30 के होते ही करा लेने चाहिए ये टेस्ट, बीमारी आने से पहले चल जाएगा पता
उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है. कई बीमारियां ऐसी होती हैं, जिनके शुरुआती दौर में कोई खास लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन जांच कराने पर उनके संकेत मिल सकते हैं. यही वजह है कि समय-समय पर सामान्य स्वास्थ्य जांच कराते रहना फायदेमंद माना जाता है. हालांकि हर व्यक्ति को 30 साल की उम्र में सभी टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती. उम्र के साथ-साथ परिवार में किसी बीमारी का इतिहास, वजन, खान-पान, जीवनशैली और पहले की स्वास्थ्य रिपोर्ट के आधार पर जांच की जरूरत अलग हो सकती है. कुछ सामान्य जांचों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनी नियमित स्वास्थ्य जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है. ब्लड प्रेशर जरूर चेक कराएं ब्लड प्रेशर बढ़ने पर शुरुआत में कई बार कोई साफ लक्षण नहीं दिखाई देता. इसलिए इसे सिर्फ तब चेक नहीं करना चाहिए, जब सिरदर्द या दूसरी परेशानी हो. स्वास्थ्य जांच के दौरान ब्लड प्रेशर की जांच कराना आसान तरीका है, जिससे बढ़े हुए दबाव का पता लगाया जा सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के वयस्कों में हाई ब्लड प्रेशर की स्क्रीनिंग की जानी चाहिए. अगर पहली जांच में ब्लड प्रेशर ज्यादा आता है तो डॉक्टर जरूरत के अनुसार दोबारा जांच या घर पर निगरानी की सलाह दे सकते हैं. कोलेस्ट्रॉल की जांच शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ा है या नहीं, इसका पता केवल जांच से ही चलता है क्योंकि हाई कोलेस्ट्रॉल में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते. इसके लिए साधारण खून की जांच यानी लिपिड प्रोफाइल कराई जाती है. CDC के अनुसार ज्यादातर स्वस्थ वयस्कों को सामान्य तौर पर हर 4 से 6 साल में कोलेस्ट्रॉल की जांच कराने की जरूरत हो सकती है, जबकि हृदय रोग, डायबिटीज या परिवार में हाई कोलेस्ट्रॉल का इतिहास होने पर जांच ज्यादा बार करानी पड़ सकती है. यह भी पढ़ें : एनालॉग पनीर को बैन क्यों करना चाहता है FSSAI, इससे कितना नुकसान? ब्लड शुगर और HbA1c पर भी रखें नजर ब्लड शुगर की जांच से शरीर में ग्लूकोज का स्तर पता चलता है, जबकि HbA1c पिछले कुछ महीनों में ब्लड शुगर के औसत स्तर की जानकारी देता है. हालांकि 30 साल की उम्र में हर व्यक्ति के लिए डायबिटीज की जांच जरूरी नहीं मानी जाती. उदाहरण के लिए USPSTF बिना लक्षण वाले 35 से 70 साल के ऐसे वयस्कों में प्रीडायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज की स्क्रीनिंग की सलाह देता है, जिनका वजन ज्यादा या मोटापा है. परिवार में डायबिटीज का इतिहास या अन्य जोखिम होने पर डॉक्टर इससे पहले भी जांच की सलाह दे सकते हैं. वजन और कमर की जांच को भी नजरअंदाज न करें सिर्फ वजन देखकर सेहत का अंदाजा लगाना सही नहीं है, लेकिन वजन और लंबाई से BMI निकाला जा सकता है, जिससे यह समझने में मदद मिलती है कि शरीर का वजन सामान्य सीमा में है या नहीं. इसके साथ कमर का घेरा भी देखा जा सकता है, क्योंकि पेट के आसपास ज्यादा चर्बी कई स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ी हो सकती है. अगर वजन तेजी से बढ़ रहा है, अचानक कम हो रहा है या शरीर में लगातार बदलाव महसूस हो रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है. बाकी टेस्ट जरूरत के हिसाब से कराएं 30 की उम्र में हर व्यक्ति को ECG, पूरे शरीर के स्कैन या हर तरह की जांच करवाने की जरूरत नहीं होती. कौन-सा टेस्ट जरूरी है, यह व्यक्ति की उम्र, लक्षण, परिवार की मेडिकल हिस्ट्री और दूसरे जोखिमों पर निर्भर करता है. इसलिए बिना जरूरत महंगे टेस्ट कराने के बजाय डॉक्टर से अपनी स्थिति के हिसाब से हेल्थ चेकअप की सूची पूछना बेहतर है. नियमित जांच का मकसद बीमारी ढूंढना भर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को समय रहते समझना भी है. यह भी पढ़ें : कार्डियोलॉजिस्ट ने बताई 4 आदतें, ऐसे रखें दिल का ख्याल
उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है. कई बीमारियां ऐसी होती हैं, जिनके शुरुआती दौर में कोई खास लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन जांच कराने पर उनके संकेत मिल सकते हैं. यही वजह है कि समय-समय पर सामान्य स्वास्थ्य जांच कराते रहना फायदेमंद माना जाता है. हालांकि हर व्यक्ति को 30 साल की उम्र में सभी टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती.
