714 करोड़ का ‘उम्र बढ़ाने वाला’ पेंटहाउस! क्या वास्तु शास्त्र में भी छिपा है लंबी आयु का रहस्य?

मियामी में समुद्र के किनारे बन रहा एक बेहद आलीशान पेंटहाउस इन दिनों दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है. दावा किया जा रहा है कि इस घर का डिजाइन केवल आरामदायक जीवन के लिए नहीं, बल्कि यहां रहने वाले लोगों की सेहत सुधारने और उनकी उम्र बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है. इसमें सर्केडियन लाइटिंग, शुद्ध हवा और पानी की व्यवस्था, मेडिटेशन स्पेस, सौना, कोल्ड प्लंज, फिटनेस स्टूडियो और हाइपरबेरिक ऑक्सीजन चैंबर जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं की बात कही जा रही है. इस प्रॉपर्टी को दुनिया का पहला ‘Human Optimization Residence’ बताया जा रहा है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि क्या किसी घर का डिजाइन वास्तव में व्यक्ति की उम्र बढ़ा सकता है? और यदि इस पेंटहाउस को भारतीय वास्तु शास्त्र की कसौटी पर परखा जाए तो इसका डिजाइन कितना प्रभावशाली दिखाई देता है? आइए जानते हैं- पेंटहाउस की कीमत चौंका देगी वायरल पोस्ट में इस पेंटहाउस की कीमत लगभग 714 करोड़ रुपये बताई गई है. हालांकि उपलब्ध प्रॉपर्टी रिपोर्ट के अनुसार मियामी के Rivage Bal Harbour स्थित इस खास ‘Ocean Penthouse’ की सूचीबद्ध कीमत 75 मिलियन डॉलर है. भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत लगभग 630 से 660 करोड़ रुपये के बीच बैठ सकती है. क्या घर में रहने से वास्तव में उम्र बढ़ सकती है? यह समझना जरूरी है कि किसी भी मकान में रहने मात्र से आयु बढ़ने का अभी कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है. इस पेंटहाउस को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यहां रहने वाला व्यक्ति बेहतर नींद ले सके, व्यायाम कर सके, स्वच्छ हवा में सांस ले और तनाव कम करने वाली गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर सके. ये सभी चीजें स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वहां रहने वाले व्यक्ति की उम्र निश्चित रूप से बढ़ ही जाएगी. लंबी और स्वस्थ आयु पर भोजन, व्यायाम, नींद, आनुवंशिक स्थिति, मानसिक स्वास्थ्य, चिकित्सा सुविधाओं और जीवनशैली जैसे अनेक चीजों का प्रभाव पड़ता है. इसलिए इसे ‘उम्र बढ़ाने वाला घर’ कहने के बजाय ‘स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने वाला घर’ कहना अधिक सही होगा. वास्तु शास्त्र भी घर और स्वास्थ्य को जोड़ता है भारतीय वास्तु शास्त्र में भवन को केवल ईंट, पत्थर और सजावट का ढांचा नहीं माना गया है. वास्तु के अनुसार घर में सूर्य का प्रकाश, वायु का प्रवाह, जल की दिशा, कमरों की स्थिति और पांच तत्त्वों का संतुलन वहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है. प्राचीन वास्तु परंपरा में कहा गया है कि जिस भवन में प्राकृतिक प्रकाश और स्वच्छ हवा का उचित प्रवेश हो, वहां रहने वाले लोगों को अधिक सकारात्मकता और मानसिक शांति महसूस होती है. आधुनिक वास्तुकला भी daylight, ventilation और indoor air quality को स्वस्थ जीवन