हिंद महासागर में बढ़ती ड्रैगन की हलचल, एक्सपर्ट्स ने भारत को दी चेतावनी! कहा- '5 एयरक्राफ्ट कैरियर तैयार करें'

भारत इस समय ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां सुरक्षा का दायरा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है. अब खतरे समुद्र की गहराइयों में भी छिपे हैं. हाल के वर्षों में भारत तीन बार युद्ध जैसी स्थितियों का सामना कर चुका है. दो बार पाकिस्तान और एक बार चीन के साथ. अब जो खतरा सामने आ रहा है, वह समुद्र से जुड़ा है, जहां चीन लगातार अपनी शक्ति बढ़ा रहा है और भारत के सामरिक संतुलन को चुनौती दे रहा है. हिंद महासागर में चीन का प्रभाव तेजी से फैल रहा है. उसकी स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स नीति के तहत उसने ऐसे बंदरगाह विकसित कर लिए हैं, जो भारत के चारों ओर एक घेरा बनाते हैं. पाकिस्तान का ग्वादर, श्रीलंका का हंबनटोटा, म्यांमार का क्यौकप्यू और अब मालदीव में बढ़ती सक्रियता भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए नई चिंता का विषय बन चुकी है. हाल ही में चीन का रिसर्च जहाज “शेन हाई यी हाओ” मालदीव के पास पहुंचा, जो शोध के नाम पर संवेदनशील समुद्री जानकारी इकट्ठी कर रहा है. भारत के पास दो चीन बना रहा चौथा एयरक्राफ्ट कैरियर मौजूदा वक्त में भारतीय नौसेना के पास दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत. ये दोनों ही भारतीय नौसेना की रीढ़ माने जाते हैं, लेकिन जब चीन अपने चौथे एयरक्राफ्ट कैरियर पर काम कर रहा है तो भारत के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या दो जहाज काफी हैं या अब तीसरा और चौथा बनाना जरूरी हो गया है. कम से कम 5 कैरियर जरूरी-विशेषज्ञों की राय भारतीय नौसेना के पूर्व वाइस एडमिरल प्रदीप चौहान ने निजी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर चीन नए एयरक्राफ्ट कैरियर बना रहा है तो यह उसकी रणनीति का हिस्सा है. भारत को भी अपनी समुद्री उपस्थिति बनाए रखने के लिए 5 एयरक्राफ्ट कैरियर की योजना पर काम करना चाहिए. वे कहते हैं कि यह बहस निरर्थक है कि नेवी को कैरियर चाहिए या पनडुब्बियां, क्योंकि दोनों का काम अलग है और दोनों ही देश की सुरक्षा के लिए अनिवार्य हैं. तीसरे विमानवाहक पोत की जरूरत क्यों फिलहाल भारत की नौसेना टू कैरियर बैटल ग्रुप सिस्टम पर काम करती है. एक जहाज पूर्वी तट पर और दूसरा पश्चिमी तट पर तैनात रहता है, लेकिन जब इनमें से कोई जहाज मरम्मत या रखरखाव के लिए डॉक में जाता है तब नौसेना के पास केवल एक ही ऑपरेशनल पोत बचता है. ऐसे में तीसरा जहाज न केवल जरूरी बल्कि रणनीतिक रूप से जरूरी हो जाता है ताकि किसी भी परिस्थिति में समुद्र पर नियंत्रण बना रहे. INS विशाल भारत की नई छलांग भारत अब तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर INS विशाल पर विचार कर रहा है. यह संभवतः परमाणु ऊर्जा से संचालित होगा और इसमें आधुनिक तकनीक जैसे EMALS सिस्टम का उपयोग किया जा सकता है. अगर ऐसा हुआ तो भारत अमेरिका और चीन जैसी नेवल पावर की श्रेणी में शामिल हो जाएगा. हिंद महासागर का महत्व हिंद महासागर वह क्षेत्र है जहां से विश्व की 80 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है और लगभग 60 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों का रास्ता यही है. भारत की भौगोलिक स्थिति इस क्षेत्र में उसे स्वाभाविक बढ़त देती है, लेकिन चीन की बढ़ती गतिविधियां इस बढ़त को धीरे-धीरे चुनौती दे रही हैं. डेटरेंस की अवधारणा युद्ध नहीं, तैयारी जरूरी वाइस एडमिरल चौहान का कहना है कि किसी देश की ताकत केवल हथियारों की संख्या से नहीं मापी जाती, बल्कि उससे तय होती है कि वह विरोधी को युद्ध से पहले ही कैसे रोक सके. इसके लिए तैयारी, संसाधन और तकनीकी क्षमता सबसे जरूरी हैं. उनका मानना है कि अगर दुश्मन के पास बंदूक है तो हमें भी अपनी सुरक्षा के लिए बंदूक रखनी ही होगी. भारत की नौसेना आने वाले वर्षों में सिर्फ समुद्री सुरक्षा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रणनीति का भी प्रमुख हिस्सा बनेगी. क्योंकि अब युद्ध का मैदान सिर्फ धरती पर नहीं, बल्कि लहरों के बीच भी तय होगा. ये भी पढ़ें: US Vice President JD Vance: पश्मीना शॉल ओढ़े भारतीय मूल की हिंदू महिला ने छुड़ा दिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पसीने! जानें वहां हुआ क्या

Oct 31, 2025 - 11:30
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हिंद महासागर में बढ़ती ड्रैगन की हलचल, एक्सपर्ट्स ने भारत को दी चेतावनी! कहा- '5 एयरक्राफ्ट कैरियर तैयार करें'

भारत इस समय ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां सुरक्षा का दायरा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है. अब खतरे समुद्र की गहराइयों में भी छिपे हैं. हाल के वर्षों में भारत तीन बार युद्ध जैसी स्थितियों का सामना कर चुका है. दो बार पाकिस्तान और एक बार चीन के साथ. अब जो खतरा सामने आ रहा है, वह समुद्र से जुड़ा है, जहां चीन लगातार अपनी शक्ति बढ़ा रहा है और भारत के सामरिक संतुलन को चुनौती दे रहा है.

