रूस में 7 जनवरी को क्रिसमस क्यों मनाया जाता है? जानें तारीखों का रहस्य और कैलेंडर का खेल!

Christmas in Russia on January 7th: हर वर्ष दुनियाभर के ईसाई धर्म के लोग ईसा मसीहा का जन्म उत्सव 25 दिसंबर को मनाते हैं. लेकिन रूस, यूक्रेन, सर्बिया और कुछ अन्य देशों के ऑर्थोडॉक्स ईसाई क्रिसमस 7 जनवरी को मनाते हैं? चौंकिए मत आइए जानते हैं यह अंतर क्यों आया और इन तारीखों के पीछे क्या वजहें हैं? क्रिसमस 25 दिसंबर के बजाए 7 जनवरी को मनाए जाने का विशेष कारण अलग-अलग कैलेंडर प्रणालियों का इस्तेमाल करना है. यह मात्र एक परंपरा या सांस्कृतिक विशेषता नहीं है, बल्कि सालों से चली आ रही कैलेंडर में होने वाले सुधारों का परिणाम है.  जूलियन कैलेंडर जूलियन कैलेंडर की शुरुआत 45 ईसा पूर्व में  जूलियस सीजर ने की थी और यूरोप में 1.5 हजार साल से भी अधिक तक इसका उपयोग होता रहा. इस कैलेंडर के मुताबिक,  एक वर्ष में 365 दिन और 6 घंटे होते हैं. हर 4 साल में, ये 6 घंटे जुड़कर एक अतिरिक्त दिन बन जाते हैं, जिससे 366 दिनों का एक लीप वर्ष बनता है.  हालांकि बाद में खगोलविदों ने पाया कि,  सौर वर्ष की असल अवधि 365 दिन, 5 घंटे और 49 मिनट का है, जो जूलियन कैलेंडर में मानी गई अवधि से 11 मिनट कम है. यह एक छोटी सी गलती शुरुआत में मामूली लगी लेकिन बाद के सालों में प्रति वर्ष जमा होती गई और इससे विसंगतियां पैदा हुई, जिसकी वजह से हर 128 साल में, कैलेंडर खगोलीय समय से पूरे एक दिन पीछे हो जाता था. ग्रेगोरियन कैलेंडर 16वीं शताब्दी तक, कैलेंडर और सूर्य की सापेक्ष पृथ्वी की असल स्थिति के बीच का अंतर गंभीर हो गया था और ये अंतर 10 दिनों का था. 1582 में, पोप ग्रेगरी XIII ने कैलेंडर में संसोधन किया और ग्रेगोरियन कैलेंडर की शुरुआत की. नई प्रणाली में उसी 11 मिनट को त्रुटि को ध्यान में रखा गया. 400 सालों में 100 लीप वर्षों के बजाए अब 97 लीप वर्ष का था. ग्रेगोरियन कैलेंडर को यूरोप के कैथोलिक देशों ने फौरन अपना लिया.  रूस में 7 जनवरी को क्रिसमस क्यों मनाया जाता है? रूसी संस्कृति में एक अलग विशेषता यह है कि, यहां नया साल 1 जनवरी को और क्रिसमस 7 जनवरी को मनाया जाता है. यह बात अक्सर विदेशियों को हैरान करती है. दरअसल 1918 में, बोल्शेविक सरकार ने रूस के नागरिक कैलेंडर को ग्रेगोरियन कैलेंडर शैली में बदल दिया, लेकिन चर्च कैलेंडर जूलियन ही रहा.  रूस में नववर्ष 1 जनवरी को मनाया जाता है, जो एक नागरिक अवकाश है. क्रिसमस 7 जनवरी को मनाया जाता है, जो जूलियन कैलेंडर में 25 दिसंबर के बराबर है. यह चर्च का अवकाश है. रूस में नववर्ष क्रिसमस ट्री, उपहार और पार्टी के साथ शीतकालीन हॉलिडे बन गया. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Dec 25, 2025 - 12:30
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रूस में 7 जनवरी को क्रिसमस क्यों मनाया जाता है? जानें तारीखों का रहस्य और कैलेंडर का खेल!

