117 साल पुराना सफर खत्म, बंद होने की कगार पर कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज; SEBI की मंजूरी का इंतजार

Calcutta Stock Exchange: देश के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज में से एक कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज (CSE) की आज आखिरी दिवाली है. लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई और कई रेगुलेटरी चुनौतियों के बाद आखिरकार CSE स्वैच्छिक रूप से स्टॉक एक्सचेंज बिजनेस से निकलने का फैसला कर लिया है. साल 2013 में भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड (SEBI) ने नियमों का पालन न होने के कारण CSE में ट्रेडिंग पर रोक लगा दी थी. एक दशक से भी ज्यादा समय तक एक्सचेंज ने अपना ऑपरेशन फिर से शुरू करने के लिए सेबी के फैसले को अदालत में चुनौती देने की कोशिश की थी, लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया. आखिरकार इसने अपने स्टॉक एक्सचेंज कारोबार को बंद करने का फैसला किया.  अब बस सेबी की मंजूरी का इंतजार CSE के चेयरमैन दीपांकर बोस ने कहा, "शेयरहोल्डर्स के साथ हुई 25 अप्रैल, 2025 को हुई असाधारण आम बैठक (EGM) में CSE को स्टॉक एक्सचेंज कारोबार से बाहर निकलने की मंजूरी भी मिल गई.'' एक्सचेंज ने 18 फरवरी, 2025 को औपचारिक रूप से सेबी के पास भी एग्जिट आवदेन दाखिल कराया था. सेबी ने इसके मूल्यांकन के लिए राजवंशी एंड एसोसिएट्स (Rajvanshi and Associate) को नियुक्त किया. अब पूरी समीक्षा के बाद ही मंजूरी दी जाएगी.  CSE की संपत्तियों की बिक्री मंजूरी मिलने के बाद CSE एक होल्डिंग कंपनी के रूप में बनी रहेगी. हालांकि, इसकी सब्सिडियरी कंपनी CSE कैपिटल मार्केट्स प्राइवेट लिमिटेड (CCMPL) एनएसई और बीएसई पर ब्रोकिंग जारी रखेगी. एग्जिट प्रॉसेस के तहत सेबी ने CSE ने कोलकाता में EM बाईपास की तीन एकड़ की संपत्ति को 253 करोड़ रुपये में सृजन ग्रुप को बेचने की भी मंजूरी दे दी है. हालांकि, सेबी से फाइनल अप्रूवल मिलने के बाद ही सौदा पूरा किया जाएगा. इतना ही नहीं, CSE ने अपने कर्मचारियों के लिए वॉलंटरी रिटायरमेंट स्कीम (VRS) भी शुरू कर दी है.  कैसे गड़बड़ाया मामला? 1908 में स्थापित कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज का पतन 120 करोड़ रुपये के केतन पारेख से जुड़े घोटाले के बाद शुरू हुआ. नहीं, तो इससे पहले यह बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बड़ा प्रतिद्वंदी था. इसके बाद कई ब्रोकर सेटलमेंट से चूक गए, जिससे निवेशकों का भरोसा कम हुआ. इससे एक्सचेंज की गतिविधियां लगातार कम होती गई, ट्रेडिंग वॉल्यूम भी घटता गया. दिसंबर 2024 में CSE बोर्ड ने कलकत्ता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अपने मामलों को वापस लेने और स्वैच्छिक निकासी की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया. चेयरमैन बोस की FY25 रिपोर्ट में बताया गया, एक्सचेंज ने 1749 लिस्टेड कंपनियों और  650 रजिस्टर्ड मेंबर के साथ भारत के पूंजी बाजारों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. एक्सचेंज से बाहर निकलने की तैयारी में CSE ने सभी कर्मचारियों के लिए एक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना की पेशकश की, जिसमें 20.95 करोड़ रुपये का एकमुश्त भुगतान और लगभग 10 करोड़ रुपये की एनुअल सेविंग्स भी शामिल रही.  ये भी पढ़ें: Silver Demand in India: दुनियाभर में खत्म हो रहे चांदी के स्टॉक, भारत में चांदी की तेज डिमांड से हिला ग्लोबल मार्केट 

Oct 20, 2025 - 14:30
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117 साल पुराना सफर खत्म, बंद होने की कगार पर कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज; SEBI की मंजूरी का इंतजार

Calcutta Stock Exchange: देश के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज में से एक कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज (CSE) की आज आखिरी दिवाली है. लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई और कई रेगुलेटरी चुनौतियों के बाद आखिरकार CSE स्वैच्छिक रूप से स्टॉक एक्सचेंज बिजनेस से निकलने का फैसला कर लिया है.

