भारत-चीन की सिविल सेवा परीक्षा, लाखों में सिर्फ कुछ ही को क्यों मिलती है इसमें कामयाबी

भारत और चीन में सरकारी अफसर बनने का सपना लाखों युवा देखते हैं, लेकिन इस सपने को सच करना बहुत मुश्किल होता है. लोग कड़ी मेहनत और तैयारी के बाद भी कामयाब नहीं हो पाते हैं. भारत और चीन की सिविल सेवा परीक्षा दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है. भारत में साल 2023 में करीब 11 लाख लोगों ने यूपीएससी (सिविल सेवा) परीक्षा के लिए आवेदन किया था, लेकिन उनमें से सिर्फ 1,000 लोग सफल हो पाए. वहीं चीन में 34 लाख लोगों ने सिविल सेवा परीक्षा दी, जिनमें से लगभग 51,000 को सफलता मिली. 2023 में भारत में सिविल परीक्षा सिलेक्शन रेट लगभग 0.09 रहा जबकि चीन में यह 1.5 प्रतिशत था. ऐसे में चलिए जानते हैं​ कि भारत-चीन की सिविल सेवा परीक्षा क्या है और क्यों लाखों में सिर्फ कुछ ही को कामयाबी मिलती है.भारत-चीन की सिविल सेवा परीक्षाभारत और चीन में सिविल सेवा की परीक्षा बेहद मुश्किल और कंपीटिटिव है. इसके लिए छात्र कई साल तक तैयारी करते हैं. वहीं अब भारत और चीन इस प्रक्रिया को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं. चीन कुछ पदों पर एक्सपीरियंस के आधार पर नियुक्ति कर रहा है. भारत में लेटरल एंट्री नाम की योजना लाई गई है, जिसके तहत निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को सीधे सरकारी पदों पर लाया जा रहा है, लेकिन अभी तक भर्ती का मुख्य आधार सिर्फ परीक्षा ही है.क्यों लाखों में सिर्फ कुछ ही को कामयाबी मिलती है? भारत में हजारों छात्र छोटे शहरों से दिल्ली जैसे बड़े शहरों में आकर सालों तक तैयारी करते हैं. रोज 10 घंटे पढ़ाई करने के बावजूद उन्हें सफलता की कोई गारंटी नहीं होती. इस तैयारी के दौरान बहुत से छात्र स्ट्रेस और असफलता के कारण मानसिक दबाव में आ जाते हैं. कुछ छात्रों के मन में सुसाइड जैसे विचार भी आ जाते हैं, क्योंकि परीक्षा पास करना बहुत ही मुश्किल होता है. यूपीएससी में प्री, मेन्स, और इंटरव्यू के तीन चरण होते हैं. सिर्फ पहले चरण में ही लाखों उम्मीदवार बैठते हैं, लेकिन लास्ट में पास होने वाले बहुत कम होते हैं.इस परीक्षा की तैयारी में कोचिंग का बहुत बड़ा रोल होता है. दिल्ली, हैदराबाद, जयपुर जैसे शहरों में हजारों कोचिंग सेंटर हैं, जिनकी फीस लाखों रुपये होती है.कई छात्र अपनी या अपने परिवार की सारी सेविंग्स इस तैयारी में खर्च कर देते हैं. कुछ लोग नौकरी छोड़कर इस तैयारी में लग जाते हैं और कुछ पार्ट-टाइम काम करके खर्च निकालते हैं. वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस तैयारी के चलते युवा कई साल तक कोई नौकरी नहीं करते, जिससे उनकी कमाई रुक जाती है और देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है. यह भी पढ़े : भारत की इस मंडी में हर साल बिकते हैं दूल्हे, रेट लिस्ट के साथ लगाई जाती है बोली  

Jun 27, 2025 - 19:30
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भारत-चीन की सिविल सेवा परीक्षा, लाखों में सिर्फ कुछ ही को क्यों मिलती है इसमें कामयाबी

भारत और चीन में सरकारी अफसर बनने का सपना लाखों युवा देखते हैं, लेकिन इस सपने को सच करना बहुत मुश्किल होता है. लोग कड़ी मेहनत और तैयारी के बाद भी कामयाब नहीं हो पाते हैं. भारत और चीन की सिविल सेवा परीक्षा दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है. भारत में साल 2023 में करीब 11 लाख लोगों ने यूपीएससी (सिविल सेवा) परीक्षा के लिए आवेदन किया था, लेकिन उनमें से सिर्फ 1,000 लोग सफल हो पाए. वहीं चीन में 34 लाख लोगों ने सिविल सेवा परीक्षा दी, जिनमें से लगभग 51,000 को सफलता मिली. 2023 में भारत में सिविल परीक्षा सिलेक्शन रेट लगभग 0.09 रहा जबकि चीन में यह 1.5 प्रतिशत था. ऐसे में चलिए जानते हैं​ कि भारत-चीन की सिविल सेवा परीक्षा क्या है और क्यों लाखों में सिर्फ कुछ ही को कामयाबी मिलती है.

भारत-चीन की सिविल सेवा परीक्षा
भारत और चीन में सिविल सेवा की परीक्षा बेहद मुश्किल और कंपीटिटिव है. इसके लिए छात्र कई साल तक तैयारी करते हैं. वहीं अब भारत और चीन इस प्रक्रिया को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं. चीन कुछ पदों पर एक्सपीरियंस के आधार पर नियुक्ति कर रहा है. भारत में लेटरल एंट्री नाम की योजना लाई गई है, जिसके तहत निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को सीधे सरकारी पदों पर लाया जा रहा है, लेकिन अभी तक भर्ती का मुख्य आधार सिर्फ परीक्षा ही है.

क्यों लाखों में सिर्फ कुछ ही को कामयाबी मिलती है?

भारत में हजारों छात्र छोटे शहरों से दिल्ली जैसे बड़े शहरों में आकर सालों तक तैयारी करते हैं. रोज 10 घंटे पढ़ाई करने के बावजूद उन्हें सफलता की कोई गारंटी नहीं होती. इस तैयारी के दौरान बहुत से छात्र स्ट्रेस और असफलता के कारण मानसिक दबाव में आ जाते हैं. कुछ छात्रों के मन में सुसाइड जैसे विचार भी आ जाते हैं, क्योंकि परीक्षा पास करना बहुत ही मुश्किल होता है. यूपीएससी में प्री, मेन्स, और इंटरव्यू के तीन चरण होते हैं. सिर्फ पहले चरण में ही लाखों उम्मीदवार बैठते हैं, लेकिन लास्ट में पास होने वाले बहुत कम होते हैं.

इस परीक्षा की तैयारी में कोचिंग का बहुत बड़ा रोल होता है. दिल्ली, हैदराबाद, जयपुर जैसे शहरों में हजारों कोचिंग सेंटर हैं, जिनकी फीस लाखों रुपये होती है.कई छात्र अपनी या अपने परिवार की सारी सेविंग्स इस तैयारी में खर्च कर देते हैं. कुछ लोग नौकरी छोड़कर इस तैयारी में लग जाते हैं और कुछ पार्ट-टाइम काम करके खर्च निकालते हैं. वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस तैयारी के चलते युवा कई साल तक कोई नौकरी नहीं करते, जिससे उनकी कमाई रुक जाती है और देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है.

यह भी पढ़े : भारत की इस मंडी में हर साल बिकते हैं दूल्हे, रेट लिस्ट के साथ लगाई जाती है बोली

 

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