Christmas in Russia on January 7th: हर वर्ष दुनियाभर के ईसाई धर्म के लोग ईसा मसीहा का जन्म उत्सव 25 दिसंबर को मनाते हैं. लेकिन रूस, यूक्रेन, सर्बिया और कुछ अन्य देशों के ऑर्थोडॉक्स ईसाई क्रिसमस 7 जनवरी को मनाते हैं?

चौंकिए मत आइए जानते हैं यह अंतर क्यों आया और इन तारीखों के पीछे क्या वजहें हैं?

क्रिसमस 25 दिसंबर के बजाए 7 जनवरी को मनाए जाने का विशेष कारण अलग-अलग कैलेंडर प्रणालियों का इस्तेमाल करना है. यह मात्र एक परंपरा या सांस्कृतिक विशेषता नहीं है, बल्कि सालों से चली आ रही कैलेंडर में होने वाले सुधारों का परिणाम है. 

जूलियन कैलेंडर

जूलियन कैलेंडर की शुरुआत 45 ईसा पूर्व में  जूलियस सीजर ने की थी और यूरोप में 1.5 हजार साल से भी अधिक तक इसका उपयोग होता रहा. इस कैलेंडर के मुताबिक,  एक वर्ष में 365 दिन और 6 घंटे होते हैं. हर 4 साल में, ये 6 घंटे जुड़कर एक अतिरिक्त दिन बन जाते हैं, जिससे 366 दिनों का एक लीप वर्ष बनता है. 

हालांकि बाद में खगोलविदों ने पाया कि,  सौर वर्ष की असल अवधि 365 दिन, 5 घंटे और 49 मिनट का है, जो जूलियन कैलेंडर में मानी गई अवधि से 11 मिनट कम है. यह एक छोटी सी गलती शुरुआत में मामूली लगी लेकिन बाद के सालों में प्रति वर्ष जमा होती गई और इससे विसंगतियां पैदा हुई, जिसकी वजह से हर 128 साल में, कैलेंडर खगोलीय समय से पूरे एक दिन पीछे हो जाता था.

ग्रेगोरियन कैलेंडर

16वीं शताब्दी तक, कैलेंडर और सूर्य की सापेक्ष पृथ्वी की असल स्थिति के बीच का अंतर गंभीर हो गया था और ये अंतर 10 दिनों का था. 1582 में, पोप ग्रेगरी XIII ने कैलेंडर में संसोधन किया और ग्रेगोरियन कैलेंडर की शुरुआत की. नई प्रणाली में उसी 11 मिनट को त्रुटि को ध्यान में रखा गया.

400 सालों में 100 लीप वर्षों के बजाए अब 97 लीप वर्ष का था. ग्रेगोरियन कैलेंडर को यूरोप के कैथोलिक देशों ने फौरन अपना लिया. 

रूस में 7 जनवरी को क्रिसमस क्यों मनाया जाता है?

रूसी संस्कृति में एक अलग विशेषता यह है कि, यहां नया साल 1 जनवरी को और क्रिसमस 7 जनवरी को मनाया जाता है. यह बात अक्सर विदेशियों को हैरान करती है. दरअसल 1918 में, बोल्शेविक सरकार ने रूस के नागरिक कैलेंडर को ग्रेगोरियन कैलेंडर शैली में बदल दिया, लेकिन चर्च कैलेंडर जूलियन ही रहा. 

रूस में नववर्ष 1 जनवरी को मनाया जाता है, जो एक नागरिक अवकाश है. क्रिसमस 7 जनवरी को मनाया जाता है, जो जूलियन कैलेंडर में 25 दिसंबर के बराबर है. यह चर्च का अवकाश है. रूस में नववर्ष क्रिसमस ट्री, उपहार और पार्टी के साथ शीतकालीन हॉलिडे बन गया.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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