भारत-US ट्रेड डील पर खतरा? ट्रंप के टैरिफ पर पाबंदी के बाद अमेरिका ने उठाया बड़ा कदम, जानें आगे क्या होगा?

भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर होने वाली तीन दिवसीय बैठक को स्थगित कर दिया गया है. इस हफ्ते होने वाली इस चर्चा का मकसद दोनों देशों के बीच कानूनी दस्तावेजों को अंतिम रूप देना था, लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले और ट्रंप प्रशासन के टैरिफ नीति में बदलावों की वजह से यह फैसला लिया गया. सूत्रों के मुताबिक, यह स्थगन मार्च महीने में प्रस्तावित समझौते पर असर डाल सकता है, जो दोनों देशों के नेताओं की तय की गई समयसीमा थी. टैरिफ के लिए ट्रंप का नया प्लान पिछले शुक्रवार यानी 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आपातकालीन अधिकारों का इस्तेमाल करके टैरिफ लगाने के फैसले को रद्द कर दिया. अदालत ने कहा कि टैरिफ नीति जैसे बड़े फैसले कांग्रेस के दायरे में आते हैं, न कि राष्ट्रपति के. इस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 का सहारा लिया, जिसके तहत टैरिफ दरें 15% तक सीमित हैं और यह सिर्फ 150 दिनों के लिए लागू हो सकती हैं. लेकिन अब धारा 338 पर भी विचार हो रहा है, जो 1930 के टैरिफ एक्ट के तहत 50% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देती है. भारत और अमेरिका नई तारीख पर करेंगे मुलाकात एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘अमेरिका में अभी स्थिति अनिश्चित है. पहले वे धारा 232, 301 और 122 की बात कर रहे थे, अब 338 पर चर्चा है. ऐसे में कोई स्थायी समझौता करना मुश्किल हो जाता है.’ इसी अनिश्चितता की वजह से भारत के चीफ नेगोशिएटर दर्पण जैन की अमेरिका यात्रा को भी टाल दिया गया है. दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि हालिया घटनाक्रमों का आकलन करने के बाद ही नई तारीख तय की जाएगी. बड़े व्यापार समझौते की ओर पहला कदम यह अंतरिम समझौता भारत और अमेरिका के बीच बड़े व्यापार समझौते की दिशा में पहला कदम था. पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप की मुलाकात के बाद दोनों देशों ने मार्च 2026 तक अंतरिम डील पर हस्ताक्षर करने का लक्ष्य रखा था. 6 फरवरी को जारी संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने फ्रेमवर्क पर सहमति जताई थी, जिसमें टैरिफ में बदलाव की स्थिति में समायोजन का प्रावधान भी शामिल था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने सब कुछ बदल दिया. भारतीय वाणिज्य मंत्रालय ने 21 फरवरी 2026 को बयान जारी कर कहा, ‘हम अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ट्रंप के प्रेस कॉन्फ्रेंस का अध्ययन कर रहे हैं. हम इन बदलावों के प्रभाव को समझने की कोशिश कर रहे हैं.’ अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने X पर पोस्ट किया कि वे धारा 232, 301 और 122 का इस्तेमाल करके टैरिफ नीति को मजबूत रखेंगे और धारा 338 भी एक विकल्प है. भारत के पास शर्तें मनवाने का मौका इस स्थगन से अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर की मार्च में प्रस्तावित भारत यात्रा पर भी सवाल उठ रहे हैं, जहां समझौते पर हस्ताक्षर होने थे. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ को चुनौती देने वाले वकील नील कत्याल ने कहा कि अगर ट्रंप को अपनी नीति पर इतना भरोसा है, तो उन्हें कांग्रेस से मंजूरी लेनी चाहिए. भारत के लिए यह मौका है कि वह अपनी शर्तों पर बातचीत करे, लेकिन अनिश्चितता दोनों पक्षों को प्रभावित कर रही है.

