135 साल पुरानी लाइब्रेरी पर क्यों आया संकट? छात्रों को परेशान कर देगी यह खबर

दिल्ली के शास्त्री भवन में स्थित सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी देश की दूसरी सबसे बड़ी सरकारी लाइब्रेरी मानी जाती है. लेकिन अब सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत शास्त्री भवन की इस इमारत को गिराया जाना तय हुआ है. इसके चलते प्रशासन ने सितंबर के अंत तक सभी विभागों को शास्त्री भवन खाली करने का निर्देश दिया था. अन्य सरकारी दफ्तरों को तो नई जगह शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी को शिफ्ट करने के लिए अब तक कोई परमानेंट या पर्याप्त जगह नहीं मिल पाई है. लगभग 135 साल पुरानी इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी के पास अब अपना कोई नया ठिकाना नहीं है, जिसकी वजह से इसमें रखी लाखों अनमोल और दुर्लभ किताबों के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है. यह खबर उन हजारों छात्रों और शोधकर्ताओं को बड़ा झटका दे सकती है, जो अपनी पढ़ाई और रिसर्च के लिए हर दिन इस लाइब्रेरी पर निर्भर रहते हैं. 8.5 लाख से अधिक किताबों के बेघर होने का खतरा यह संकट इसलिए और बड़ा हो जाता है क्योंकि इस चार मंजिला लाइब्रेरी का आकार करीब 5,500 वर्ग मीटर में फैला हुआ है. इस विशाल परिसर में 8.5 लाख से भी अधिक किताबें, दुर्लभ दस्तावेज और ऐतिहासिक सरकारी रिकॉर्ड मौजूद हैं. ब्रिटिश काल से लेकर आज तक के आजाद भारत के सरकारी कामकाज और इतिहास के दस्तावेज यहां सुरक्षित रखे गए हैं. इतनी बड़ी संख्या में किताबों और भारी-भरकम रिकॉर्ड को सुरक्षित तरीके से किसी दूसरी जगह पर रखने के लिए जितनी बड़ी जगह की जरूरत है, उतनी जगह का इंतजाम फिलहाल नहीं हो पाया है. यह भी पढ़ें: NCERT की 9वीं की किताब में सेंगोल की एंट्री, चोल काल से जोड़ा इतिहास  छात्रों की पढ़ाई पर पड़ेगा सीधा असर इस लाइब्रेरी का इस्तेमाल सिर्फ सरकारी अधिकारी ही नहीं करते, बल्कि UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले सैकड़ों छात्र हर दिन यहां आकर पढ़ाई करते हैं. शांत माहौल और हर विषय की किताबों की उपलब्धता के कारण यह जगह छात्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी. अब लाइब्रेरी के बंद होने या बिना किसी निश्चित ठिकाने के शिफ्ट होने से छात्रों की रोज की पढ़ाई पूरी तरह बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है. हालांकि, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की तरफ से नई जगह की तलाश की बातें कही जा रही हैं, लेकिन जब तक कोई पक्की और सुरक्षित जगह तय नहीं हो जाती, तब तक इस 135 साल पुरानी लाइब्रेरी के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी. छात्रों और विशेषज्ञों का यही कहना है कि सरकार को इस ऐतिहासिक खजाने को सुरक्षित रखने के लिए जल्द से जल्द कोई ठोस कदम उठाना चाहिए. यह भी पढ़ें: भारत के किस राज्य में सबसे ज्यादा खुदकुशी करते हैं छात्र? यहां जानें

Oct 2, 2026 - 14:30
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135 साल पुरानी लाइब्रेरी पर क्यों आया संकट? छात्रों को परेशान कर देगी यह खबर

दिल्ली के शास्त्री भवन में स्थित सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी देश की दूसरी सबसे बड़ी सरकारी लाइब्रेरी मानी जाती है. लेकिन अब सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत शास्त्री भवन की इस इमारत को गिराया जाना तय हुआ है. इसके चलते प्रशासन ने सितंबर के अंत तक सभी विभागों को शास्त्री भवन खाली करने का निर्देश दिया था. अन्य सरकारी दफ्तरों को तो नई जगह शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी को शिफ्ट करने के लिए अब तक कोई परमानेंट या पर्याप्त जगह नहीं मिल पाई है.

लगभग 135 साल पुरानी इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी के पास अब अपना कोई नया ठिकाना नहीं है, जिसकी वजह से इसमें रखी लाखों अनमोल और दुर्लभ किताबों के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है. यह खबर उन हजारों छात्रों और शोधकर्ताओं को बड़ा झटका दे सकती है, जो अपनी पढ़ाई और रिसर्च के लिए हर दिन इस लाइब्रेरी पर निर्भर रहते हैं.

8.5 लाख से अधिक किताबों के बेघर होने का खतरा

यह संकट इसलिए और बड़ा हो जाता है क्योंकि इस चार मंजिला लाइब्रेरी का आकार करीब 5,500 वर्ग मीटर में फैला हुआ है. इस विशाल परिसर में 8.5 लाख से भी अधिक किताबें, दुर्लभ दस्तावेज और ऐतिहासिक सरकारी रिकॉर्ड मौजूद हैं.

ब्रिटिश काल से लेकर आज तक के आजाद भारत के सरकारी कामकाज और इतिहास के दस्तावेज यहां सुरक्षित रखे गए हैं. इतनी बड़ी संख्या में किताबों और भारी-भरकम रिकॉर्ड को सुरक्षित तरीके से किसी दूसरी जगह पर रखने के लिए जितनी बड़ी जगह की जरूरत है, उतनी जगह का इंतजाम फिलहाल नहीं हो पाया है.

यह भी पढ़ें: NCERT की 9वीं की किताब में सेंगोल की एंट्री, चोल काल से जोड़ा इतिहास 

छात्रों की पढ़ाई पर पड़ेगा सीधा असर

इस लाइब्रेरी का इस्तेमाल सिर्फ सरकारी अधिकारी ही नहीं करते, बल्कि UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले सैकड़ों छात्र हर दिन यहां आकर पढ़ाई करते हैं. शांत माहौल और हर विषय की किताबों की उपलब्धता के कारण यह जगह छात्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी. अब लाइब्रेरी के बंद होने या बिना किसी निश्चित ठिकाने के शिफ्ट होने से छात्रों की रोज की पढ़ाई पूरी तरह बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है.

हालांकि, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की तरफ से नई जगह की तलाश की बातें कही जा रही हैं, लेकिन जब तक कोई पक्की और सुरक्षित जगह तय नहीं हो जाती, तब तक इस 135 साल पुरानी लाइब्रेरी के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी. छात्रों और विशेषज्ञों का यही कहना है कि सरकार को इस ऐतिहासिक खजाने को सुरक्षित रखने के लिए जल्द से जल्द कोई ठोस कदम उठाना चाहिए.

यह भी पढ़ें: भारत के किस राज्य में सबसे ज्यादा खुदकुशी करते हैं छात्र? यहां जानें

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