भारतीय क्रिकेट टीम के सितारे सारांश जैन, जानिए उन्होंने कहां से की है पढ़ाई

मध्य प्रदेश के स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन इन दिनों सुर्खियों में हैं. श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टेस्ट टीम में पहली बार चुने गए सारांश ने कोलंबो में अपना टेस्ट डेब्यू भी कर लिया है. 33 साल की उम्र में मिली यह उपलब्धि उनके सालों के संघर्ष का नतीजा है. आइए जानते हैं सारांश जैन के बचपन और उनके क्रिकेट करियर की पूरी कहानी.  कौन हैं सारांश जैन सारांश सुबोध जैन का जन्म 31 मार्च 1993 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था. उनके पिता सुबोध जैन खुद मध्य प्रदेश के लिए रणजी ट्रॉफी खेल चुके क्रिकेटर रहे हैं, तो क्रिकेट सारांश को विरासत में मिला. बचपन से ही उन्होंने इंदौर के प्रतिष्ठित विजय क्लब में ट्रेनिंग ली, जहां वे मध्यप्रदेश और भारत के मौजूदा बल्लेबाज रजत पाटीदार के साथ भी खेले.  कहां से की है पढ़ाई? भारतीय ऑलराउंडर क्रिकेटर सारांश जैन की प्रारंभिक और उच्च शिक्षा मुख्य रूप से उनके गृहनगर इंदौर, मध्य प्रदेश में हुई है. उन्होंने इंदौर के स्थानीय संस्थानों से अपनी स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई पूरी की, हालांकि उनके विशिष्ट स्कूल या कॉलेज का नाम सार्वजनिक तौर पर मीडिया प्रोफाइल्स में शेयर नहीं किया गया है. उनकी क्रिकेट की वास्तविक शिक्षा और ट्रेनिंग इंदौर में ही उनके घर की छत पर उनके पिता सुबोध जैन की देखरेख में हुई और बाद में उन्होंने इंदौर के प्रसिद्ध विजय क्लब से जुड़कर अपने पेशेवर क्रिकेट कौशल को निखारा. घरेलू क्रिकेट में लंबा और शानदार सफर सारांश ने दिसंबर 2014 में मध्य प्रदेश के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया था. इसके बाद फरवरी 2017 में उन्होंने लिस्ट ए क्रिकेट में भी कदम रखा. एक दशक से ज्यादा समय तक घरेलू क्रिकेट में मेहनत करने के बाद उन्होंने अपनी जगह पक्की की. अब तक उन्होंने 54 फर्स्ट क्लास मैचों की 97 पारियों में 27.30 की औसत और 3.01 की इकॉनमी रेट से 188 विकेट झटके हैं, जबकि बेटिंग में भी 2,223 रन बनाए हैं, जिसमें उनका औसत 31.75 का रहा है. इसके अलावा उन्होंने 47 लिस्ट ए और 21 टी20 मैच भी खेले हैं. 2021-22 के रणजी खिताब में अहम भूमिका सारांश मध्य प्रदेश की 2021-22 सीजन की ऐतिहासिक रणजी ट्रॉफी जीत के अहम खिलाड़ियों में शामिल रहे. निचले क्रम में बल्लेबाजी के साथ-साथ अहम मौकों पर विकेट निकालने की उनकी काबिलियत ने टीम को कई बार हारने से बचाया. यही वजह है कि उन्हें डोमेस्टिक क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद ऑलराउंडरों में गिना जाने लगा. दलीप ट्रॉफी और इंडिया ए दौरे से टीम इंडिया तक 2025 के दलीप ट्रॉफी में सेंट्रल जोन के लिए खेलते हुए सारांश ने सिर्फ दो मैचों में 16 विकेट झटके और प्लेयर ऑफ द सीरीज का खिताब जीता. सेंट्रल जोन इस टूर्नामेंट का चैंपियन भी बना. इसके बाद इंडिया ए के श्रीलंका दौरे पर भी उन्होंने अपनी दावेदारी और मजबूत की. जून-जुलाई में खेले गए अनऑफिशियल टेस्ट मैचों में से एक में उन्होंने छह विकेट लेने के साथ नाबाद 70 रन की पारी भी खेली, जिसने चयनकर्ताओं का पूरा भरोसा जीत लिया. यह भी पढ़ें - चीनी मिल खोलने में कितना खर्चा आता है, यहां गन्ने से कैसे बनती है चीनी? टीम इंडिया में मिली एंट्री आखिरकार जुलाई 2026 में सारांश को श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टेस्ट टीम में पहली बार शामिल किया गया. चोटिल वॉशिंगटन सुंदर की जगह उन्हें टीम में लिया गया था. कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए दूसरे टेस्ट में उन्हें अंतरराष्ट्रीय डेब्यू का मौका मिला. इस मैच में उन्होंने प्लेइंग इलेवन में संक्रमण से जूझ रहे स्पिनर कुलदीप यादव की जगह ली. आर अश्विन हैं उनके रोल मॉडल सारांश ने पहले एक इंटरव्यू में बताया था कि वे अक्सर दिग्गज ऑफ स्पिनर आर अश्विन को देखकर प्रेरणा लेते हैं और उनकी तरह ही समर्पण के साथ अपने क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाना चाहते हैं. उनकी यह सोच और मेहनत आखिरकार 33 साल की उम्र में रंग लाई, और वे भारत के लिए डेब्यू करने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ियों में शामिल हो गए. यह भी पढ़ें - गन्ने के अलावा किस-किस चीज से बनती है चीनी, सबसे सस्ती कौन सी?

