मिलावटी घी का मामला: SIT के आरोप पत्र के बाद TTD के कार्यकारी अधिकारी का हुआ ट्रांसफर

मिलावटी घी मामले में विशेष जांच दल (SIT) की ओर से तिरुपति की एक अदालत में आरोप पत्र दाखिल किए जाने के एक हफ्ते बाद तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् (TTD) के कार्यकारी अधिकारी अनिल कुमार सिंघल का तबादला कर दिया गया. इस मामले में पूर्व वाईएसआरसीपी सरकार पर आरोप लगे हैं. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार अनिल कुमार सिंघल 1993 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं, जो मई 2017 से अक्टूबर 2020 के दौरान वाईएस जगन मोहन रेड्डी सरकार में भी ईओ के रूप में सेवाएं दे चुके हैं. उन्हें आगे की तैनाती के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को रिपोर्ट करने को कहा गया है. रविवार (1 फरवरी, 2026) को जारी एक शासकीय आदेश में कहा गया कि अनिल कुमार सिंघल की जगह मुद्दादा रविचंद्र को ईओ नियुक्त किया गया है. एसआईटी के आरोप पत्र के अनुसार, जांच में पता चला है कि अप्रैल 2019 के दौरान तत्कालीन ईओ की मंजूरी से टीटीडी अधिकारियों और बाहरी डेरी विशेषज्ञों वाली एक समिति गठित की गई थी, ताकि घी की निविदा की कुछ शर्तों में संशोधन किया जा सके. टीटीडी बोर्ड ने 29 फरवरी, 2020 को संकल्प संख्या 371 के जरिए खरीद समिति की सिफारिश को मंजूरी दी और इसके अनुसार घी निविदा की शर्तों में ढील दी गई. जांच में पता चला कि घी निविदा की शर्तों में ढील के कारण किसी सहकारी डेरी को निविदा नहीं मिली और निविदा केवल निजी डेरी को प्राप्त हुई. एसआईटी ने कहा कि कुछ शर्तों में ढील देने से उन नयी स्थापित डेरी के भाग लेने का भी रास्ता साफ हो गया जिनके पास आवश्यक अनुभव या साख नहीं थी और अंततः इससे टीटीडी द्वारा लड्डू प्रसाद बनाने के लिए खरीदे गए घी की गुणवत्ता से समझौता हुआ. आंध्र प्रदेश के वित्त मंत्री पी. केशव ने शनिवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि तिरुमला तिरुपति देवस्थानम की ओर से राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (NDDB) को भेजे गए घी के नमूनों की रिपोर्ट में पशु चर्बी होने की आशंका साफ तौर पर जताई गई थी और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी इसी रिपोर्ट का हवाला दिया था. केशव ने आरोप लगाया कि एसआईटी के समक्ष मौजूद साक्ष्यों से पता चलता है कि मिलावट 2019 के बाद ही शुरू हुई.  

Feb 1, 2026 - 19:30
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मिलावटी घी का मामला: SIT के आरोप पत्र के बाद TTD के कार्यकारी अधिकारी का हुआ ट्रांसफर

मिलावटी घी मामले में विशेष जांच दल (SIT) की ओर से तिरुपति की एक अदालत में आरोप पत्र दाखिल किए जाने के एक हफ्ते बाद तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् (TTD) के कार्यकारी अधिकारी अनिल कुमार सिंघल का तबादला कर दिया गया. इस मामले में पूर्व वाईएसआरसीपी सरकार पर आरोप लगे हैं.

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार अनिल कुमार सिंघल 1993 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं, जो मई 2017 से अक्टूबर 2020 के दौरान वाईएस जगन मोहन रेड्डी सरकार में भी ईओ के रूप में सेवाएं दे चुके हैं. उन्हें आगे की तैनाती के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को रिपोर्ट करने को कहा गया है. रविवार (1 फरवरी, 2026) को जारी एक शासकीय आदेश में कहा गया कि अनिल कुमार सिंघल की जगह मुद्दादा रविचंद्र को ईओ नियुक्त किया गया है.

एसआईटी के आरोप पत्र के अनुसार, जांच में पता चला है कि अप्रैल 2019 के दौरान तत्कालीन ईओ की मंजूरी से टीटीडी अधिकारियों और बाहरी डेरी विशेषज्ञों वाली एक समिति गठित की गई थी, ताकि घी की निविदा की कुछ शर्तों में संशोधन किया जा सके. टीटीडी बोर्ड ने 29 फरवरी, 2020 को संकल्प संख्या 371 के जरिए खरीद समिति की सिफारिश को मंजूरी दी और इसके अनुसार घी निविदा की शर्तों में ढील दी गई.

जांच में पता चला कि घी निविदा की शर्तों में ढील के कारण किसी सहकारी डेरी को निविदा नहीं मिली और निविदा केवल निजी डेरी को प्राप्त हुई. एसआईटी ने कहा कि कुछ शर्तों में ढील देने से उन नयी स्थापित डेरी के भाग लेने का भी रास्ता साफ हो गया जिनके पास आवश्यक अनुभव या साख नहीं थी और अंततः इससे टीटीडी द्वारा लड्डू प्रसाद बनाने के लिए खरीदे गए घी की गुणवत्ता से समझौता हुआ.

आंध्र प्रदेश के वित्त मंत्री पी. केशव ने शनिवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि तिरुमला तिरुपति देवस्थानम की ओर से राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (NDDB) को भेजे गए घी के नमूनों की रिपोर्ट में पशु चर्बी होने की आशंका साफ तौर पर जताई गई थी और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी इसी रिपोर्ट का हवाला दिया था. केशव ने आरोप लगाया कि एसआईटी के समक्ष मौजूद साक्ष्यों से पता चलता है कि मिलावट 2019 के बाद ही शुरू हुई.

 

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