भाजपा के चुनावी वॉर रूम से लेकर ममता बनर्जी के करीबी बनने तक, खामोशी से उभरे प्रतीक जैन

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के सह-संस्थापक प्रतीक जैन से जुड़े ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई ने राजनीतिक हलचल मचा दी है. समकालीन भारतीय राजनीति में पर्दे के पीछे काम करने वाले प्रमुख लोगों में I-PAC के सह संस्थापक प्रतीक जैन का नाम भी शामिल है, जिनके लाउडन स्ट्रीट स्थित घर और उनके साल्ट लेक ऑफिस पर ED की टीम ने गुरुवार (8 जनवरी, 2026) को कोयला घोटाला से जुड़े धन शोधन मामले के सिलसिले में छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया. प्रतीक जैन ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के वार रुम में अहम भूमिका निभाने के बाद साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का डिजिटल और जमीनी विमर्श तैयार करने से लेकर 2024 के लोकसभा चुनाव में इसकी पतवार को मजबूती से थामे रखा. 2014 में पीएम मोदी के साथ थे प्रतीक जैन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर 16 मई, 2014 की एक तस्वीर है, जिसमें एक युवा व्यक्ति को अपने सहयोगियों के साथ विजयी नरेंद्र मोदी के बगल में खड़ा देखा जा सकता है और उनके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान है. यह वही दिन था जब भाजपा-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने लोकसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल की थी. एक दशक से भी अधिक समय बाद, प्रतीक जैन भारत के राजनीतिक परिदृश्य के दूसरे छोर पर खड़े हैं और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रमुख रणनीतिकार हैं, जिन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से अपनी पार्टी के आईटी और रणनीति प्रभारी के रूप में वर्णित किया है. जैन के साथ काम करने वाले लोग कहते हैं कि धैर्य उनके लिए सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक राजनीतिक हथियार है, ‘संकटों से उबरने, जनता के गुस्से के शांत होने का इंतजार करने और विमर्श को अपने आप खत्म होने देने का एक तरीका.’ साल 2013 में, जब भाजपा मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की तैयारी कर रही थी, तब जैन (चुनावी रणनीतिकार) प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली मुख्य टीम का हिस्सा थे. उस समय एक कम प्रसिद्ध डेटा और संचार विशेषज्ञ होने के बावजूद, जैन ने अंदरूनी लोगों के बीच न सिर्फ चुनावी गणित बल्कि नेताओं के व्यवहार को समझने, कैमरे पर उनके हावभाव को समझने, टेलीविजन स्क्रीन के माध्यम से आक्रोश के प्रसार और अधीरता को बेअसर करने में अपनी विशेषज्ञता के लिए ख्याति हासिल की. IIT मुंबई से प्रतीक जैन ने ली बीटेक की डिग्री झारखंड में जन्मे जैन ने 2008 में IIT मुंबई में दाखिला लिया और मेटालर्जिकल इंजीनियरिंग और पदार्थ विज्ञान में बीटेक की डिग्री हासिल की. उनका प्रारंभिक करियर राजनीति से बिल्कुल अलग था.  एक निजी बैंक में प्रशिक्षु के रूप में काम करने के बाद, उन्होंने 2012 से एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में डेटा विश्लेषक के रूप में काम किया. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद, जैन ने I-PAC की सह-स्थापना की और इसके संचालन के प्रमुख व्यक्ति के रूप में उभरे. I-PAC के चेहरे किशोर की तुलना में वह कम चर्चित रहे, लेकिन उनके समान ही महत्वपूर्ण थे. जैन सफलता का श्रेय अक्सर अपने सहयोगियों को दिया करते हैं. यह भी पढ़ेंः 'जब तक ममता बनर्जी पुलिस के साथ नहीं पहुंची, तब तक...', I-PAC रेड को लेकर ED ने बंगाल CM पर लगाए गंभीर आरोप