के लिए महत्वपूर्ण मानती है. यही वह बिंदु है जहां मियामी के इस आधुनिक पेंटहाउस और भारतीय वास्तु शास्त्र की सोच एक-दूसरे के करीब आती दिखाई देती है. सी फेसिंग (Sea-facing) कब शुभ होता है ? पेंटहाउस की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसका सी फेसिंग है. इसकी ऊंची कांच की खिड़कियों से समुद्र, आकाश और प्राकृतिक प्रकाश साफ दिखाई देता है. वास्तु शास्त्र में जल तत्त्व को धन, अवसर, विचारों के प्रवाह और मानसिक संवेदनशीलता से जोड़ा जाता है. यदि समुद्र, स्विमिंग पूल या खुला जल क्षेत्र घर के उत्तर, उत्तर-पूर्व अथवा पूर्व दिशा में हो तो इसे सामान्यतः अनुकूल माना जाता है. पूर्व दिशा से आने वाला सूर्य का प्रकाश सक्रियता और स्वास्थ्य से संबंधित माना गया है, जबकि उत्तर और उत्तर-पूर्व का खुलापन समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है. लेकिन यदि घर का भारी जल क्षेत्र दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित हो तो वास्तु में इसे स्थिरता के लिए अच्छा नहीं माना जाता. इससे भावनात्मक अस्थिरता, निर्णय लेने में भ्रम या खर्च बढ़ने जैसी स्थितियों की आशंका बताई जाती है. इसलिए केवल समुद्र का सामने होना पर्याप्त नहीं है, उसकी दिशा जानना सबसे जरूरी है. इस घर की सबसे बड़ी ताकत क्या है ? इस पेंटहाउस में बड़ी-बड़ी खिड़कियां और सूर्योदय तथा सूर्यास्त देखने के लिए अलग-अलग टैरेस हैं. वास्तु में पूर्व दिशा को सूर्य की ऊर्जा का प्रमुख स्रोत माना गया है. यदि सुबह की रोशनी घर के अंदर प्रवेश करती है तो इसे स्वास्थ्य और प्रसन्नता के लिए शुभ माना जाता है. आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि सुबह का प्राकृतिक प्रकाश शरीर की जैविक घड़ी यानी circadian rhythm को व्यवस्थित करने में मदद कर सकता है. इससे व्यक्ति को रात में बेहतर नींद आने और दिन में अधिक सक्रिय रहने में सहायता मिल सकती है. पेंटहाउस में लगी सर्केडियन लाइटिंग दिन और रात के अनुसार प्रकाश का रंग तथा तीव्रता बदल सकती है. वास्तु के नजरिए से देखा जाए तो यह सूर्य की प्राकृतिक गति के साथ घर की दिनचर्या को जोड़ने का आधुनिक प्रयास माना जा सकता है. हवा और पानी की शुद्धता का वास्तु कनेक्शन इस पेंटहाउस में advanced air and water purification systems लगाए जाने की बात कही गई है. वास्तु शास्त्र में वायु को गति, संवाद और मानसिक सक्रियता से जोड़ा जाता है. घर में बासी हवा, सीलन, दुर्गंध और बंद कमरे नकारात्मक माने जाते हैं. आधुनिक दृष्टि से भी अच्छा वेंटिलेशन और एयर फिल्ट्रेशन घर के अंदर मौजूद कुछ प्रदूषकों को कम कर सकते हैं. हालांकि कोई भी एयर प्यूरीफायर सभी तरह के प्रदूषकों को पूरी तरह समाप्त नहीं करता. इसी तरह वास्तु में साफ जल को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. उत्तर-पूर्व में स्वच्छ जल का स्थान शुभ बताया गया है, जबकि गंदा या रुका हुआ पानी घर के वातावरण को खराब कर सकता है. इस प्रकार शुद्ध हवा और पानी की आधुनिक तकनीक वास्तु के मूल स्वच्छता सिद्धांतों से मेल खाती है. यह घर अमरता देने वाला कोई चमत्कारी भवन नहीं है. ह