साल 2013 में भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड (SEBI) ने नियमों का पालन न होने के कारण CSE में ट्रेडिंग पर रोक लगा दी थी. एक दशक से भी ज्यादा समय तक एक्सचेंज ने अपना ऑपरेशन फिर से शुरू करने के लिए सेबी के फैसले को अदालत में चुनौती देने की कोशिश की थी, लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया. आखिरकार इसने अपने स्टॉक एक्सचेंज कारोबार को बंद करने का फैसला किया. 

अब बस सेबी की मंजूरी का इंतजार

CSE के चेयरमैन दीपांकर बोस ने कहा, "शेयरहोल्डर्स के साथ हुई 25 अप्रैल, 2025 को हुई असाधारण आम बैठक (EGM) में CSE को स्टॉक एक्सचेंज कारोबार से बाहर निकलने की मंजूरी भी मिल गई.'' एक्सचेंज ने 18 फरवरी, 2025 को औपचारिक रूप से सेबी के पास भी एग्जिट आवदेन दाखिल कराया था. सेबी ने इसके मूल्यांकन के लिए राजवंशी एंड एसोसिएट्स (Rajvanshi and Associate) को नियुक्त किया. अब पूरी समीक्षा के बाद ही मंजूरी दी जाएगी. 

CSE की संपत्तियों की बिक्री

मंजूरी मिलने के बाद CSE एक होल्डिंग कंपनी के रूप में बनी रहेगी. हालांकि, इसकी सब्सिडियरी कंपनी CSE कैपिटल मार्केट्स प्राइवेट लिमिटेड (CCMPL) एनएसई और बीएसई पर ब्रोकिंग जारी रखेगी. एग्जिट प्रॉसेस के तहत सेबी ने CSE ने कोलकाता में EM बाईपास की तीन एकड़ की संपत्ति को 253 करोड़ रुपये में सृजन ग्रुप को बेचने की भी मंजूरी दे दी है. हालांकि, सेबी से फाइनल अप्रूवल मिलने के बाद ही सौदा पूरा किया जाएगा. इतना ही नहीं, CSE ने अपने कर्मचारियों के लिए वॉलंटरी रिटायरमेंट स्कीम (VRS) भी शुरू कर दी है. 

कैसे गड़बड़ाया मामला?

1908 में स्थापित कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज का पतन 120 करोड़ रुपये के केतन पारेख से जुड़े घोटाले के बाद शुरू हुआ. नहीं, तो इससे पहले यह बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बड़ा प्रतिद्वंदी था. इसके बाद कई ब्रोकर सेटलमेंट से चूक गए, जिससे निवेशकों का भरोसा कम हुआ. इससे एक्सचेंज की गतिविधियां लगातार कम होती गई, ट्रेडिंग वॉल्यूम भी घटता गया.

दिसंबर 2024 में CSE बोर्ड ने कलकत्ता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अपने मामलों को वापस लेने और स्वैच्छिक निकासी की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया. चेयरमैन बोस की FY25 रिपोर्ट में बताया गया, एक्सचेंज ने 1749 लिस्टेड कंपनियों और  650 रजिस्टर्ड मेंबर के साथ भारत के पूंजी बाजारों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

एक्सचेंज से बाहर निकलने की तैयारी में CSE ने सभी कर्मचारियों के लिए एक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना की पेशकश की, जिसमें 20.95 करोड़ रुपये का एकमुश्त भुगतान और लगभग 10 करोड़ रुपये की एनुअल सेविंग्स भी शामिल रही. 

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