सौतेली बेटी की हत्या का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की आरोपी पिता की सजा, पुलिस को लगाई फटकार
छह साल की बच्ची की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सौतेला पिता की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने जांच में गड़बड़ी के आधार पर सजा रद्द कर दी. मंगलवार (17 फरवरी, 2026) को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला स्थापित करने में विफल रहा. जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाली वकील अंकिता शर्मा की सटीक तैयारी और जांच में आई बड़ी बाधाओं के बावजूद कुशलतापूर्वक और उत्साह के साथ मामले की पैरवी करने के लिए प्रशंसा की. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ पुलिस की गड़बड़ जांच की कड़ी आलोचना की है, जिसकी वजह से छह साल की बच्ची की हत्या के मामले में कई सवालों के जवाब नहीं मिल पाए, जहां असली अपराधी बिना सजा के बच गए और उसके सौतेले पिता को महज अनुमानों के आधार पर जेल में डाल दिया गया. फैसला लिखने वाले जस्टिस के विनोद चंद्रन ने कहा, 'हम इस बात से हैरान हैं कि अगर जांच वकील की तैयारी के आधे स्तर की भी होती, तो उस बेचारी बच्ची के लापता होने और मृत्यु को लेकर रहस्य सुलझ सकता था. हम अपीलकर्ता के वरिष्ठ वकील की ओर से जांच के लचर रुख को प्रभावी ढंग से उजागर करने के प्रयासों की भी सराहना करते हैं.' फैसले में आरोपी रोहित जांगड़े की अपील को स्वीकार कर लिया गया, जिन्हें छत्तीसगढ़ की एक निचली अदालत ने दोषी ठहराया था. निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था. यह मामला छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में अक्टूबर 2018 का है. अभियोजन पक्ष के अनुसार, पांच अक्टूबर 2018 को रोहित जांगड़े और उनकी दूसरी पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था. इसके बाद पत्नी अपने माता-पिता के घर चली गई. आरोप था कि जांगडे अपनी सौतेली बेटी को मोटरसाइकिल पर बिठाकर ले गया. बच्ची लापता हो गई, लेकिन औपचारिक शिकायत 11 अक्टूबर को दर्ज कराई गई और 13 अक्टूबर को रोहित जांगड़े को गिरफ्तार किया गया.
छह साल की बच्ची की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सौतेला पिता की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने जांच में गड़बड़ी के आधार पर सजा रद्द कर दी. मंगलवार (17 फरवरी, 2026) को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला स्थापित करने में विफल रहा.
जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाली वकील अंकिता शर्मा की सटीक तैयारी और जांच में आई बड़ी बाधाओं के बावजूद कुशलतापूर्वक और उत्साह के साथ मामले की पैरवी करने के लिए प्रशंसा की. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ पुलिस की गड़बड़ जांच की कड़ी आलोचना की है, जिसकी वजह से छह साल की बच्ची की हत्या के मामले में कई सवालों के जवाब नहीं मिल पाए, जहां असली अपराधी बिना सजा के बच गए और उसके सौतेले पिता को महज अनुमानों के आधार पर जेल में डाल दिया गया.
फैसला लिखने वाले जस्टिस के विनोद चंद्रन ने कहा, 'हम इस बात से हैरान हैं कि अगर जांच वकील की तैयारी के आधे स्तर की भी होती, तो उस बेचारी बच्ची के लापता होने और मृत्यु को लेकर रहस्य सुलझ सकता था. हम अपीलकर्ता के वरिष्ठ वकील की ओर से जांच के लचर रुख को प्रभावी ढंग से उजागर करने के प्रयासों की भी सराहना करते हैं.'
फैसले में आरोपी रोहित जांगड़े की अपील को स्वीकार कर लिया गया, जिन्हें छत्तीसगढ़ की एक निचली अदालत ने दोषी ठहराया था. निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था. यह मामला छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में अक्टूबर 2018 का है. अभियोजन पक्ष के अनुसार, पांच अक्टूबर 2018 को रोहित जांगड़े और उनकी दूसरी पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था. इसके बाद पत्नी अपने माता-पिता के घर चली गई. आरोप था कि जांगडे अपनी सौतेली बेटी को मोटरसाइकिल पर बिठाकर ले गया. बच्ची लापता हो गई, लेकिन औपचारिक शिकायत 11 अक्टूबर को दर्ज कराई गई और 13 अक्टूबर को रोहित जांगड़े को गिरफ्तार किया गया.
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