स्टॉक मार्केट या गोल्ड? इस दिवाली कहां पर होगी आपकी 'चांदी', जानें क्या कह रहे एक्सपर्ट्स

Invest in Gold or Stock Market: निवेशक जब भी किसी चीज़ में पैसे लगाते हैं, तो उनका मकसद एक ही होता है — कम समय में ज़्यादा मुनाफा कमाना. दिवाली क़रीब है, और ऐसे में निवेशकों के मन में यह सवाल ज़रूर उठ रहा होगा कि इस त्योहारी सीज़न में वे कहाँ निवेश करें, ताकि वह सौदा उनके लिए फ़ायदेमंद साबित हो. भारत में सोने का न सिर्फ़ आर्थिक, बल्कि धार्मिक और सामाजिक महत्व भी है. वहीं, दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग शेयर बाज़ार में भी निवेश करते हैं, जिसे लंबे समय में बेहतर रिटर्न देने वाला माना जाता है. लेकिन जब बात आती है दोनों में से बेहतर विकल्प चुनने की — तो कौन आगे है? सोने की बढ़ती चमक भूराजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल और व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच पिछले एक साल में सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है. यही वजह है कि सिर्फ़ एक वर्ष में ही सोने ने निवेशकों को लगभग 50 प्रतिशत का रिटर्न दिया है. अप्रैल में पहली बार सोने का भाव एक लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंचा था, और अब यह 1.22 लाख रुपये से भी ऊपर जा चुका है. इसके विपरीत, शेयर बाज़ार में पिछले एक साल के दौरान भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. अमेरिकी टैरिफ नीतियों और वैश्विक व्यापारिक तनावों ने बाज़ार पर दबाव डाला है. कई बड़ी कंपनियों ने छंटनी की है और आईटी सेक्टर में सुस्ती छाई हुई है. इन परिस्थितियों में, शेयर बाज़ार निवेशकों के लिए अब तक बहुत आकर्षक साबित नहीं हुआ है. विशेषज्ञों की राय गोल्ड बनाम इक्विटी निवेश पर बाज़ार विशेषज्ञों का कहना है कि अल्पावधि में सोना भले ही बेहतर रिटर्न दे रहा हो, लेकिन दीर्घावधि में स्थिति अलग हो सकती है. उनका कहना है कि यह ज़रूरी नहीं कि अगर सोने ने एक साल में शानदार रिटर्न दिया है, तो वह रुझान आगे भी जारी रहेगा. आमतौर पर सोने की चमक वैश्विक अस्थिरता या मंदी के दौर में बढ़ती है. पिछले दो वर्षों में सोने की तेज़ बढ़त के बाद अब यह सवाल उठता है कि क्या इसकी कीमतें आगे भी इसी रफ़्तार से बढ़ेंगी? वहीं, शेयर बाज़ार में निवेश करने वाली कंपनियाँ न सिर्फ़ निवेशकों को डिविडेंड (लाभांश) देती हैं, बल्कि मज़बूत अर्थव्यवस्था के साथ उनमें वृद्धि की संभावनाएँ भी अधिक रहती हैं. अगर आप सुरक्षित निवेश की तलाश में हैं, तो सोना एक स्थिर विकल्प साबित हो सकता है. लेकिन अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि का धन सृजन (Wealth Creation) है, तो शेयर बाज़ार — जोखिम के बावजूद — अधिक संभावनाएं रखता है. इसलिए, विशेषज्ञों की राय में पोर्टफोलियो में दोनों का संतुलित मिश्रण रखना समझदारी भरा कदम होगा. ये भी पढ़ें: शेयर मिला या नहीं? ऐसे चेक करें Tata Capital के IPO का अलॉटमेंट स्टेटस

Oct 9, 2025 - 14:30
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स्टॉक मार्केट या गोल्ड? इस दिवाली कहां पर होगी आपकी 'चांदी', जानें क्या कह रहे एक्सपर्ट्स

Invest in Gold or Stock Market: निवेशक जब भी किसी चीज़ में पैसे लगाते हैं, तो उनका मकसद एक ही होता है — कम समय में ज़्यादा मुनाफा कमाना. दिवाली क़रीब है, और ऐसे में निवेशकों के मन में यह सवाल ज़रूर उठ रहा होगा कि इस त्योहारी सीज़न में वे कहाँ निवेश करें, ताकि वह सौदा उनके लिए फ़ायदेमंद साबित हो.

भारत में सोने का न सिर्फ़ आर्थिक, बल्कि धार्मिक और सामाजिक महत्व भी है. वहीं, दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग शेयर बाज़ार में भी निवेश करते हैं, जिसे लंबे समय में बेहतर रिटर्न देने वाला माना जाता है. लेकिन जब बात आती है दोनों में से बेहतर विकल्प चुनने की — तो कौन आगे है?

सोने की बढ़ती चमक

भूराजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल और व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच पिछले एक साल में सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है. यही वजह है कि सिर्फ़ एक वर्ष में ही सोने ने निवेशकों को लगभग 50 प्रतिशत का रिटर्न दिया है. अप्रैल में पहली बार सोने का भाव एक लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंचा था, और अब यह 1.22 लाख रुपये से भी ऊपर जा चुका है.

इसके विपरीत, शेयर बाज़ार में पिछले एक साल के दौरान भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. अमेरिकी टैरिफ नीतियों और वैश्विक व्यापारिक तनावों ने बाज़ार पर दबाव डाला है. कई बड़ी कंपनियों ने छंटनी की है और आईटी सेक्टर में सुस्ती छाई हुई है. इन परिस्थितियों में, शेयर बाज़ार निवेशकों के लिए अब तक बहुत आकर्षक साबित नहीं हुआ है.

विशेषज्ञों की राय

गोल्ड बनाम इक्विटी निवेश पर बाज़ार विशेषज्ञों का कहना है कि अल्पावधि में सोना भले ही बेहतर रिटर्न दे रहा हो, लेकिन दीर्घावधि में स्थिति अलग हो सकती है. उनका कहना है कि यह ज़रूरी नहीं कि अगर सोने ने एक साल में शानदार रिटर्न दिया है, तो वह रुझान आगे भी जारी रहेगा.

आमतौर पर सोने की चमक वैश्विक अस्थिरता या मंदी के दौर में बढ़ती है. पिछले दो वर्षों में सोने की तेज़ बढ़त के बाद अब यह सवाल उठता है कि क्या इसकी कीमतें आगे भी इसी रफ़्तार से बढ़ेंगी? वहीं, शेयर बाज़ार में निवेश करने वाली कंपनियाँ न सिर्फ़ निवेशकों को डिविडेंड (लाभांश) देती हैं, बल्कि मज़बूत अर्थव्यवस्था के साथ उनमें वृद्धि की संभावनाएँ भी अधिक रहती हैं.

अगर आप सुरक्षित निवेश की तलाश में हैं, तो सोना एक स्थिर विकल्प साबित हो सकता है. लेकिन अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि का धन सृजन (Wealth Creation) है, तो शेयर बाज़ार — जोखिम के बावजूद — अधिक संभावनाएं रखता है. इसलिए, विशेषज्ञों की राय में पोर्टफोलियो में दोनों का संतुलित मिश्रण रखना समझदारी भरा कदम होगा.

ये भी पढ़ें: शेयर मिला या नहीं? ऐसे चेक करें Tata Capital के IPO का अलॉटमेंट स्टेटस

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