Jan 9, 2026 - 03:30
 0
भाजपा के चुनावी वॉर रूम से लेकर ममता बनर्जी के करीबी बनने तक, खामोशी से उभरे प्रतीक जैन

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के सह-संस्थापक प्रतीक जैन से जुड़े ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई ने राजनीतिक हलचल मचा दी है. समकालीन भारतीय राजनीति में पर्दे के पीछे काम करने वाले प्रमुख लोगों में I-PAC के सह संस्थापक प्रतीक जैन का नाम भी शामिल है, जिनके लाउडन स्ट्रीट स्थित घर और उनके साल्ट लेक ऑफिस पर ED की टीम ने गुरुवार (8 जनवरी, 2026) को कोयला घोटाला से जुड़े धन शोधन मामले के सिलसिले में छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया.

प्रतीक जैन ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के वार रुम में अहम भूमिका निभाने के बाद साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का डिजिटल और जमीनी विमर्श तैयार करने से लेकर 2024 के लोकसभा चुनाव में इसकी पतवार को मजबूती से थामे रखा.

2014 में पीएम मोदी के साथ थे प्रतीक जैन

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर 16 मई, 2014 की एक तस्वीर है, जिसमें एक युवा व्यक्ति को अपने सहयोगियों के साथ विजयी नरेंद्र मोदी के बगल में खड़ा देखा जा सकता है और उनके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान है. यह वही दिन था जब भाजपा-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने लोकसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल की थी.

एक दशक से भी अधिक समय बाद, प्रतीक जैन भारत के राजनीतिक परिदृश्य के दूसरे छोर पर खड़े हैं और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रमुख रणनीतिकार हैं, जिन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से अपनी पार्टी के आईटी और रणनीति प्रभारी के रूप में वर्णित किया है.

जैन के साथ काम करने वाले लोग कहते हैं कि धैर्य उनके लिए सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक राजनीतिक हथियार है, ‘संकटों से उबरने, जनता के गुस्से के शांत होने का इंतजार करने और विमर्श को अपने आप खत्म होने देने का एक तरीका.’

साल 2013 में, जब भाजपा मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की तैयारी कर रही थी, तब जैन (चुनावी रणनीतिकार) प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली मुख्य टीम का हिस्सा थे. उस समय एक कम प्रसिद्ध डेटा और संचार विशेषज्ञ होने के बावजूद, जैन ने अंदरूनी लोगों के बीच न सिर्फ चुनावी गणित बल्कि नेताओं के व्यवहार को समझने, कैमरे पर उनके हावभाव को समझने, टेलीविजन स्क्रीन के माध्यम से आक्रोश के प्रसार और अधीरता को बेअसर करने में अपनी विशेषज्ञता के लिए ख्याति हासिल की.

IIT मुंबई से प्रतीक जैन ने ली बीटेक की डिग्री

झारखंड में जन्मे जैन ने 2008 में IIT मुंबई में दाखिला लिया और मेटालर्जिकल इंजीनियरिंग और पदार्थ विज्ञान में बीटेक की डिग्री हासिल की. उनका प्रारंभिक करियर राजनीति से बिल्कुल अलग था.  एक निजी बैंक में प्रशिक्षु के रूप में काम करने के बाद, उन्होंने 2012 से एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में डेटा विश्लेषक के रूप में काम किया.

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद, जैन ने I-PAC की सह-स्थापना की और इसके संचालन के प्रमुख व्यक्ति के रूप में उभरे. I-PAC के चेहरे किशोर की तुलना में वह कम चर्चित रहे, लेकिन उनके समान ही महत्वपूर्ण थे. जैन सफलता का श्रेय अक्सर अपने सहयोगियों को दिया करते हैं.

यह भी पढ़ेंः 'जब तक ममता बनर्जी पुलिस के साथ नहीं पहुंची, तब तक...', I-PAC रेड को लेकर ED ने बंगाल CM पर लगाए गंभीर आरोप

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow