मेनोपॉज के बाद अगर तेजी से बढ़ रहा है वजन तो हो जाइए सावधान, हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर

आज के समय में मोटापा और ज्यादा वजन बढ़ना एक आम समस्या बन चुका है, लेकिन मेनोपॉज के बाद यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है. हाल ही में सामने आई एक स्टडी के अनुसार, मेनोपॉज के बाद महिलाओं में ज्यादा वजन या मोटापा ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ा देता है. दरअसल, मेनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का लेवल कम हो जाता है, ऐसे में जब ओवरीज हार्मोन को बनाना बंद कर देती है तो शरीर इससे फैट टिश्यू यानी चर्बी से बनाने लगता है. अगर शरीर में फैट ज्यादा है तो एस्ट्रोजन स्तर भी असामान्य रूप से बढ़ जाता है. यही एक्स्ट्रा एस्ट्रोजन ब्रेस्ट सेल्स की ग्रोथ को बढ़ावा देता है जो आगे चलकर कैंसर में बदल सकता है. मोटापा और हार्ट डिजीज से बढ़ता है खतरा विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, हाई बीएमआई और हार्ट डिजीज से पीड़ित महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है. इस रिसर्च में यूरोप और ब्रिटेन की करीब 1.68 लाख महिलाओं के डेटा का विश्लेषण किया गया है. जब स्टडी को शुरू किया गया था तब इनमें से किसी को कैंसर, डायबिटीज या हार्ट से जुड़ी बीमारी नहीं थी, लेकिन करीब 11 साल के फॉलोअप के बाद 6,793 महिलाओं में मेनोपॉज के बाद ब्रेस्ट कैंसर विकसित हुआ. इस रिसर्च में सामने आया कि जिन महिलाओं का बीएमआई 25 से ज्यादा था और जो पहले से दिल से जुड़ी बीमारियाें से पीड़ित थी उनमें यह खतरा 31 प्रतिशत तक बढ़ा हुआ पाया गया था. वहीं इस रिसर्च के अनुसार जो महिलाएं पहले से दिल से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित नहीं थी उनमें यह खतरा 13 प्रतिशत बढ़ा हुआ पाया गया. शरीर की चर्बी कैसे बढ़ाती है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा? अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, मेनोपॉज के बाद ओवरी एस्ट्रोजन बनाना बंद कर देती है. इस कंडीशन में शरीर का फैट टिश्यू ही एस्ट्रोजन का मेन सोर्स बन जाता है. इसलिए शरीर में जितनी ज्यादा चर्बी होती है, एस्ट्रोजन का लेवल उतना ही बढ़ता है. वहीं यह बढ़ा हुआ हार्मोन ब्रेस्ट सेल्स को बार-बार सक्रिय करता है, जिससे असामान्य कोशिकाओं की ग्रोथ होती है. यही प्रक्रिया आगे चलकर ब्रेस्ट कैंसर का कारण बन सकती है. साथ ही मोटापा इन्सुलिन रेजिस्टेंस को भी बढ़ता है. जब शरीर इंसुलिन को सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता है तो ब्लड में इसका लेवल बढ़ जाता है. वहीं हाई इन्सुलिन लेवल को भी कई प्रकार के कैंसर जैसे ब्रेस्ट कैंसर से जोड़ा गया है. कैसे कर सकते हैं बचाव?1. वजन कंट्रोल रखें- मोटापा कई बीमारियों की जड़ होता है, इसीलिए हेल्दी बीएमआई बनाए रखना जरूरी होता है. 2. नियमित व्यायाम करें- महिलाओं को हफ्ते में कम से कम 150 मिनट तक वॉक, योग्य या एक्सरसाइज करनी चाहिए. 3. शराब और स्मोकिंग से बचें- महिलाओं को शराब और धूम्रपान जैसी चीजों से बचना चाहिए, क्योंकि यह दोनों ही हार्मोनल असंतुलन को बढ़ाते हैं. 4. हेल्दी फूड लें- महिलाओं को प्रोसेस्ड फूड, मीठी ड्रिंक और ज्यादा तेल वाली चीजों से दूरी बनानी चाहिए. जिससे वजन कंट्रोल में रहे.  ये भी पढ़ें-खून में घुसकर नसों में सूजन पैदा कर रहा दिल्ली का प्रदूषण, धीरे-धीरे मौत के करीब आ रहा आम इंसान! Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Nov 5, 2025 - 19:30
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मेनोपॉज के बाद अगर तेजी से बढ़ रहा है वजन तो हो जाइए सावधान, हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर

आज के समय में मोटापा और ज्यादा वजन बढ़ना एक आम समस्या बन चुका है, लेकिन मेनोपॉज के बाद यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है. हाल ही में सामने आई एक स्टडी के अनुसार, मेनोपॉज के बाद महिलाओं में ज्यादा वजन या मोटापा ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ा देता है. दरअसल, मेनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का लेवल कम हो जाता है, ऐसे में जब ओवरीज हार्मोन को बनाना बंद कर देती है तो शरीर इससे फैट टिश्यू यानी चर्बी से बनाने लगता है. अगर शरीर में फैट ज्यादा है तो एस्ट्रोजन स्तर भी असामान्य रूप से बढ़ जाता है. यही एक्स्ट्रा एस्ट्रोजन ब्रेस्ट सेल्स की ग्रोथ को बढ़ावा देता है जो आगे चलकर कैंसर में बदल सकता है.

मोटापा और हार्ट डिजीज से बढ़ता है खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, हाई बीएमआई और हार्ट डिजीज से पीड़ित महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है. इस रिसर्च में यूरोप और ब्रिटेन की करीब 1.68 लाख महिलाओं के डेटा का विश्लेषण किया गया है. जब स्टडी को शुरू किया गया था तब इनमें से किसी को कैंसर, डायबिटीज या हार्ट से जुड़ी बीमारी नहीं थी, लेकिन करीब 11 साल के फॉलोअप के बाद 6,793 महिलाओं में मेनोपॉज के बाद ब्रेस्ट कैंसर विकसित हुआ. इस रिसर्च में सामने आया कि जिन महिलाओं का बीएमआई 25 से ज्यादा था और जो पहले से दिल से जुड़ी बीमारियाें से पीड़ित थी उनमें यह खतरा 31 प्रतिशत तक बढ़ा हुआ पाया गया था. वहीं इस रिसर्च के अनुसार जो महिलाएं पहले से दिल से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित नहीं थी उनमें यह खतरा 13 प्रतिशत बढ़ा हुआ पाया गया.

शरीर की चर्बी कैसे बढ़ाती है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा?

अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, मेनोपॉज के बाद ओवरी एस्ट्रोजन बनाना बंद कर देती है. इस कंडीशन में शरीर का फैट टिश्यू ही एस्ट्रोजन का मेन सोर्स बन जाता है. इसलिए शरीर में जितनी ज्यादा चर्बी होती है, एस्ट्रोजन का लेवल उतना ही बढ़ता है. वहीं यह बढ़ा हुआ हार्मोन ब्रेस्ट सेल्स को बार-बार सक्रिय करता है, जिससे असामान्य कोशिकाओं की ग्रोथ होती है. यही प्रक्रिया आगे चलकर ब्रेस्ट कैंसर का कारण बन सकती है. साथ ही मोटापा इन्सुलिन रेजिस्टेंस को भी बढ़ता है. जब शरीर इंसुलिन को सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता है तो ब्लड में इसका लेवल बढ़ जाता है. वहीं हाई इन्सुलिन लेवल को भी कई प्रकार के कैंसर जैसे ब्रेस्ट कैंसर से जोड़ा गया है.

कैसे कर सकते हैं बचाव?

1. वजन कंट्रोल रखें- मोटापा कई बीमारियों की जड़ होता है, इसीलिए हेल्दी बीएमआई बनाए रखना जरूरी होता है.
2. नियमित व्यायाम करें- महिलाओं को हफ्ते में कम से कम 150 मिनट तक वॉक, योग्य या एक्सरसाइज करनी चाहिए. 
3. शराब और स्मोकिंग से बचें- महिलाओं को शराब और धूम्रपान जैसी चीजों से बचना चाहिए, क्योंकि यह दोनों ही हार्मोनल असंतुलन को बढ़ाते हैं.
4. हेल्दी फूड लें- महिलाओं को प्रोसेस्ड फूड, मीठी ड्रिंक और ज्यादा तेल वाली चीजों से दूरी बनानी चाहिए. जिससे वजन कंट्रोल में रहे. 

ये भी पढ़ें-खून में घुसकर नसों में सूजन पैदा कर रहा दिल्ली का प्रदूषण, धीरे-धीरे मौत के करीब आ रहा आम इंसान!

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