33000 करोड़ रुपए दान करने वाले अरबपति की मौत, जीते जी लुटा दी पूरी दौलत, बोले थे- कंगाल होकर जाऊंगा
Denny Sanford Death: बिजनेसमैन, बैंकर और समाजसेवी टी. डेनी सैनफोर्ड (T. Denny Sanford) का 90 साल की उम्र में निधन हो गया. डेनी ने 18 जुलाई को अंतिम सांस ली. उन्होंने अपनी जिंदगी में 4 अरब डॉलर (करीब 34 हजार करोड़ रुपये) से ज्यादा का दान किया है. उनकी हमेशा यही सोच थी कि वो अपनी पूरी संपत्ति समाज के काम में लगा दें. आइये जानते हैं कौन थे डेनी सैनफोर्ड? डेनी की ये बात रहेगी हमेशा यादसाल 2007 में फोर्ब्स के साथ बात करते हुए डेनी ने कहा था कि, 'मैं चाहता हूं कि जब मेरी मौत हो, तब मेरे पास कोई पैसा न बचे. मैं जिंदगी को एक निवेशक की तरह देखता हूं. मेरा मानना है कि पैसा वहीं लगाना चाहिए, जहां उससे मुझे या समाज को सबसे ज्यादा फायदा मिले.' अपनी इस फिलोसॉफी के चलते उन्होंननें अरबों रुपये दान किए, लेकिन फिर भी इस साल मार्च तक उनकी सम्पत्ति करीब 2.4 अरब डॉलर थी. ये भी पढ़ें: Mutual Fund: सेबी ने आसान बनाए मौत के बाद क्लेम पाने के नियम, म्यूचुअल फंड ट्रांसफर का नया तरीका जानें कैसे हुई सफर की शुरुआत?टी. डेनी सैनफोर्ड का बचपन आसान नहीं था. चार साल की उम्र में उनकी मां का निधन हो गया था. आठ साल की उम्र से ही वो अपने पिता के कपड़ों के कारोबार में मदद करने लगे. बाद में उन्होंने फाइनेंस की दुनिया में करियर बनाया. साल 1986 में उन्होंने साउथ डकोटा के सिउक्स फॉल्स में एक छोटा बैंक खरीदा, जिसे बाद में फर्स्ट प्रीमियर बैंक के रूप में पहचान मिली. उनकी कंपनी प्रीमियर बैंकार्ड ने ऐसे लोगों को क्रेडिट कार्ड दिए, जिनका क्रेडिट रिकॉर्ड कमजोर था. इसी कारोबार ने उन्हें अरबपति बना दिया. दान देने से मिली पहचानसैनफोर्ड ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा समाज सेवा में लगाया. उन्होंने करीब 2 अरब डॉलर सिर्फ सैनफोर्ड हेल्थ को दिए. साल 2007 में उन्होंने इस हेल्थ सिस्टम को 40 करोड़ डॉलर का दान दिया, जो उस समय अमेरिका के किसी हेल्थ सिस्टम को मिला सबसे बड़ा एकमुश्त दान था. बाद में इसी संस्था का नाम बदलकर सैनफोर्ड हेल्थ रखा गया. स्वास्थ्य- शिक्षा को दिया बढ़ावाअपने दान के जरिए सैनफोर्ड ने स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, वैज्ञानिक रिसर्च और कई सामुदायिक परियोजनाओं को बढ़ावा दिया है. उन्होंने बिल्ड डकोटा स्कॉलरशिप्स, सैनफोर्ड अंडरग्राउंड रिसर्च फेसिलिटी, चिल्ड्रन्स होम सोसाइटी और कई अन्य संस्थानों को भी आर्थिकरूप से सशक्त बनाया था. ये भी पढ़ें: E20 Fuel: सरकार E20 पेट्रोल पर पीछे हटेगी या नहीं? संसद में बताया, एथेनॉल से खराब हो रही गाड़ियों पर क्या कहा?
Denny Sanford Death: बिजनेसमैन, बैंकर और समाजसेवी टी. डेनी सैनफोर्ड (T. Denny Sanford) का 90 साल की उम्र में निधन हो गया. डेनी ने 18 जुलाई को अंतिम सांस ली. उन्होंने अपनी जिंदगी में 4 अरब डॉलर (करीब 34 हजार करोड़ रुपये) से ज्यादा का दान किया है. उनकी हमेशा यही सोच थी कि वो अपनी पूरी संपत्ति समाज के काम में लगा दें. आइये जानते हैं कौन थे डेनी सैनफोर्ड?
डेनी की ये बात रहेगी हमेशा याद
साल 2007 में फोर्ब्स के साथ बात करते हुए डेनी ने कहा था कि, 'मैं चाहता हूं कि जब मेरी मौत हो, तब मेरे पास कोई पैसा न बचे. मैं जिंदगी को एक निवेशक की तरह देखता हूं. मेरा मानना है कि पैसा वहीं लगाना चाहिए, जहां उससे मुझे या समाज को सबसे ज्यादा फायदा मिले.' अपनी इस फिलोसॉफी के चलते उन्होंननें अरबों रुपये दान किए, लेकिन फिर भी इस साल मार्च तक उनकी सम्पत्ति करीब 2.4 अरब डॉलर थी.
ये भी पढ़ें: Mutual Fund: सेबी ने आसान बनाए मौत के बाद क्लेम पाने के नियम, म्यूचुअल फंड ट्रांसफर का नया तरीका जानें
कैसे हुई सफर की शुरुआत?
टी. डेनी सैनफोर्ड का बचपन आसान नहीं था. चार साल की उम्र में उनकी मां का निधन हो गया था. आठ साल की उम्र से ही वो अपने पिता के कपड़ों के कारोबार में मदद करने लगे. बाद में उन्होंने फाइनेंस की दुनिया में करियर बनाया. साल 1986 में उन्होंने साउथ डकोटा के सिउक्स फॉल्स में एक छोटा बैंक खरीदा, जिसे बाद में फर्स्ट प्रीमियर बैंक के रूप में पहचान मिली. उनकी कंपनी प्रीमियर बैंकार्ड ने ऐसे लोगों को क्रेडिट कार्ड दिए, जिनका क्रेडिट रिकॉर्ड कमजोर था. इसी कारोबार ने उन्हें अरबपति बना दिया.
दान देने से मिली पहचान
सैनफोर्ड ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा समाज सेवा में लगाया. उन्होंने करीब 2 अरब डॉलर सिर्फ सैनफोर्ड हेल्थ को दिए. साल 2007 में उन्होंने इस हेल्थ सिस्टम को 40 करोड़ डॉलर का दान दिया, जो उस समय अमेरिका के किसी हेल्थ सिस्टम को मिला सबसे बड़ा एकमुश्त दान था. बाद में इसी संस्था का नाम बदलकर सैनफोर्ड हेल्थ रखा गया.
स्वास्थ्य- शिक्षा को दिया बढ़ावा
अपने दान के जरिए सैनफोर्ड ने स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, वैज्ञानिक रिसर्च और कई सामुदायिक परियोजनाओं को बढ़ावा दिया है. उन्होंने बिल्ड डकोटा स्कॉलरशिप्स, सैनफोर्ड अंडरग्राउंड रिसर्च फेसिलिटी, चिल्ड्रन्स होम सोसाइटी और कई अन्य संस्थानों को भी आर्थिकरूप से सशक्त बनाया था.
ये भी पढ़ें: E20 Fuel: सरकार E20 पेट्रोल पर पीछे हटेगी या नहीं? संसद में बताया, एथेनॉल से खराब हो रही गाड़ियों पर क्या कहा?
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