Aug 5, 2026 - 02:30
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714 करोड़ का ‘उम्र बढ़ाने वाला’ पेंटहाउस! क्या वास्तु शास्त्र में भी छिपा है लंबी आयु का रहस्य?

मियामी में समुद्र के किनारे बन रहा एक बेहद आलीशान पेंटहाउस इन दिनों दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है.

दावा किया जा रहा है कि इस घर का डिजाइन केवल आरामदायक जीवन के लिए नहीं, बल्कि यहां रहने वाले लोगों की सेहत सुधारने और उनकी उम्र बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है.

इसमें सर्केडियन लाइटिंग, शुद्ध हवा और पानी की व्यवस्था, मेडिटेशन स्पेस, सौना, कोल्ड प्लंज, फिटनेस स्टूडियो और हाइपरबेरिक ऑक्सीजन चैंबर जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं की बात कही जा रही है.

इस प्रॉपर्टी को दुनिया का पहला ‘Human Optimization Residence’ बताया जा रहा है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि क्या किसी घर का डिजाइन वास्तव में व्यक्ति की उम्र बढ़ा सकता है? और यदि इस पेंटहाउस को भारतीय वास्तु शास्त्र की कसौटी पर परखा जाए तो इसका डिजाइन कितना प्रभावशाली दिखाई देता है? आइए जानते हैं-

पेंटहाउस की कीमत चौंका देगी

वायरल पोस्ट में इस पेंटहाउस की कीमत लगभग 714 करोड़ रुपये बताई गई है. हालांकि उपलब्ध प्रॉपर्टी रिपोर्ट के अनुसार मियामी के Rivage Bal Harbour स्थित इस खास ‘Ocean Penthouse’ की सूचीबद्ध कीमत 75 मिलियन डॉलर है. भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत लगभग 630 से 660 करोड़ रुपये के बीच बैठ सकती है.

क्या घर में रहने से वास्तव में उम्र बढ़ सकती है?

यह समझना जरूरी है कि किसी भी मकान में रहने मात्र से आयु बढ़ने का अभी कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है. इस पेंटहाउस को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यहां रहने वाला व्यक्ति बेहतर नींद ले सके, व्यायाम कर सके, स्वच्छ हवा में सांस ले और तनाव कम करने वाली गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर सके.

ये सभी चीजें स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वहां रहने वाले व्यक्ति की उम्र निश्चित रूप से बढ़ ही जाएगी. लंबी और स्वस्थ आयु पर भोजन, व्यायाम, नींद, आनुवंशिक स्थिति, मानसिक स्वास्थ्य, चिकित्सा सुविधाओं और जीवनशैली जैसे अनेक चीजों का प्रभाव पड़ता है.

इसलिए इसे ‘उम्र बढ़ाने वाला घर’ कहने के बजाय ‘स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने वाला घर’ कहना अधिक सही होगा.

वास्तु शास्त्र भी घर और स्वास्थ्य को जोड़ता है

भारतीय वास्तु शास्त्र में भवन को केवल ईंट, पत्थर और सजावट का ढांचा नहीं माना गया है. वास्तु के अनुसार घर में सूर्य का प्रकाश, वायु का प्रवाह, जल की दिशा, कमरों की स्थिति और पांच तत्त्वों का संतुलन वहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है.

प्राचीन वास्तु परंपरा में कहा गया है कि जिस भवन में प्राकृतिक प्रकाश और स्वच्छ हवा का उचित प्रवेश हो, वहां रहने वाले लोगों को अधिक सकारात्मकता और मानसिक शांति महसूस होती है. आधुनिक वास्तुकला भी daylight, ventilation और indoor air quality को स्वस्थ जीवन के लिए महत्वपूर्ण मानती है.

यही वह बिंदु है जहां मियामी के इस आधुनिक पेंटहाउस और भारतीय वास्तु शास्त्र की सोच एक-दूसरे के करीब आती दिखाई देती है.

सी फेसिंग (Sea-facing) कब शुभ होता है ?

पेंटहाउस की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसका सी फेसिंग है. इसकी ऊंची कांच की खिड़कियों से समुद्र, आकाश और प्राकृतिक प्रकाश साफ दिखाई देता है. वास्तु शास्त्र में जल तत्त्व को धन, अवसर, विचारों के प्रवाह और मानसिक संवेदनशीलता से जोड़ा जाता है.

यदि समुद्र, स्विमिंग पूल या खुला जल क्षेत्र घर के उत्तर, उत्तर-पूर्व अथवा पूर्व दिशा में हो तो इसे सामान्यतः अनुकूल माना जाता है. पूर्व दिशा से आने वाला सूर्य का प्रकाश सक्रियता और स्वास्थ्य से संबंधित माना गया है, जबकि उत्तर और उत्तर-पूर्व का खुलापन समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है.

लेकिन यदि घर का भारी जल क्षेत्र दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित हो तो वास्तु में इसे स्थिरता के लिए अच्छा नहीं माना जाता. इससे भावनात्मक अस्थिरता, निर्णय लेने में भ्रम या खर्च बढ़ने जैसी स्थितियों की आशंका बताई जाती है. इसलिए केवल समुद्र का सामने होना पर्याप्त नहीं है, उसकी दिशा जानना सबसे जरूरी है.

इस घर की सबसे बड़ी ताकत क्या है ?

इस पेंटहाउस में बड़ी-बड़ी खिड़कियां और सूर्योदय तथा सूर्यास्त देखने के लिए अलग-अलग टैरेस हैं. वास्तु में पूर्व दिशा को सूर्य की ऊर्जा का प्रमुख स्रोत माना गया है. यदि सुबह की रोशनी घर के अंदर प्रवेश करती है तो इसे स्वास्थ्य और प्रसन्नता के लिए शुभ माना जाता है.

आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि सुबह का प्राकृतिक प्रकाश शरीर की जैविक घड़ी यानी circadian rhythm को व्यवस्थित करने में मदद कर सकता है. इससे व्यक्ति को रात में बेहतर नींद आने और दिन में अधिक सक्रिय रहने में सहायता मिल सकती है.

पेंटहाउस में लगी सर्केडियन लाइटिंग दिन और रात के अनुसार प्रकाश का रंग तथा तीव्रता बदल सकती है. वास्तु के नजरिए से देखा जाए तो यह सूर्य की प्राकृतिक गति के साथ घर की दिनचर्या को जोड़ने का आधुनिक प्रयास माना जा सकता है.

हवा और पानी की शुद्धता का वास्तु कनेक्शन

इस पेंटहाउस में advanced air and water purification systems लगाए जाने की बात कही गई है. वास्तु शास्त्र में वायु को गति, संवाद और मानसिक सक्रियता से जोड़ा जाता है. घर में बासी हवा, सीलन, दुर्गंध और बंद कमरे नकारात्मक माने जाते हैं.

आधुनिक दृष्टि से भी अच्छा वेंटिलेशन और एयर फिल्ट्रेशन घर के अंदर मौजूद कुछ प्रदूषकों को कम कर सकते हैं. हालांकि कोई भी एयर प्यूरीफायर सभी तरह के प्रदूषकों को पूरी तरह समाप्त नहीं करता.

इसी तरह वास्तु में साफ जल को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. उत्तर-पूर्व में स्वच्छ जल का स्थान शुभ बताया गया है, जबकि गंदा या रुका हुआ पानी घर के वातावरण को खराब कर सकता है. इस प्रकार शुद्ध हवा और पानी की आधुनिक तकनीक वास्तु के मूल स्वच्छता सिद्धांतों से मेल खाती है.

यह घर अमरता देने वाला कोई चमत्कारी भवन नहीं है. हां, यह जरूर बताता है कि भविष्य के घर केवल सुंदर दिखाई देने के लिए नहीं, बल्कि नींद, शांति, स्वच्छ हवा, व्यायाम और मानसिक संतुलन को ध्यान में रखकर भी बनाए जाएंगे. वास्तु शास्त्र भी सदियों से इसी बात पर जोर देता आया है कि स्वस्थ घर वह है, जहां प्रकृति, दिशा, प्रकाश, वायु और मनुष्य के बीच संतुलन बना रहे.

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