दर्शन और साहित्य की गहन शिक्षा प्राप्त हुई. एलजी मनोज सिन्हा ने बताई आज भी क्यों प्रासंगिक हैं शिवाचार्य अभिनवगुप्त के विचार? अपने संबोधन में लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने कहा कि अभिनवगुप्त की शिक्षाएं समय और सीमाओं से परे हैं. उन्होंने बताया कि दर्शन, सौंदर्यशास्त्र, साहित्य और आत्म-साक्षात्कार के क्षेत्र में उनका योगदान आज भी विश्वभर के विद्वानों, शोधकर्ताओं और आध्यात्मिक साधकों को प्रेरित करता है. एलजी ने कहा कि कश्मीर की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराएं और दार्शनिक विरासत भारत की सभ्यतागत पहचान को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं. अभिनवगुप्त की विचारधारा अद्वैत चेतना और आत्मज्ञान का ऐसा प्रकाश स्तंभ है, जो आधुनिक युग में भी मार्गदर्शन प्रदान करता है. कश्मीर शैव दर्शन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले महान आचार्य इतिहासकारों के अनुसार, अभिनवगुप्त ने अनेक गुरुओं से शिक्षा प्राप्त की थी, जिनमें लक्ष्मणगुप्त का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है. उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया और विभिन्न क्षेत्रों की यात्राएं कर ज्ञान अर्जित किया. उन्होंने केवल शैव दर्शन का ही नहीं, बल्कि बौद्ध और जैन दर्शन का भी गहन अध्ययन किया. उनकी रचनाएं धार्मिक अनुष्ठानों, तंत्र साहित्य, दार्शनिक ग्रंथों, स्तोत्रों, काव्यशास्त्र, नाट्यशास्त्र और सौंदर्यशास्त्र जैसे अनेक विषयों को समेटे हुए हैं. उनकी प्रसिद्ध कृतियां आज भी भारतीय दर्शन और साहित्य के अध्ययन का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती हैं. अभिनवगुप्त गुफा मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम शिवाचार्य अभिनवगुप्त जयंती के अवसर पर बडगाम जिले के बीरवाह स्थित प्रसिद्ध अभिनवगुप्त गुफा मंदिर में भी विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया. यहां सैकड़ों कश्मीरी पंडितों और श्रद्धालुओं ने पहुंचकर दर्शन किए और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, कहा जाता है कि अभिनवगुप्त ने इसी गुफा में प्रवेश कर स्वयं समाधि ग्रहण की थी. इस कारण यह स्थान उनके अनुयायियों के लिए काफी पवित्र माना जाता है. कश्मीर की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का आधार शिवाचार्य अभिनवगुप्त जयंती केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह कश्मीर की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत, सांस्कृतिक एकता और ज्ञान परंपरा का उत्सव भी है. उनकी शिक्षाएं आज भी आत्म-साक्षात्कार, सद्भाव और मानवीय मूल्यों की दिशा में लोगों को प्रेरित करती हैं. कश्मीर शैववाद के इस महान आचार्य की विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान, आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बनी हुई है. यह भी पढ़े- Gems Astrology: सिंह लग्न वाले सावधान! गलत रत्न पहनते ही भाग्य का साथ छोड़ सकते हैं ये ग्रह यह भी पढ़े- Signature Astrology: हस्ताक्षर में छिपे हैं आपके स्वभाव के राज, कहीं ये संकेत आपमें भी तो नहीं? Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Abhinava gupta Jayanti 2026: कश्मीर की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित एक विशेष अवसर पर जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने गुरुवार को श्रीनगर के मैसुमा स्थित श्री आनंदिश्वर भैरव नाथ जी महाराज स्थान में आयोजित रुद्राभिषेक समारोह में भाग लिया. यह आयोजन शिवचार्य अभिनवगुप्त जयंती और निर्जला एकादशी के शुभ अवसर पर आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, धार्मिक नेताओं और स्थानीय समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया.
इस अवसर पर लेफ्टिनेंट गवर्नर ने विधिवत पूजा-अर्चना की और पवित्र अनुष्ठानों में भाग लेकर प्रदेश तथा देश के सभी नागरिकों की शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की. समारोह का वातावरण वैदिक मंत्रोच्चार, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया.
कौन थे शिवाचार्य अभिनवगुप्त?