Aug 24, 2026 - 14:30
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भारतीय क्रिकेट टीम के सितारे सारांश जैन, जानिए उन्होंने कहां से की है पढ़ाई

मध्य प्रदेश के स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन इन दिनों सुर्खियों में हैं. श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टेस्ट टीम में पहली बार चुने गए सारांश ने कोलंबो में अपना टेस्ट डेब्यू भी कर लिया है. 33 साल की उम्र में मिली यह उपलब्धि उनके सालों के संघर्ष का नतीजा है. आइए जानते हैं सारांश जैन के बचपन और उनके क्रिकेट करियर की पूरी कहानी. 

कौन हैं सारांश जैन

सारांश सुबोध जैन का जन्म 31 मार्च 1993 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था. उनके पिता सुबोध जैन खुद मध्य प्रदेश के लिए रणजी ट्रॉफी खेल चुके क्रिकेटर रहे हैं, तो क्रिकेट सारांश को विरासत में मिला. बचपन से ही उन्होंने इंदौर के प्रतिष्ठित विजय क्लब में ट्रेनिंग ली, जहां वे मध्यप्रदेश और भारत के मौजूदा बल्लेबाज रजत पाटीदार के साथ भी खेले. 

कहां से की है पढ़ाई?

भारतीय ऑलराउंडर क्रिकेटर सारांश जैन की प्रारंभिक और उच्च शिक्षा मुख्य रूप से उनके गृहनगर इंदौर, मध्य प्रदेश में हुई है. उन्होंने इंदौर के स्थानीय संस्थानों से अपनी स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई पूरी की, हालांकि उनके विशिष्ट स्कूल या कॉलेज का नाम सार्वजनिक तौर पर मीडिया प्रोफाइल्स में शेयर नहीं किया गया है. उनकी क्रिकेट की वास्तविक शिक्षा और ट्रेनिंग इंदौर में ही उनके घर की छत पर उनके पिता सुबोध जैन की देखरेख में हुई और बाद में उन्होंने इंदौर के प्रसिद्ध विजय क्लब से जुड़कर अपने पेशेवर क्रिकेट कौशल को निखारा.

घरेलू क्रिकेट में लंबा और शानदार सफर

सारांश ने दिसंबर 2014 में मध्य प्रदेश के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया था. इसके बाद फरवरी 2017 में उन्होंने लिस्ट ए क्रिकेट में भी कदम रखा. एक दशक से ज्यादा समय तक घरेलू क्रिकेट में मेहनत करने के बाद उन्होंने अपनी जगह पक्की की. अब तक उन्होंने 54 फर्स्ट क्लास मैचों की 97 पारियों में 27.30 की औसत और 3.01 की इकॉनमी रेट से 188 विकेट झटके हैं, जबकि बेटिंग में भी 2,223 रन बनाए हैं, जिसमें उनका औसत 31.75 का रहा है. इसके अलावा उन्होंने 47 लिस्ट ए और 21 टी20 मैच भी खेले हैं.

2021-22 के रणजी खिताब में अहम भूमिका

सारांश मध्य प्रदेश की 2021-22 सीजन की ऐतिहासिक रणजी ट्रॉफी जीत के अहम खिलाड़ियों में शामिल रहे. निचले क्रम में बल्लेबाजी के साथ-साथ अहम मौकों पर विकेट निकालने की उनकी काबिलियत ने टीम को कई बार हारने से बचाया. यही वजह है कि उन्हें डोमेस्टिक क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद ऑलराउंडरों में गिना जाने लगा.

दलीप ट्रॉफी और इंडिया ए दौरे से टीम इंडिया तक

2025 के दलीप ट्रॉफी में सेंट्रल जोन के लिए खेलते हुए सारांश ने सिर्फ दो मैचों में 16 विकेट झटके और प्लेयर ऑफ द सीरीज का खिताब जीता. सेंट्रल जोन इस टूर्नामेंट का चैंपियन भी बना. इसके बाद इंडिया ए के श्रीलंका दौरे पर भी उन्होंने अपनी दावेदारी और मजबूत की. जून-जुलाई में खेले गए अनऑफिशियल टेस्ट मैचों में से एक में उन्होंने छह विकेट लेने के साथ नाबाद 70 रन की पारी भी खेली, जिसने चयनकर्ताओं का पूरा भरोसा जीत लिया.

यह भी पढ़ें - चीनी मिल खोलने में कितना खर्चा आता है, यहां गन्ने से कैसे बनती है चीनी?

टीम इंडिया में मिली एंट्री

आखिरकार जुलाई 2026 में सारांश को श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टेस्ट टीम में पहली बार शामिल किया गया. चोटिल वॉशिंगटन सुंदर की जगह उन्हें टीम में लिया गया था. कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए दूसरे टेस्ट में उन्हें अंतरराष्ट्रीय डेब्यू का मौका मिला. इस मैच में उन्होंने प्लेइंग इलेवन में संक्रमण से जूझ रहे स्पिनर कुलदीप यादव की जगह ली.

आर अश्विन हैं उनके रोल मॉडल

सारांश ने पहले एक इंटरव्यू में बताया था कि वे अक्सर दिग्गज ऑफ स्पिनर आर अश्विन को देखकर प्रेरणा लेते हैं और उनकी तरह ही समर्पण के साथ अपने क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाना चाहते हैं. उनकी यह सोच और मेहनत आखिरकार 33 साल की उम्र में रंग लाई, और वे भारत के लिए डेब्यू करने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ियों में शामिल हो गए.

यह भी पढ़ें - गन्ने के अलावा किस-किस चीज से बनती है चीनी, सबसे सस्ती कौन सी?

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