2,3 या पांच... एक व्यक्ति को कितने बच्चे पैदा करने चाहिए, क्या कहते हैं डॉक्टर्स?

Family Planning for Parents: बच्चे परिवार की खुशियों का आधार होते हैं, लेकिन सवाल यह भी है कि आखिर एक परिवार को कितने बच्चे होने चाहिए? यह बहस केवल समाज तक ही सीमित नहीं है, बल्कि चिकित्सा जगत में भी इसका महत्व है. हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हर परिवार में कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए. वहीं डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चों की संख्या का निर्णय केवल परंपराओं और सामाजिक दबाव पर नहीं बल्कि शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखकर होना चाहिए. समाज और परंपराओं की सोच भारतीय समाज में लंबे समय तक बड़ा परिवार एक मजबूती की निशानी माना जाता रहा है. जितने हाथ, उतना काम जैसी कहावतों ने भी इस सोच को बढ़ावा दिया है. लेकिन बदलते दौर में जहां जीवनशैली तेज हो गई है और संसाधन सीमित हैं, वहां बड़े परिवार होना चुनौती बन जाता है. ये भी पढ़े- अदरक खाने से सिर्फ फायदा ही नहीं होता, नुकसान भी पहुंचाती है यह चीज! जान लें हर बात डॉक्टर क्या कहते हैं? डॉ. मृणालिनी मनोज का कहना है कि बच्चे पैदा करने का निर्णय हमेशा माता-पिता की शारीरिक क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य पर आधारित होना चाहिए. अगर मां का शरीर बार-बार गर्भधारण करने के लिए तैयार नहीं है तो यह उसके स्वास्थ्य और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. बहुत अधिक बच्चे पैदा करने से मां में एनीमिया, हार्मोनल असंतुलन और कमजोरी की समस्या बढ़ सकती है. पिता पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता है जिससे पारिवारिक रिश्तों पर असर पड़ सकता है. आर्थिक स्थिति का महत्व आज के समय में बच्चे की परवरिश केवल प्यार से नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, शिक्षा और सुविधाओं से जुड़ी है. डॉक्टरों का कहना है कि अगर माता-पिता अपनी आर्थिक स्थिति के हिसाब से बच्चों को बेहतर जीवन नहीं दे पा रहे, तो ज्यादा बच्चे पैदा करना उचित नहीं है. जनसंख्या और भविष्य की चुनौतियां भारत जैसे देश में पहले से ही जनसंख्या नियंत्रण एक बड़ा मुद्दा है. डॉक्टरों और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा बच्चे पैदा करने की सोच समाज को आने वाले समय में रोज़गार, संसाधनों की कमी और पर्यावरणीय समस्याओं की ओर धकेल सकती है. सही संतुलन क्या है? डॉक्टर्स का मानना है कि बच्चे कितने होने चाहिए इसका कोई फिक्स फॉर्मूला नहीं है. हर परिवार अपनी परिस्थिति, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति को देखते हुए फैसला ले. यदि माता-पिता दोनों स्वस्थ हैं और आर्थिक रूप से सक्षम हैं तो 2 या 3 बच्चे परिवार के लिए संतुलन बना सकते हैं. वहीं जिनकी आर्थिक या स्वास्थ्य संबंधी स्थिति कमजोर है, उन्हें कम बच्चे पैदा करने पर विचार करना चाहिए. इसे भी पढ़ें- Gen Z के लिए सैलरी से ज्यादा जरूरी वर्क-लाइफ बैलेंस, इस स्टडी में सामने आया सच Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Aug 29, 2025 - 11:30
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2,3 या पांच... एक व्यक्ति को कितने बच्चे पैदा करने चाहिए, क्या कहते हैं डॉक्टर्स?

Family Planning for Parents: बच्चे परिवार की खुशियों का आधार होते हैं, लेकिन सवाल यह भी है कि आखिर एक परिवार को कितने बच्चे होने चाहिए? यह बहस केवल समाज तक ही सीमित नहीं है, बल्कि चिकित्सा जगत में भी इसका महत्व है. हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हर परिवार में कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए. वहीं डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चों की संख्या का निर्णय केवल परंपराओं और सामाजिक दबाव पर नहीं बल्कि शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखकर होना चाहिए.

समाज और परंपराओं की सोच

भारतीय समाज में लंबे समय तक बड़ा परिवार एक मजबूती की निशानी माना जाता रहा है. जितने हाथ, उतना काम जैसी कहावतों ने भी इस सोच को बढ़ावा दिया है. लेकिन बदलते दौर में जहां जीवनशैली तेज हो गई है और संसाधन सीमित हैं, वहां बड़े परिवार होना चुनौती बन जाता है.

ये भी पढ़े- अदरक खाने से सिर्फ फायदा ही नहीं होता, नुकसान भी पहुंचाती है यह चीज! जान लें हर बात

डॉक्टर क्या कहते हैं?

डॉ. मृणालिनी मनोज का कहना है कि बच्चे पैदा करने का निर्णय हमेशा माता-पिता की शारीरिक क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य पर आधारित होना चाहिए. अगर मां का शरीर बार-बार गर्भधारण करने के लिए तैयार नहीं है तो यह उसके स्वास्थ्य और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. बहुत अधिक बच्चे पैदा करने से मां में एनीमिया, हार्मोनल असंतुलन और कमजोरी की समस्या बढ़ सकती है. पिता पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता है जिससे पारिवारिक रिश्तों पर असर पड़ सकता है.

आर्थिक स्थिति का महत्व

आज के समय में बच्चे की परवरिश केवल प्यार से नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, शिक्षा और सुविधाओं से जुड़ी है. डॉक्टरों का कहना है कि अगर माता-पिता अपनी आर्थिक स्थिति के हिसाब से बच्चों को बेहतर जीवन नहीं दे पा रहे, तो ज्यादा बच्चे पैदा करना उचित नहीं है.

जनसंख्या और भविष्य की चुनौतिया

भारत जैसे देश में पहले से ही जनसंख्या नियंत्रण एक बड़ा मुद्दा है. डॉक्टरों और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा बच्चे पैदा करने की सोच समाज को आने वाले समय में रोज़गार, संसाधनों की कमी और पर्यावरणीय समस्याओं की ओर धकेल सकती है.

सही संतुलन क्या है?

  • डॉक्टर्स का मानना है कि बच्चे कितने होने चाहिए इसका कोई फिक्स फॉर्मूला नहीं है. हर परिवार अपनी परिस्थिति, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति को देखते हुए फैसला ले.
  • यदि माता-पिता दोनों स्वस्थ हैं और आर्थिक रूप से सक्षम हैं तो 2 या 3 बच्चे परिवार के लिए संतुलन बना सकते हैं.
  • वहीं जिनकी आर्थिक या स्वास्थ्य संबंधी स्थिति कमजोर है, उन्हें कम बच्चे पैदा करने पर विचार करना चाहिए.

इसे भी पढ़ें- Gen Z के लिए सैलरी से ज्यादा जरूरी वर्क-लाइफ बैलेंस, इस स्टडी में सामने आया सच

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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