भारतीय दर्शन और कश्मीर शैववाद के इतिहास में शिवाचार्य अभिनवगुप्त का नाम बहुत सम्मान के साथ लिया जाता है. 10वीं और 11वीं शताब्दी के बीच (950-1016 ईस्वी) कश्मीर में जन्मे अभिनवगुप्त केवल एक दार्शनिक ही नहीं, बल्कि महान रहस्यवादी, साहित्यकार, सौंदर्यशास्त्री और आध्यात्मिक गुरु भी थे.
उनका जन्म एक प्रतिष्ठित कश्मीरी ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनके पिता नरसिंहगुप्त एक प्रसिद्ध शैव विद्वान थे, जबकि उनकी माता विमलाकला भी विद्वानों और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़े परिवार से थीं. बचपन से ही अभिनवगुप्त को संस्कृत, तर्कशास्त्र, दर्शन और साहित्य की गहन शिक्षा प्राप्त हुई.
एलजी मनोज सिन्हा ने बताई आज भी क्यों प्रासंगिक हैं शिवाचार्य अभिनवगुप्त के विचार?
अपने संबोधन में लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने कहा कि अभिनवगुप्त की शिक्षाएं समय और सीमाओं से परे हैं. उन्होंने बताया कि दर्शन, सौंदर्यशास्त्र, साहित्य और आत्म-साक्षात्कार के क्षेत्र में उनका योगदान आज भी विश्वभर के विद्वानों, शोधकर्ताओं और आध्यात्मिक साधकों को प्रेरित करता है.
एलजी ने कहा कि कश्मीर की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराएं और दार्शनिक विरासत भारत की सभ्यतागत पहचान को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं. अभिनवगुप्त की विचारधारा अद्वैत चेतना और आत्मज्ञान का ऐसा प्रकाश स्तंभ है, जो आधुनिक युग में भी मार्गदर्शन प्रदान करता है.
कश्मीर शैव दर्शन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले महान आचार्य
इतिहासकारों के अनुसार, अभिनवगुप्त ने अनेक गुरुओं से शिक्षा प्राप्त की थी, जिनमें लक्ष्मणगुप्त का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है. उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया और विभिन्न क्षेत्रों की यात्राएं कर ज्ञान अर्जित किया.
उन्होंने केवल शैव दर्शन का ही नहीं, बल्कि बौद्ध और जैन दर्शन का भी गहन अध्ययन किया. उनकी रचनाएं धार्मिक अनुष्ठानों, तंत्र साहित्य, दार्शनिक ग्रंथों, स्तोत्रों, काव्यशास्त्र, नाट्यशास्त्र और सौंदर्यशास्त्र जैसे अनेक विषयों को समेटे हुए हैं. उनकी प्रसिद्ध कृतियां आज भी भारतीय दर्शन और साहित्य के अध्ययन का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती हैं.
अभिनवगुप्त गुफा मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम
शिवाचार्य अभिनवगुप्त जयंती के अवसर पर बडगाम जिले के बीरवाह स्थित प्रसिद्ध अभिनवगुप्त गुफा मंदिर में भी विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया. यहां सैकड़ों कश्मीरी पंडितों और श्रद्धालुओं ने पहुंचकर दर्शन किए और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया.
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, कहा जाता है कि अभिनवगुप्त ने इसी गुफा में प्रवेश कर स्वयं समाधि ग्रहण की थी. इस कारण यह स्थान उनके अनुयायियों के लिए काफी पवित्र माना जाता है.
कश्मीर की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का आधार
शिवाचार्य अभिनवगुप्त जयंती केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह कश्मीर की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत, सांस्कृतिक एकता और ज्ञान परंपरा का उत्सव भी है. उनकी शिक्षाएं आज भी आत्म-साक्षात्कार, सद्भाव और मानवीय मूल्यों की दिशा में लोगों को प्रेरित करती हैं.
कश्मीर शैववाद के इस महान आचार्य की विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान, आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बनी हुई है.
यह भी पढ़े- Gems Astrology: सिंह लग्न वाले सावधान! गलत रत्न पहनते ही भाग्य का साथ छोड़ सकते हैं ये ग्रह
यह भी पढ़े- Signature Astrology: हस्ताक्षर में छिपे हैं आपके स्वभाव के राज, कहीं ये संकेत आपमें भी तो नहीं?
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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