हिंद महासागर में चीन का प्रभाव तेजी से फैल रहा है. उसकी स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स नीति के तहत उसने ऐसे बंदरगाह विकसित कर लिए हैं, जो भारत के चारों ओर एक घेरा बनाते हैं. पाकिस्तान का ग्वादर, श्रीलंका का हंबनटोटा, म्यांमार का क्यौकप्यू और अब मालदीव में बढ़ती सक्रियता भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए नई चिंता का विषय बन चुकी है. हाल ही में चीन का रिसर्च जहाज “शेन हाई यी हाओ” मालदीव के पास पहुंचा, जो शोध के नाम पर संवेदनशील समुद्री जानकारी इकट्ठी कर रहा है.

भारत के पास दो चीन बना रहा चौथा एयरक्राफ्ट कैरियर

मौजूदा वक्त में भारतीय नौसेना के पास दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत. ये दोनों ही भारतीय नौसेना की रीढ़ माने जाते हैं, लेकिन जब चीन अपने चौथे एयरक्राफ्ट कैरियर पर काम कर रहा है तो भारत के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या दो जहाज काफी हैं या अब तीसरा और चौथा बनाना जरूरी हो गया है.

कम से कम 5 कैरियर जरूरी-विशेषज्ञों की राय

भारतीय नौसेना के पूर्व वाइस एडमिरल प्रदीप चौहान ने निजी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर चीन नए एयरक्राफ्ट कैरियर बना रहा है तो यह उसकी रणनीति का हिस्सा है. भारत को भी अपनी समुद्री उपस्थिति बनाए रखने के लिए 5 एयरक्राफ्ट कैरियर की योजना पर काम करना चाहिए. वे कहते हैं कि यह बहस निरर्थक है कि नेवी को कैरियर चाहिए या पनडुब्बियां, क्योंकि दोनों का काम अलग है और दोनों ही देश की सुरक्षा के लिए अनिवार्य हैं.

तीसरे विमानवाहक पोत की जरूरत क्यों

फिलहाल भारत की नौसेना टू कैरियर बैटल ग्रुप सिस्टम पर काम करती है. एक जहाज पूर्वी तट पर और दूसरा पश्चिमी तट पर तैनात रहता है, लेकिन जब इनमें से कोई जहाज मरम्मत या रखरखाव के लिए डॉक में जाता है तब नौसेना के पास केवल एक ही ऑपरेशनल पोत बचता है. ऐसे में तीसरा जहाज न केवल जरूरी बल्कि रणनीतिक रूप से जरूरी हो जाता है ताकि किसी भी परिस्थिति में समुद्र पर नियंत्रण बना रहे.

INS विशाल भारत की नई छलांग

भारत अब तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर INS विशाल पर विचार कर रहा है. यह संभवतः परमाणु ऊर्जा से संचालित होगा और इसमें आधुनिक तकनीक जैसे EMALS सिस्टम का उपयोग किया जा सकता है. अगर ऐसा हुआ तो भारत अमेरिका और चीन जैसी नेवल पावर की श्रेणी में शामिल हो जाएगा.

हिंद महासागर का महत्व

हिंद महासागर वह क्षेत्र है जहां से विश्व की 80 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है और लगभग 60 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों का रास्ता यही है. भारत की भौगोलिक स्थिति इस क्षेत्र में उसे स्वाभाविक बढ़त देती है, लेकिन चीन की बढ़ती गतिविधियां इस बढ़त को धीरे-धीरे चुनौती दे रही हैं.

डेटरेंस की अवधारणा युद्ध नहीं, तैयारी जरूरी

वाइस एडमिरल चौहान का कहना है कि किसी देश की ताकत केवल हथियारों की संख्या से नहीं मापी जाती, बल्कि उससे तय होती है कि वह विरोधी को युद्ध से पहले ही कैसे रोक सके. इसके लिए तैयारी, संसाधन और तकनीकी क्षमता सबसे जरूरी हैं. उनका मानना है कि अगर दुश्मन के पास बंदूक है तो हमें भी अपनी सुरक्षा के लिए बंदूक रखनी ही होगी. भारत की नौसेना आने वाले वर्षों में सिर्फ समुद्री सुरक्षा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रणनीति का भी प्रमुख हिस्सा बनेगी. क्योंकि अब युद्ध का मैदान सिर्फ धरती पर नहीं, बल्कि लहरों के बीच भी तय होगा.

ये भी पढ़ें: US Vice President JD Vance: पश्मीना शॉल ओढ़े भारतीय मूल की हिंदू महिला ने छुड़ा दिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पसीने! जानें वहां हुआ क्या

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