रिटायरमेंट से पहले दिखाया जज्बा! केरल की नन ने धार्मिक वर्दी पहनकर नंगे पैर लगाई बाधा दौड़, जीता गोल्ड

स्टेट मास्टर्स मीट में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी- सिस्टर्स सबीना, अपने धार्मिक वेशभूषा में, हर्डल इवेंट की शुरुआत लाइन पर खड़ी थीं. जैसे ही हॉर्न बजे, भीड़ ने अपनी सांस रोकी. कुछ ही सेकंड में, सबीना हर्डल्स पार करती हुई और युवा खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए पहले स्थान पर पहुंच गईं और गोल्ड मेडल जीत लिया. बचपन से खेलों में रही दिलचस्पीसिस्टर्स सबीना का खेलों के प्रति जुनून बचपन से ही रहा. उन्होंने नौवीं कक्षा में स्कूल का प्रतिनिधित्व किया और हर्डल में राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची. कॉलेज के दौरान उन्होंने इंटर-यूनिवर्सिटी प्रतियोगिताओं में भी अपनी प्रतिभा दिखाई. पढ़ाई और नौकरी के बीच खेलसमय के साथ शिक्षण का काम उनकी प्राथमिकता बन गया और प्रतियोगिताओं में कम भाग लिया, लेकिन इस साल, रिटायरमेंट से कुछ महीने पहले उन्होंने तय किया कि वह एक बार फिर ट्रैक पर लौटेंगी. इस फैसले ने उनकी झोली में गोल्ड मेडल डाल दिया. உடை என்பது ஒரு கவசம் - சாதிக்க உடை ஒரு தடை அல்ல...கேரளா - வயநாடு : துவாரகா AUP பள்ளியில் உடற்கல்வி ஆசிரியராக இருக்கும் 55 வயதான கன்னியாஸ்திரி சபீனாதடகள போட்டியில் மற்ற வீரர்களை விட மின்னல் வேகத்தில் முந்தி சென்று தங்கப் பதக்கம் வென்றார்.சிஸ்டர் சபீனா ஒன்பதாம் வகுப்பிலே… pic.twitter.com/kmx93OYaHr — Kᴀʙᴇᴇʀ - தக்கலை கபீர் (@Autokabeer) October 22, 2025 उम्र और पोशाक कोई बाधा नहीं55 से अधिक की उम्र में अपनी नन की वेशभूषा में जीत हासिल करने के बाद सबीना ने कहा, 'मैं बस रिटायर होने से पहले एक बार फिर कोशिश करना चाहती थी.' आज वह हैमर थ्रो में भी हिस्सा ले रही हैं, यह साबित करते हुए कि उम्र और पहनावा जुनून के रास्ते में बाधा नहीं बन सकते. उनकी असाधारण वापसी ने स्टेडियम के बाहर भी लोगों का ध्यान खींचा. यह दौड़ उनकी रिटायरमेंट से पहले उनकी आखिरी दौड़ थी.उन्होंने कहा, 'अगले मार्च में, मैं शारीरिक शिक्षा शिक्षिका के रूप में अपनी भूमिका से रिटायर हो रही हूं. मैं रिटायर होने से पहले एक आखिरी बार प्रतिस्पर्धा करना चाहती थी, इसलिए मैं स्टेट मास्टर्स मीट में आई.' शिक्षा मंत्री वी. शिवंकुट्टी ने सबीना को बधाई दी और कहा कि यह पूरे शिक्षा विभाग के लिए गर्व की बात है. उन्होंने कहा, 'अपनी नन की वेशभूषा में खेलकर गोल्ड जीतना यह संदेश देता है कि सच्ची इच्छाशक्ति रखने वाला व्यक्ति किसी भी उम्र या परिस्थिति में आगे बढ़ सकता है.'

Oct 22, 2025 - 21:30
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रिटायरमेंट से पहले दिखाया जज्बा! केरल की नन ने धार्मिक वर्दी पहनकर नंगे पैर लगाई बाधा दौड़, जीता गोल्ड

स्टेट मास्टर्स मीट में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी- सिस्टर्स सबीना, अपने धार्मिक वेशभूषा में, हर्डल इवेंट की शुरुआत लाइन पर खड़ी थीं. जैसे ही हॉर्न बजे, भीड़ ने अपनी सांस रोकी. कुछ ही सेकंड में, सबीना हर्डल्स पार करती हुई और युवा खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए पहले स्थान पर पहुंच गईं और गोल्ड मेडल जीत लिया.

बचपन से खेलों में रही दिलचस्पी
सिस्टर्स सबीना का खेलों के प्रति जुनून बचपन से ही रहा. उन्होंने नौवीं कक्षा में स्कूल का प्रतिनिधित्व किया और हर्डल में राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची. कॉलेज के दौरान उन्होंने इंटर-यूनिवर्सिटी प्रतियोगिताओं में भी अपनी प्रतिभा दिखाई.

पढ़ाई और नौकरी के बीच खेल
समय के साथ शिक्षण का काम उनकी प्राथमिकता बन गया और प्रतियोगिताओं में कम भाग लिया, लेकिन इस साल, रिटायरमेंट से कुछ महीने पहले उन्होंने तय किया कि वह एक बार फिर ट्रैक पर लौटेंगी. इस फैसले ने उनकी झोली में गोल्ड मेडल डाल दिया.

उम्र और पोशाक कोई बाधा नहीं
55 से अधिक की उम्र में अपनी नन की वेशभूषा में जीत हासिल करने के बाद सबीना ने कहा, 'मैं बस रिटायर होने से पहले एक बार फिर कोशिश करना चाहती थी.' आज वह हैमर थ्रो में भी हिस्सा ले रही हैं, यह साबित करते हुए कि उम्र और पहनावा जुनून के रास्ते में बाधा नहीं बन सकते. उनकी असाधारण वापसी ने स्टेडियम के बाहर भी लोगों का ध्यान खींचा. यह दौड़ उनकी रिटायरमेंट से पहले उनकी आखिरी दौड़ थी.

उन्होंने कहा, 'अगले मार्च में, मैं शारीरिक शिक्षा शिक्षिका के रूप में अपनी भूमिका से रिटायर हो रही हूं. मैं रिटायर होने से पहले एक आखिरी बार प्रतिस्पर्धा करना चाहती थी, इसलिए मैं स्टेट मास्टर्स मीट में आई.'

शिक्षा मंत्री वी. शिवंकुट्टी ने सबीना को बधाई दी और कहा कि यह पूरे शिक्षा विभाग के लिए गर्व की बात है. उन्होंने कहा, 'अपनी नन की वेशभूषा में खेलकर गोल्ड जीतना यह संदेश देता है कि सच्ची इच्छाशक्ति रखने वाला व्यक्ति किसी भी उम्र या परिस्थिति में आगे बढ़ सकता है.'

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