उम्र के साथ-साथ परिवार में किसी बीमारी का इतिहास, वजन, खान-पान, जीवनशैली और पहले की स्वास्थ्य रिपोर्ट के आधार पर जांच की जरूरत अलग हो सकती है. कुछ सामान्य जांचों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनी नियमित स्वास्थ्य जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है.
ब्लड प्रेशर जरूर चेक कराएं
ब्लड प्रेशर बढ़ने पर शुरुआत में कई बार कोई साफ लक्षण नहीं दिखाई देता. इसलिए इसे सिर्फ तब चेक नहीं करना चाहिए, जब सिरदर्द या दूसरी परेशानी हो. स्वास्थ्य जांच के दौरान ब्लड प्रेशर की जांच कराना आसान तरीका है, जिससे बढ़े हुए दबाव का पता लगाया जा सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के वयस्कों में हाई ब्लड प्रेशर की स्क्रीनिंग की जानी चाहिए. अगर पहली जांच में ब्लड प्रेशर ज्यादा आता है तो डॉक्टर जरूरत के अनुसार दोबारा जांच या घर पर निगरानी की सलाह दे सकते हैं.
कोलेस्ट्रॉल की जांच
शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ा है या नहीं, इसका पता केवल जांच से ही चलता है क्योंकि हाई कोलेस्ट्रॉल में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते. इसके लिए साधारण खून की जांच यानी लिपिड प्रोफाइल कराई जाती है. CDC के अनुसार ज्यादातर स्वस्थ वयस्कों को सामान्य तौर पर हर 4 से 6 साल में कोलेस्ट्रॉल की जांच कराने की जरूरत हो सकती है, जबकि हृदय रोग, डायबिटीज या परिवार में हाई कोलेस्ट्रॉल का इतिहास होने पर जांच ज्यादा बार करानी पड़ सकती है.
यह भी पढ़ें : एनालॉग पनीर को बैन क्यों करना चाहता है FSSAI, इससे कितना नुकसान?
ब्लड शुगर और HbA1c पर भी रखें नजर
ब्लड शुगर की जांच से शरीर में ग्लूकोज का स्तर पता चलता है, जबकि HbA1c पिछले कुछ महीनों में ब्लड शुगर के औसत स्तर की जानकारी देता है. हालांकि 30 साल की उम्र में हर व्यक्ति के लिए डायबिटीज की जांच जरूरी नहीं मानी जाती. उदाहरण के लिए USPSTF बिना लक्षण वाले 35 से 70 साल के ऐसे वयस्कों में प्रीडायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज की स्क्रीनिंग की सलाह देता है, जिनका वजन ज्यादा या मोटापा है. परिवार में डायबिटीज का इतिहास या अन्य जोखिम होने पर डॉक्टर इससे पहले भी जांच की सलाह दे सकते हैं.
वजन और कमर की जांच को भी नजरअंदाज न करें
सिर्फ वजन देखकर सेहत का अंदाजा लगाना सही नहीं है, लेकिन वजन और लंबाई से BMI निकाला जा सकता है, जिससे यह समझने में मदद मिलती है कि शरीर का वजन सामान्य सीमा में है या नहीं. इसके साथ कमर का घेरा भी देखा जा सकता है, क्योंकि पेट के आसपास ज्यादा चर्बी कई स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ी हो सकती है. अगर वजन तेजी से बढ़ रहा है, अचानक कम हो रहा है या शरीर में लगातार बदलाव महसूस हो रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.
बाकी टेस्ट जरूरत के हिसाब से कराएं
30 की उम्र में हर व्यक्ति को ECG, पूरे शरीर के स्कैन या हर तरह की जांच करवाने की जरूरत नहीं होती. कौन-सा टेस्ट जरूरी है, यह व्यक्ति की उम्र, लक्षण, परिवार की मेडिकल हिस्ट्री और दूसरे जोखिमों पर निर्भर करता है. इसलिए बिना जरूरत महंगे टेस्ट कराने के बजाय डॉक्टर से अपनी स्थिति के हिसाब से हेल्थ चेकअप की सूची पूछना बेहतर है. नियमित जांच का मकसद बीमारी ढूंढना भर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को समय रहते समझना भी है.
यह भी पढ़ें : कार्डियोलॉजिस्ट ने बताई 4 आदतें, ऐसे रखें दिल का ख्याल
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