फर्जी वकीलों का मामला CBI को सौंपने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका, 'कॉक्रोच जनता पार्टी' की फंडिंग और गतिविधियों की जांच की भी मांग
फर्जी वकीलों और नकली लॉ डिग्रियों के मामले की सीबीआई जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल हुई है. याचिकाकर्ता ने अदालती कार्रवाई के व्यावसायिक दुरुपयोग का मसला उठाते हुए 'कॉक्रोच जनता पार्टी' से जुड़े लोगों की गतिविधियों की जांच की भी मांग की है. इस याचिका का मुख्य आधार एक मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस की तरफ से की गई टिप्पणी और उसे लेकर हुआ विवाद है. 15 मई को चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने फर्जी वकीलों को लेकर चिंता जताई थी. उन्होंने ऐसे लोगों की तुलना “कॉक्रोच” और “परजीवी” से की थी. इस टिप्पणी को युवाओं का अपमान बता कर कई लोगों ने सोशल मीडिया पर विरोध किया. अमेरिका के बोस्टन में रहने वाले अभिजीत दिपके नाम के 'कॉक्रोच जनता पार्टी' के नाम से एक ऑनलाइन अभियान भी शुरू कर दिया. हालांकि, चीफ जस्टिस ने अपनी टिप्पणी के बारे में स्पष्टीकरण भी दिया कि उन्होंने बेरोजगार युवाओं के लिए कुछ नहीं कहा. उनकी टिप्पणी फर्जी डिग्री लेकर व्यवस्था का दुरुपयोग करने वालों के लिए थी. चीफ जस्टिस के स्पष्टीकरण के बावजूद कोर्ट की सुनवाई का एक छोटा वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल कर मामले को और हवा दी गई. अब राजा चौधरी नाम के याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से फर्जी लॉ डिग्रियों की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है. याचिका में कहा गया है कि फर्जी डिग्री के आधार पर वकालत कर रहे लोग न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता और पेशे की गरिमा को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं. याचिकाकर्ता ने लोगों को भड़काने की कोशिश का लगाया आरोप याचिकाकर्ता ने यह आरोप भी लगाया है कि अदालत की मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश कर लोगों को भड़काने की कोशिश की जा रही है. कोर्ट की सुनवाई के अंशों का मीम, वीडियो और प्रचार सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके ज़रिए संगठित तरीके से आर्थिक लाभ कमाया जा रहा है. याचिका में यह भी बताया गया है कि 'कॉक्रोच जनता पार्टी' नाम के ट्रेडमार्क आवेदन दाखिल किए गए हैं. याचिकाकर्ता ने 'कॉक्रोच जनता पार्टी' के पूरे नेटवर्क, उसकी फंडिंग और ऑनलाइन गतिविधियों की जांच की मांग की है. याचिका में कहा गया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अदालती कार्यवाही की उचित आलोचना का कोई विरोध नहीं करता. लेकिन कोर्ट की सुनवाई का व्यावसायिक इस्तेमाल करना और भ्रम फैलाना गलत है. इस पर रोक लगनी चाहिए. यह भी पढ़ें : 'सब फाइनल है...', होर्मुज और ईरान को लेकर नेतन्याहू ने किया बड़ा दावा, जानें ट्रंप से फोन पर क्या हुई बात?
फर्जी वकीलों और नकली लॉ डिग्रियों के मामले की सीबीआई जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल हुई है. याचिकाकर्ता ने अदालती कार्रवाई के व्यावसायिक दुरुपयोग का मसला उठाते हुए 'कॉक्रोच जनता पार्टी' से जुड़े लोगों की गतिविधियों की जांच की भी मांग की है. इस याचिका का मुख्य आधार एक मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस की तरफ से की गई टिप्पणी और उसे लेकर हुआ विवाद है.
15 मई को चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने फर्जी वकीलों को लेकर चिंता जताई थी. उन्होंने ऐसे लोगों की तुलना “कॉक्रोच” और “परजीवी” से की थी. इस टिप्पणी को युवाओं का अपमान बता कर कई लोगों ने सोशल मीडिया पर विरोध किया. अमेरिका के बोस्टन में रहने वाले अभिजीत दिपके नाम के 'कॉक्रोच जनता पार्टी' के नाम से एक ऑनलाइन अभियान भी शुरू कर दिया.
हालांकि, चीफ जस्टिस ने अपनी टिप्पणी के बारे में स्पष्टीकरण भी दिया कि उन्होंने बेरोजगार युवाओं के लिए कुछ नहीं कहा. उनकी टिप्पणी फर्जी डिग्री लेकर व्यवस्था का दुरुपयोग करने वालों के लिए थी. चीफ जस्टिस के स्पष्टीकरण के बावजूद कोर्ट की सुनवाई का एक छोटा वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल कर मामले को और हवा दी गई.
अब राजा चौधरी नाम के याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से फर्जी लॉ डिग्रियों की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है. याचिका में कहा गया है कि फर्जी डिग्री के आधार पर वकालत कर रहे लोग न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता और पेशे की गरिमा को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं.
याचिकाकर्ता ने लोगों को भड़काने की कोशिश का लगाया आरोप
याचिकाकर्ता ने यह आरोप भी लगाया है कि अदालत की मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश कर लोगों को भड़काने की कोशिश की जा रही है. कोर्ट की सुनवाई के अंशों का मीम, वीडियो और प्रचार सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके ज़रिए संगठित तरीके से आर्थिक लाभ कमाया जा रहा है. याचिका में यह भी बताया गया है कि 'कॉक्रोच जनता पार्टी' नाम के ट्रेडमार्क आवेदन दाखिल किए गए हैं.
याचिकाकर्ता ने 'कॉक्रोच जनता पार्टी' के पूरे नेटवर्क, उसकी फंडिंग और ऑनलाइन गतिविधियों की जांच की मांग की है. याचिका में कहा गया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अदालती कार्यवाही की उचित आलोचना का कोई विरोध नहीं करता. लेकिन कोर्ट की सुनवाई का व्यावसायिक इस्तेमाल करना और भ्रम फैलाना गलत है. इस पर रोक लगनी चाहिए.
यह भी पढ़ें : 'सब फाइनल है...', होर्मुज और ईरान को लेकर नेतन्याहू ने किया बड़ा दावा, जानें ट्रंप से फोन पर क्या हुई बात?
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