पेन किलर को कैसे पता चलता है कि शरीर में कहां हो रहा दर्द? जानें सच

How Painkillers Work : जब शरीर के किसी हिस्से में चोट लगती है, सूजन होती है या कोई और परेशानी होती है, तो वहां मौजूद नसें दर्द से जुड़े सिग्नल दिमाग तक भेजती हैं. दिमाग इन सिग्नल को समझता है और तभी हमें दर्द महसूस होता है. ऐसे में अक्सर मन में सवाल आता है कि जब हम पेन किलर की गोली खाते हैं, तो उसे कैसे पता चलता है कि दर्द सिर में है, पेट में है या पैर में. सच यह है कि पेन किलर को यह बिल्कुल पता नही होता कि दर्द ठीक किस जगह हो रहा है, फिर भी वह राहत पहुंचा देती है? दवा कैसे काम करती है? चोट या सूजन होने पर शरीर में कुछ केमिकल निकलते हैं, जिनमें प्रोस्टाग्लैंडिन मुख्य मानना जाता है  है. ये पदार्थ नसों को ज्यादा संवेदनशील बना देते हैं, जिससे दर्द का सिग्नल तेजी से दिमाग तक पहुंचता है और हमें दर्द महसूस होता है. दरअसल यह पूरी प्रोसेस  शरीर की एक तरह की सुरक्षा प्रणाली है जिससे दर्द के जरिए शरीर हमें बताता है  कि कहीं कुछ गड़बड़ है, ताकि हम उस हिस्से का ध्यान रखें या उसे और नुकसान से बचाएं. दरअसल, दवा खाने के बाद उसका सक्रिय तत्व पेट और आंतों से अवशोषित होकर खून में मिल जाता है और खून इसे शरीर के हर हिस्से तक पहुंचाता है. यही वजह है कि दवा को दर्द की सही जगह ढूंढने की कोई जरूरत नहीं होती, वह अपने आप ही पूरे शरीर में फैल जाती है. ज्यादातर आम पेन किलर प्रोस्टाग्लैंडिन बनने की प्रक्रिया को कम या धीमा कर देती हैं, जिससे दर्द और सूजन दोनों घटने लगते हैं. आमतौर पर दवा असर दिखाना 20 से 30 मिनट के भीतर शुरू कर देती है, क्योंकि इतने समय में सक्रिय तत्व खून में अच्छी मात्रा में पहुंच जाता है और अपना काम शुरू कर देता है. यह भी पढ़ेंः भारत में बढ़े डायबिटीज और मोटापे के मामले, बीपी में मामूली राहत सिर्फ दर्द वाली जगह पर क्यों करती है काम दवाइयां? जगह पर दवाओं के काम करने की वजह यह है कि चोट या सूजन वाले हिस्से में केमिकल एक्टिविटी बाकी शरीर से ज्यादा होती है और पेन किलर वहीं की गतिविधि को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है. इसी वजह से राहत उसी हिस्से में महसूस होती है, भले ही दवा पूरे शरीर में घूम रही हो. कुछ दवाएं प्रोस्टाग्लैंडिन को कम करती हैं तो कुछ सीधे नसों और दिमाग पर असर डालती हैं. इसलिए अलग-अलग तरह के दर्द के लिए अलग दवा दी जाती है. हर दर्द के लिए एक ही पेन किलर सही नही मानी जाती. क्या पेन किलर लेना हमेशा सुरक्षित? किसी भी पेन किलर को बार-बार या जरूरत से ज्यादा मात्रा में लेना सही नहीं माना जाता, क्योंकि कुछ दवाएं पेट, किडनी और लिवर जैसे अंगों पर बुरा असर डाल सकती हैं. यह खून के जरिए पूरे शरीर में पहुंचती है और दर्द पैदा करने वाले केमिकल सिग्नल या नसों-दिमाग के दर्द संकेत को प्रभावित करती है. इसी वजह से हमें दर्द वाली जगह पर राहत महसूस होती है. दवा की सही मात्रा और इस्तेमाल हमेशा डॉक्टर या फार्मासिस्ट की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए. यह भी पढ़ेंः मेडिकल स्टोर से नकली दवा तो नहीं खरीद रहे? ऐसे करें पहचान

Aug 24, 2026 - 17:30
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पेन किलर को कैसे पता चलता है कि शरीर में कहां हो रहा दर्द? जानें सच

How Painkillers Work : जब शरीर के किसी हिस्से में चोट लगती है, सूजन होती है या कोई और परेशानी होती है, तो वहां मौजूद नसें दर्द से जुड़े सिग्नल दिमाग तक भेजती हैं. दिमाग इन सिग्नल को समझता है और तभी हमें दर्द महसूस होता है. ऐसे में अक्सर मन में सवाल आता है कि जब हम पेन किलर की गोली खाते हैं, तो उसे कैसे पता चलता है कि दर्द सिर में है, पेट में है या पैर में. सच यह है कि पेन किलर को यह बिल्कुल पता नही होता कि दर्द ठीक किस जगह हो रहा है, फिर भी वह राहत पहुंचा देती है?

दवा कैसे काम करती है?

चोट या सूजन होने पर शरीर में कुछ केमिकल निकलते हैं, जिनमें प्रोस्टाग्लैंडिन मुख्य मानना जाता है  है. ये पदार्थ नसों को ज्यादा संवेदनशील बना देते हैं, जिससे दर्द का सिग्नल तेजी से दिमाग तक पहुंचता है और हमें दर्द महसूस होता है. दरअसल यह पूरी प्रोसेस  शरीर की एक तरह की सुरक्षा प्रणाली है जिससे दर्द के जरिए शरीर हमें बताता है  कि कहीं कुछ गड़बड़ है, ताकि हम उस हिस्से का ध्यान रखें या उसे और नुकसान से बचाएं.

दरअसल, दवा खाने के बाद उसका सक्रिय तत्व पेट और आंतों से अवशोषित होकर खून में मिल जाता है और खून इसे शरीर के हर हिस्से तक पहुंचाता है. यही वजह है कि दवा को दर्द की सही जगह ढूंढने की कोई जरूरत नहीं होती, वह अपने आप ही पूरे शरीर में फैल जाती है. ज्यादातर आम पेन किलर प्रोस्टाग्लैंडिन बनने की प्रक्रिया को कम या धीमा कर देती हैं, जिससे दर्द और सूजन दोनों घटने लगते हैं. आमतौर पर दवा असर दिखाना 20 से 30 मिनट के भीतर शुरू कर देती है, क्योंकि इतने समय में सक्रिय तत्व खून में अच्छी मात्रा में पहुंच जाता है और अपना काम शुरू कर देता है.

यह भी पढ़ेंः भारत में बढ़े डायबिटीज और मोटापे के मामले, बीपी में मामूली राहत

सिर्फ दर्द वाली जगह पर क्यों करती है काम दवाइयां?

जगह पर दवाओं के काम करने की वजह यह है कि चोट या सूजन वाले हिस्से में केमिकल एक्टिविटी बाकी शरीर से ज्यादा होती है और पेन किलर वहीं की गतिविधि को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है. इसी वजह से राहत उसी हिस्से में महसूस होती है, भले ही दवा पूरे शरीर में घूम रही हो. कुछ दवाएं प्रोस्टाग्लैंडिन को कम करती हैं तो कुछ सीधे नसों और दिमाग पर असर डालती हैं. इसलिए अलग-अलग तरह के दर्द के लिए अलग दवा दी जाती है. हर दर्द के लिए एक ही पेन किलर सही नही मानी जाती.

क्या पेन किलर लेना हमेशा सुरक्षित?

किसी भी पेन किलर को बार-बार या जरूरत से ज्यादा मात्रा में लेना सही नहीं माना जाता, क्योंकि कुछ दवाएं पेट, किडनी और लिवर जैसे अंगों पर बुरा असर डाल सकती हैं. यह खून के जरिए पूरे शरीर में पहुंचती है और दर्द पैदा करने वाले केमिकल सिग्नल या नसों-दिमाग के दर्द संकेत को प्रभावित करती है. इसी वजह से हमें दर्द वाली जगह पर राहत महसूस होती है. दवा की सही मात्रा और इस्तेमाल हमेशा डॉक्टर या फार्मासिस्ट की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए.

यह भी पढ़ेंः मेडिकल स्टोर से नकली दवा तो नहीं खरीद रहे? ऐसे करें पहचान

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