Feb 23, 2026 - 08:30
 0
भारत-US ट्रेड डील पर खतरा? ट्रंप के टैरिफ पर पाबंदी के बाद अमेरिका ने उठाया बड़ा कदम, जानें आगे क्या होगा?

भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर होने वाली तीन दिवसीय बैठक को स्थगित कर दिया गया है. इस हफ्ते होने वाली इस चर्चा का मकसद दोनों देशों के बीच कानूनी दस्तावेजों को अंतिम रूप देना था, लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले और ट्रंप प्रशासन के टैरिफ नीति में बदलावों की वजह से यह फैसला लिया गया. सूत्रों के मुताबिक, यह स्थगन मार्च महीने में प्रस्तावित समझौते पर असर डाल सकता है, जो दोनों देशों के नेताओं की तय की गई समयसीमा थी.

टैरिफ के लिए ट्रंप का नया प्लान

पिछले शुक्रवार यानी 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आपातकालीन अधिकारों का इस्तेमाल करके टैरिफ लगाने के फैसले को रद्द कर दिया. अदालत ने कहा कि टैरिफ नीति जैसे बड़े फैसले कांग्रेस के दायरे में आते हैं, न कि राष्ट्रपति के.

इस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 का सहारा लिया, जिसके तहत टैरिफ दरें 15% तक सीमित हैं और यह सिर्फ 150 दिनों के लिए लागू हो सकती हैं. लेकिन अब धारा 338 पर भी विचार हो रहा है, जो 1930 के टैरिफ एक्ट के तहत 50% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देती है.

भारत और अमेरिका नई तारीख पर करेंगे मुलाकात

एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘अमेरिका में अभी स्थिति अनिश्चित है. पहले वे धारा 232, 301 और 122 की बात कर रहे थे, अब 338 पर चर्चा है. ऐसे में कोई स्थायी समझौता करना मुश्किल हो जाता है.’

इसी अनिश्चितता की वजह से भारत के चीफ नेगोशिएटर दर्पण जैन की अमेरिका यात्रा को भी टाल दिया गया है. दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि हालिया घटनाक्रमों का आकलन करने के बाद ही नई तारीख तय की जाएगी.

बड़े व्यापार समझौते की ओर पहला कदम

यह अंतरिम समझौता भारत और अमेरिका के बीच बड़े व्यापार समझौते की दिशा में पहला कदम था. पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप की मुलाकात के बाद दोनों देशों ने मार्च 2026 तक अंतरिम डील पर हस्ताक्षर करने का लक्ष्य रखा था. 6 फरवरी को जारी संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने फ्रेमवर्क पर सहमति जताई थी, जिसमें टैरिफ में बदलाव की स्थिति में समायोजन का प्रावधान भी शामिल था.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने सब कुछ बदल दिया. भारतीय वाणिज्य मंत्रालय ने 21 फरवरी 2026 को बयान जारी कर कहा, ‘हम अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ट्रंप के प्रेस कॉन्फ्रेंस का अध्ययन कर रहे हैं. हम इन बदलावों के प्रभाव को समझने की कोशिश कर रहे हैं.’

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने X पर पोस्ट किया कि वे धारा 232, 301 और 122 का इस्तेमाल करके टैरिफ नीति को मजबूत रखेंगे और धारा 338 भी एक विकल्प है.

भारत के पास शर्तें मनवाने का मौका

इस स्थगन से अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर की मार्च में प्रस्तावित भारत यात्रा पर भी सवाल उठ रहे हैं, जहां समझौते पर हस्ताक्षर होने थे. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ को चुनौती देने वाले वकील नील कत्याल ने कहा कि अगर ट्रंप को अपनी नीति पर इतना भरोसा है, तो उन्हें कांग्रेस से मंजूरी लेनी चाहिए. भारत के लिए यह मौका है कि वह अपनी शर्तों पर बातचीत करे, लेकिन अनिश्चितता दोनों पक्षों को प्रभावित कर रही है.

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow